कागजों में कुपोषण से जंग कोरोना संकट के बीच कुपोषित बच्चों को भूले जिम्मेदार

आदिवासी अंचल में कागजों में अधिकारियों का सुपोषण अभियान, बैठकों तक सीमित निर्देश। लाने थे 560 बच्चे, भर्ती हुए सिर्फ 161

By: Hitendra Sharma

Published: 03 Oct 2020, 07:26 AM IST

शहडोल. आदिवासी अंचल में अफसर कागजों में कुपोषण के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। संभाग में 40 हजार से ज्यादा कुपोषित बच्चे हैं। अधिकारी इन दिनों सुपोषण अभियान भी चला रहे हैं। मैदानी अधिकारियों के पेंच कसे जा रहे हैं। बच्चों को एनआरसी सेंटरों तक लाने में फोकस किया जा रहा है लेकिन मैदानी हकीकत एकदम अलग हैं। कोरोना काल में मैदानी अधिकारियों ने भी कुपोषित बच्चों से दूरियां बना ली। स्थिति यह है कि पिछले चार माह में जिला अस्पताल सहित ब्लॉकों में संचालित पोषण पुनर्वास केन्द्र में कुपोषित बच्चों को भर्ती ही नहीं कराया गया। पिछले चार माह में 560 कुपोषित बच्चों को भर्ती करने का लक्ष्य था लेकिन मैदानी अमला सिर्फ 161 कुपोषित बच्चों को ही भर्ती करा सका है।

विभाग की दलील: परिजन नहीं भेजना चाहते हैं बच्चे
पोषण पुनर्वास केन्द्रों में कम बच्चों को भर्ती न होने पर अधिकारी अब परिजनों द्वारा न भेजने की दलील दी जा रही है। महिला बाल विकास विभाग का कहना है कि कोरोना के चलते परिजन बच्चों को भेजना नहीं चाह रहे हैं लेकिन मैदानी अमला परिजनों को यह समझा नहीं पा रहा है कि पोषण पुर्नवास केन्द्र में कुपोषित बच्चों के लिए हर प्रकार की सुविधा मौजूद है व कोरोना संक्रमण के बीच कोई खतरा नहीं है।

गिनती के कुपोषित बच्चे भर्ती
इसमें जिला अस्पताल के पोषण पुर्नवास केन्द्र में कुपोषित बच्चों के लिए 20 बेड है। कुपोषित बच्चों को 14 दिन तक पोषण पुनर्वास केन्द्र में रखा जाता है। जिला अस्पताल के पोषण पुर्नवास केन्द्र में हर माह 40 कुपोषित बच्चे भर्ती होना चाहिए लेकिन लक्ष्य से बहुत कम बच्चों को हर माह भर्ती कराया जा रहा है। वहीं जिले में अन्य पोषण पुर्नवास केन्द्रों में दस बेड है। एक माह में इन केन्द्रों पर 20 कुपोषित बच्चों को लाना चाहिए लेकिन यहां भी बहुत कम संख्या में बच्चों का मैदानी अमला भर्ती करा रहा है। जिले में कोरोना संक्रमण शुरू होने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने अप्रैल एवं मई माह तो कुपोषित बच्चों को केन्द्रों में भर्ती ही नहीं कराया। जिले में जून माह से कुपोषित बच्चों को केन्द्रों में भर्ती कराया जा रहा है। जिले में छह जगहों पर पोषण पुर्नवास केन्द्र में बच्चों को भर्ती कराया जाता है। सभी केन्द्रों को मिलाकर 70 बेड है। जिन जगहों पर पोषण पुर्नवास केन्द्र हैं, उसमें जिला अस्पताल, सिंहपुर, गोहपारू, बुढ़ार, जयसिंहनगर और ब्यौहारी शामिल हैं।

निर्देशों के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति
इन दिनों सुपोषण अभियान चलाया जा रहा है। कमिश्नर कलेक्टर लगातार बैठकें ले रहे हैं। आदिवासी अंचल से कुपोषण को दूर करने की रणनीति तैयार की जा रही हैे लेकिन मैदानी स्थिति पर फोकस नहीं किया जा रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो संभाग में 40 हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषित हैं। पूर्व में कुपोषण से बच्चों की मौत तक हो चुकी है। अकेले शहडोल की बात करे तो 20 हजार से ज्यादा कुपोषित बच्चे दर्ज हैं।

पोषण पुनर्वास केन्द्र चार माह लक्ष्य भर्ती बच्चे
जिला अस्पताल 160 24
सिंहपुर 80 23
गोहपारू 80 26
बुढ़ार 80 43
जयसिंहनगर 80 23
ब्यौहारी 80 22
(एनआरसी सेंटरों में जून से लेकर सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार)

संभागीय कमिश्नर नरेश कुमार पाल का कहना है कि एनआरसी सेंटरों में बच्चों की बेहद कम संख्या गंभीर मामला है। अधिकारियों की बैठक लेंगे। कहां पर हमारी कमी है, बच्चे क्यों नहीं आ रहे हैं फोकस करते हुए कुपोषित बच्चों को भर्ती कराया जाएगा।

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