औचक पहुंचे अपर कलेक्टर, अस्पताल में नहीं मिले डॉक्टर, आरक्षित नहीं थे बिस्तर, नोटिस जारी

बिना चिकित्सक और व्यवस्था के कोविड मरीजों के इलाज को लेकर पत्रिका ने उठाया था मुद्दा

By: Ramashankar mishra

Published: 10 May 2021, 12:29 PM IST

शहडोल. शहर के निजी अस्पतालों में कोविड मरीजों के इलाज में की जा रही लापरवाही को लेकर अधिकारियों ने संज्ञान लिया है। रीवा रोड स्थित अमृता हॉस्पिटल में कोरोना संक्रमण को लेकर लापरवाही बरते जाने का मामला सामने आया है। अपर कलेक्टर अर्पित वर्मा ने अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। दरअसल बढ़ते हुए कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण व मरीजों के समुचित इलाज को ध्यान में रखते हुए निजी चिकित्सालयों में भी मरीजों के इलाज की अनुमति प्रदान की गई है। इसके साथ ही आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र हितग्राहियों के नि:शुल्क इलाज का प्रावधान है। अपर कलेक्टर अर्पित वर्मा व मुख्य चिकित्सा अधिकारी एम एस सागर टीम के साथ अमृत हॉस्पिटल की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने पहुंचे। जहां निरीक्षण के दौरान अस्पताल में न तो सोशल डिस्टेंसिंग नजर आई और न ही जिला प्रशासन द्वारा जारी गाइड लाइन का पालन ही हो रहा था। यहां तक कि अस्पताल में मरीज तो मौजूद थे लेकिन उनकी देखरेख व इलाज के लिए चिकित्सक मौजूद नहीं थे। निजी चिकित्सालयों में अधूरी व्यवस्था व बिना चिकित्सकों के इलाज को लेकर पत्रिका ने भी खबर प्रकाशित की थी। जिसके बाद निरीक्षण पर पहुंचे अपर कलेक्टर ने अव्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी किया है।
न दस्तावेज मिले और न ही चिकित्सक
अमृता हॉस्पिटल का निरीक्षण करने पहुंचे अपर कलेक्टर एवं सीएमएचओ की टीम भर्ती कोविड मरीजों की एवं आयुष्मान योजना आदि की स्थिति जाननी चाही। प्रबंधन द्वारा उपलब्ध नहीं कराई गई। मौके पर एक भी चिकित्सक अस्पताल में नहीं मिले। जबकी बड़ी संख्या में मरीज एवं परिजन अस्पताल में मौजूद थे।
आयुष्मान योजना से कोविड मरीजों के लिए आरक्षित नहीं किए बेड

अपर कलेक्टर द्वारा जारी किए गए नोटिस में कहा गया है कि कलेक्टर द्वारा जारी पत्र के अनुसार आयुष्मान अस्पताल के पात्र हितग्राहियों के लिए विस्तरों की व्यवस्था, इलाज की युक्तियुक्त दरें तथा उसका प्रदर्शन, अस्पतालो में दवाओं तथा ऑक्सीजन की उपलब्धता एवं अस्पतालों में बिस्तरो की उपलब्धताकी जानकारी सार्वजनिक करने सहित अन्य पहलुओं को शामिल किया गया था। आयुष्मान योजना के तहत 20 प्रतिशत बिस्तर को आरक्षित करने के निर्देश हैं इसके बाद भी अस्पताल में उक्त योजना के पात्र हितग्राहियों के लिए विस्तर आरक्षित नहीं किए गए थे। इलाज से संबंधित ओपीडी एवं आईपीसी की दर भी मुख्य द्वारा व पूछताछ केन्द्र में प्रदर्शित नहीं की गई थी। जबकि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा पूर्व में इसके लिए निर्देशित भी किया गया था। बैठक में भी इसके लिए पूर्व में निर्देशित किया जा चुका था।
बिना मास्क 20 लोगों को करा रहा था नास्ता
अस्पताल परिसर में संचालित कैंटीन में भी कोविड-19 को लेकर जारी निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा था। कैंटीन में बिना मास्क लगाए ही कर्मचारी द्वारा वहां बैठे 20 लोगों को नास्ता कराया जा रहा था। जिससे संक्रमण फैलने का खतरा लगातार बना हुआ है। अस्पताल प्रबंधन इसे नजर अंदाज कर रहा है।
अस्पताल में जुटा रखी थी भीड़, थर्मल स्क्रीनिंग भी नहीं, बिना मास्क मिले कर्मचारी
अधिकारी निरीक्षण करने पहुंचे तो अस्पताल परिसर में काफी भीड़-भाड़ थी। मुख्य द्वार से आने जाने वालों की थर्मल स्क्रीनिंग भी नहीं हो रही थी। अस्पताल कर्मचारी पास-पास बैठकर एक दूसरे से बात कर रहे थे। जिनके पास ने तो एन-95 मास्क था और न फेस शील्ड ही उपलब्ध था। अस्पताल परिसर में प्रोटोकाल का किसी भी प्रकार से पालन नहीं किया जा रहा था। अपर कलेक्टर अर्पित वर्मा के अनुसार, अमृता अस्पताल का ेनोटिस जारी करके जवाब मांगा गया है।

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