लॉकडाउन में घर वापिसी के सारे जतन हो गए बेकार

हरिद्वार में फंसे है आदिवासी अंचल के सैकड़ों मजदूर, जब किसी ने नहीं सुनी मजदूरों की गुहार तो पैदल ही सडक़ पर निकल पड़े मजदूर

By: brijesh sirmour

Published: 23 May 2020, 08:05 PM IST

शहडोल. अपने घर से हजार किलोमीटर दूर 18 सौ से 25 सौ रुपए प्रतिमाह के किराए के मकान में रह रहे आदिवासी अंचल के सैकड़ों मजदूरों के समक्ष रोजी-रोटी की समस्या के साथ अब घर वापिसी की नाउम्मीदी ने पैदल सडक़ नापने को मजबूर कर दिया है। हरिद्वार में लॉकडाउन में आदिवासी अंचल के फंसे सैकड़ों मजदूर पिछले दो सप्ताह से वापिसी की गुहार लगा रहे हैं, मगर उनकी गुहार को कोई नहीं सुन रहा है। मजदूरों का कहना है कि उन्होने शहडोल संसदीय क्षेत्र की सांसद हिमाद्री सिंह से भी चर्चा की है, लेकिन उनकी गांव वापिसी के लिए कोई पहल नहीं की जा रही है। नतीजतन करीब डेढ़ सौ मजदूर चार दिन पहले हरिद्वार से शहडोल तक एक हजार किलोमीटर के सफर को पैदल ही तय करने निकल पड़े है। जबकि अन्य कई सैकड़ों मजदूर हरिद्वार में ही सामाजिक कार्यकर्ताओं की भोजन सामग्री के भरोसे गांव वापिसी की बाट जो रहे हैं। मजदूरों ने पत्रिका को बताया है कि हरिद्वार के डीएम ने उन्हे पिछले 15 दिनों से आश्वासन देकर रखा है, उनकी शीघ्र ही वापिसी कराई जाएगी, लेकिन यह कब तक होगा? स्पष्ट नहीं किया जा रहा है। हालात यह है कि मजदूरों के पास पैसे भी खतम हो गए हैं और मकान मालिक को किराया देना तो दूर दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। यदि कोई सामाजिक कार्यकर्ता उन्हे भोजन पहुंचा जाता है तो ठीक है, अन्यथा कभी-कभी तो उन्हे भूखे पेट ही सोना पड़ता है।
मदद तो दूर कोई नहीं उठाता फोन
हरिद्वार में फंसे गोहपारू जनपद अंतर्गत ग्राम बुढनवाह निवासी श्रमिक राजेश कुमार यादव ने बताया कि उसकी तीन साल की बच्ची की तबियत बहुत खराब है। वह पिछले एक महीने से जिले के कई जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों सहित हेल्पलाइन नम्बरों पर कॉल करके मदद की गुहार लगा चुकें हैं। हालात यह बन गए है अब कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि उनका फोन ही नहीं उठाता है। सबने चुप्पी साध रखी है। ऐसे में वो क्या करें? कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
109 किलोमीटर में हार गया हिम्मत
बताया गया है कि चार दिन पहले हरिद्वार से शहडोल के लिए पैदल निकले 150 मजदूरों में एक मजदूर 109 किलोमीटर दूर जाने के बाद वापिस हरिद्वार लौट आया है, क्योंकि उसे पैदल चलने में परेशानी हो रही थी। इसके अलावा भीषण गर्मी में पैदल चलने पर कई मजदूरों के पैरोंं में छाले तक हो गए हैं। पैदल मजदूरों में शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, ब्यौहारी और सतना के मजदूर हैं।

brijesh sirmour Reporting
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