scriptconfusion in people about fortified rice in mp, rumors of plastic rice | Ground Report : हम खेतिहर हैं, हमसे ज्यादा कौन अनाज परख सकता है, कोटा में बांट रहे नकली चावल | Patrika News

Ground Report : हम खेतिहर हैं, हमसे ज्यादा कौन अनाज परख सकता है, कोटा में बांट रहे नकली चावल

locationशाहडोलPublished: Nov 24, 2022 09:32:12 pm

Submitted by:

shubham singh

- फोर्टिफाइड चावल को लेकर आदिवासी इलाकों में भ्रम, पकाने से पहले अलग कर रहे चावल
- आदिवासियों के स्वास्थ्य व कुपोषण से जंग में फोर्टिफाइड चावल के नाम पर हर जिलों में करोड़ों खर्च
- मौलिक अधिकारों का हनन, बांट रहे फोर्टिफाइड चावल, जागरुक भी नहीं किया
- मोटा अनाज न देकर फोर्टिफाइड चावल पर जोर, बच्चों को चावल छूने तक नहीं दे रहे आदिवासी

fortified rice in village
fortified rice in village
शुभम सिंह बघेल@शहडोल.
प्रदेश के आदिवासी इलाकों में सरकार इन दिनों कुपोषण और एनीमिया से लडऩे फोर्टिफाइड चावल दे रही है। कई क्षेत्रों में पिछले 5 माह से गेहूं की सप्लाई भी पूरी तरह से बंद कर दी है। इस बीच अब आदिवासी परिवारों के बीच राशन का संकट आ गया है। आदिवासी परिवार फोर्टिफाइड राइस को नकली और प्लास्टिक का चावल मान रहे हैं। गांव-गांव नकली चावल बंटने की अफवाह है। ग्रामीण इलाकों में स्थितियां ये है कि अब ग्रामीण खाना पकाने से पहले फोर्टिफाइड चावल को अलग कर फेंक रहे हैं। इधर अधिकारी और मैदानी कर्मचारियों ने भी जागरूकता के लिए कोई प्रभावी प्रयास नहीं किए। कई जगहों में ग्रामीण खराब और नकली बताते हुए फोर्टिफाइड चावल का विरोध भी कर रहे हैं। हाल ही में शहडोल, अनूपपुर और मंडला में ग्रामीणों ने वितरण में आपत्ति जताते हुए चावल लेने से मना कर दिया था। मंडला में ग्रामीण जनप्रतिनिधियों के साथ कलेक्टर की जनसुनवाई में भी फोर्टिफाइड चावल लेकर पहुंच गए थे। शहडोल के खौहाई गांव के सम्हारू सिंह गोड़ कहते हैं, पकाने के बाद प्लास्टिक की तरह चावल पिघलता है। बच्चों को भी यह चावल खिलाना बंद कर दिए हैं। आदिवासी गांव डिडवरिया में भी यही स्थिति है। बलराम बैगा बताते हैं, कोटा से प्लास्टिक वाला चावल दे रहे हैं। हम खेती करते हैं, हमसे ज्यादा अनाज को कौन परख सकता है। गोहपारू के देवरी और बुढ़ार के सरईकांपा में भी आदिवासी परिवार फोर्टिफाइड चावल वितरण को लेकर नाखुश नजर आए। कई बैगा और आदिवासी परिवार ऐसे भी मिले कि जिन्हे लंबे समय से राशन ही नहीं मिल रहा है। न ही राशन कार्ड में नाम जोड़ा गया है। 2013 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के साथ अब प्रदेश सरकार पेसा एक्ट मान रही है। ऐसी स्थिति में आदिवासियों के अधिकारों का भी हनन है। आदिवासियों का मालुम ही नहीं है कि चावल के साथ क्या खिलाया जा रहा है। अब तक किसी ने बताया भी नहीं। न ही ये बताया गया कि कितना फायदेमंद है। संवैधानिक मूल्यों के आधार पर गरिमा को देखते हुए सही नहीं किया जा रहा है। सरकार ने नीति बनाई और अब फोर्टिफाइल चावल सीधे बांट रहे हैं।
आदिवासियों के अधिकारों का भी हनन
ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से आदिवासी राशन के लिए जतन कर रहे हैं। आधा अधूरा राशन देकर अंगूठा लगवाया जा रहा है। राशन के लिए कई किमी दूर जाना पड़ रहा है। सुको ने 2001 में भोजन के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी थी। 2013 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के साथ अब प्रदेश सरकार पेसा एक्ट मान रही है। ऐसी स्थिति में आदिवासियों के अधिकारों का भी हनन है। आदिवासियों का मालुम ही नहीं है कि चावल के साथ क्या खिलाया जा रहा है। अब तक किसी ने बताया भी नहीं। न ही ये बताया गया कि कितना फायदेमंद है। विशेषज्ञों की मानें तो गरिमा को देखते हुए सही नहीं किया जा रहा है। सरकार ने नीति बनाई और अब फोर्टिफाइल चावल सीधे बांट रहे हैं। कई क्षेत्रों में अध्ययन भी नहीं किया गया कि वाकई में जरूरत है। हर आदिवासी को फोर्टिफाइल चावल दे रहे हैं। विधि से जुड़ी सुषमा कैथल कहती हैं, पेसा के तहत आदिवासियों का हक बनता है कि उन्हे मालुम होना चाहिए कि क्या खिलाया जा रहा है। जो दिया जा रहा है क्यों दिया जा रहा है। कोई बताने वाला होता तो यह स्थिति नहीं बनती कि आदिवासी उसे अलग कर फेंकते और उपयोग में न लेते।
अफवाह के बीच अब हेरफेर, आवंटन ही रोका
ग्रामीण अंचलों में नकली चावल की बढ़ती अफवाह के बीच प्रदेश के कई जिलों में दिल्ली से फोर्टिफाइड चावल का आवंटन ही रोक दिया है। पुराने स्टॉक को भी अधिकारी राशन दुकानों में नहीं भेज रहे हैं। राशन दुकानों में बिना फोर्टिफाइड राइस के ही चावल सप्लाई किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, पिछले तीन माह से फोर्टिफाइड चावल का आवंटन नहीं आया है। पुराना स्टॉक भी नहीं भेज रहे हैं।
मंडला: जनसुनवाई में पहुंचे ग्रामीण, बोले- धान का नहीं, प्लास्टिक का है चावल

हाल ही में मंडला जिले के धरमपुरी भीमपुरी गांव में ग्रामीणों ने विरोध किया है। ग्रामीणों ने जनसुनवाई में पहुंचकर बताया था कि गुणवत्ता हीन चावल भेज जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप था कि यह धान का चावल ना होकर ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे प्लास्टिक का हो। दांत से चबाने पर टूटने के स्थान पर दांत में चिपक रहा है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद जनपद सदस्य प्रेम लाल ने भी राशन दुकान पहुंचे। यहां पर ग्रामीणों की मौजूदगी में अधिकारियों ने पंचनामा बनाया और फोर्टिफाइड चावल बताया गया।
उमरिया: बीमार पड़े तो कोटा का चावल ही खाना छोड़ दिया
तीन माह पूर्व उमरिया के मानपुर रोहनिया में फोर्टिफाइड चावल खाने से बीमार होने की अफवाह के बीच ग्रामीणों ने राशन दुकान से मिलने वाले चावल को खाना ही छोड़ दिया था। ग्रामीणों का कहना था कि प्लास्टिक चावल खाने से आधा दर्जन से ज्यादा लोग गांव में बीमार हुए हैं। बाद में खाद्य विभाग ने समझाइश दी। पूर्व विधायक उमरिया व कांग्रेस प्रदेश महासचिव अजय सिंह ने जांच की मांग की थी।
65 रुपए किलो खरीद रही सरकार, हर साल करोड़ों का खर्च
राशन दुकानों में फोर्टिफाइड चावल सप्लाई करने सरकार भारी-भरकम राशि भी खर्च कर रही है। आदिवासी इलाकों के छोटे जिलों में सालाना लगभग 1 करोड़ से अधिक का खर्च आएगा। शहडोल में पिछले 5 माह में 45 लाख रुपए से ज्यादा फोर्टिफाइड चावल की मिलिंग पर खर्च किया है। चावल को पीसकर आटे में आयरन फोलिक एसिड तथा विटामिन बी12 मिलाकर उसे दोबारा चावल का आकार दिया जाता है और सामान्य चावल में इसे 1 प्रतिशत मिलाया जाता है। पानी में धोते समय फोर्टीफाइड चावल के दाने तैरते हैं। शुरुआत में मध्यप्रदेश के दो जिलों में फोर्टिफाइड चावल बनाने के प्लांट शुरू किए गए थे। सरकार 65 रुपये प्रति किलो फोर्टिफाइड चावल खरीद रही है। मिलर को फोर्टिफाइड चावल मिलाने के लिए अलग से प्लांट में ब्लेंडिंग मशीन लगानी पड़ रही है। जिससे अब लागत भी बढ़ गई है।
एक्सपर्ट व्यू: ज्यादा आयरन से बीमारियों का खतरा, मोटे अनाज को दें बढ़ावा
आदिवासी क्षेत्रों में काम कर रहे समाजसेवी नरेश विश्वास कहते हैं, सरकार सिर्फ उद्योगपतियों को बढ़ावा देने के लिए फोर्टिफाइड चावल की योजना शुरू की है। चावल में जिंक और आयरन का फोर्टिफिकेशन कर रहे हैं। जिन क्षेत्रों में ऐसे केस मिल रहे थे, वहां फोर्टिफाइड चावल देना था लेकिन अब सरकार सभी पीडीएस में सप्लाई कर रही है। स्वस्थ शरीर में 2 मिलीग्राम आयरन की जरूरत होती है। शरीर में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स लेते हैं, 24 घंटे में एनर्जी में बदल देते हैं। अब ज्यादा आयरन शरीर में जाएगा तो कई बीमारियां भी हो सकती है। हर किसी को आयरन जिंक की जरूरत नहीं होती है। यदि शरीर में पहले से आयरन अन्य खाद्य पदार्थाे से मिल रहे हैं तो अतिरिक्त की जरूरत नहीं है। सरकार को फोर्टिफाइड चावल के स्थान पर मोटा अनाज देना चाहिए। फोर्टिफिकेशन काफी महंगा है, ग्रामीण खाते भी नहीं हैं फेंक देते हैं। मोटे अनाज पर ग्रामीणों को विश्वास है, ताकतवर भी मानते हैं।
ओडिशा में पीडीएस में मोटा अनाज, खेती की विविधता भी बदली
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार जहां फोर्टिफाइड चावल बांट रही है, वहीं ओडिशा सरकार राशन दुकानों में मोटा अनाज सप्लाई कर रही है। इससे वहां के आदिवासियों में विश्वास भी बढ़ा है। साथ ही खेती की विविधता भी बढ़ी है। लोग मोटे अनाज की खेती भी कर रहे हैं, क्योकि सरकार खरीद रही है।
सुको ने कहा: भूख से मुक्त होने का अधिकार मौलिक अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने 2001 में भोजन के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी थी। 2005 में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मनरेगा योजना आई और 2013 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून बना। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने व्याख्या में कहा कि भोजन का अधिकार भारतीयों का मौलिक अधिकार है। साथ ही 2003 में इसे और स्पष्ट करते हुए कहा कि 'भूख से मुक्त होने का अधिकार मौलिक अधिकार है।

आदिवासी युवा और समाज प्रमुख बोले- आदिवासियों के अधिकारों का हनन, राशन तक नहीं मिल रहा
आदिवासियों का मालुम ही नहीं है कि चावल के साथ क्या खिलाया जा रहा है। अब तक किसी ने बताया भी नहीं। न ही ये बताया गया कि कितना फायदेमंद है। आदिवासी युवाओं का कहना था कि सरकार मोटा अनाज राशन दुकानों में बांटे, जिसपर सबका विश्वास है। इससे खेती में भी विविधिता आएगी। ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से आदिवासी राशन के लिए जतन कर रहे हैं। आधा अधूरा राशन देकर अंगूठा लगवाया जा रहा है। राशन के लिए कई किमी दूर जाना पड़ रहा है। सुको ने 2001 में भोजन के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी थी। 2013 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के साथ अब प्रदेश सरकार पेसा एक्ट मान रही है। ऐसी स्थिति में आदिवासियों के अधिकारों का भी हनन है। विशेषज्ञों की मानें तो गरिमा को देखते हुए सही नहीं है। सरकार ने नीति बनाई और अब फोर्टिफाइल चावल सीधे बांट रहे हैं। कई क्षेत्रों में अध्ययन भी नहीं किया गया कि वाकई में जरूरत है। हर आदिवासी को फोर्टिफाइल चावल दे रहे हैं। विधि से जुड़े विशेषज्ञ कहते हैं, उन्हे मालुम होना चाहिए कि क्या खिलाया जा रहा है। जो दिया जा रहा है क्यों दिया जा रहा है। कोई बताने वाला होता तो यह स्थिति नहीं बनती कि आदिवासी उसे अलग कर फेंकते और उपयोग में न लेते।
सरकार को फोर्टिफाइड चावल के स्थान पर मोटा अनाज देना चाहिए। फोर्टिफिकेशन काफी महंगा है, ग्रामीण खाते भी नहीं हैं फेंक देते हैं। मोटे अनाज पर ग्रामीणों को विश्वास है, ताकतवर भी मानते हैं। आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों का भी हनन है, कि उन्हे पता नहीं कि क्या खिलाया जा रहा है। साथ ही कई आदिवासी परिवारों को राशन भी नहीं मिल रहा है। अधिकारियों को आगे आना होगा।
नत्थूलाल बैगा, पूर्व सरपंच व अध्यक्ष बैगा समाज
बिना जानकारी आदिवासियों को फोर्टिफाइड चावल बांटना गलत है। आदिवासियों को जानकारी देना चाहिए ताकि वह उसको समझ सकें और उसका सदुपयोग कर सकें। जानकारी के अभाव में आदिवासी फोर्टिफाइड चावल को प्लास्टिक का चावल समझकर छांटकर बाहर फेंक देते हैं। आदिवासियों के अधिकारों का भी हनन है। भ्रम दूर करने के लिए सरकार मुहिम चलाएं और मोटे अनाज को बढ़ावा दे।
नीरज बैगा, समाज प्रमुख
कुपोषण को दूर करने के लिए ग्रामीण इलाकों से कोदो कुटकी की खेती को बढ़ावा देकर राशन दुकानों में वितरित कराना चाहिए। फोर्टीफाइड चावल के स्थान पर मोटे अनाज को बढ़ावा दिया जाए। जिससे कुपोषण एवं एनीमिया से लड़ा जा सके। अभी तो कई आदिवासियों को अनाज तक नहीं मिल रहा है। ये उनके मौलिक अधिकारों का भी हनन है। अधिकारियों को प्रयास करना चाहिए।
संजीव बैगा, समाज प्रमुख
माह फोर्टिफाइल चावल प्राप्त डिंडौरी सप्लाई मिलिंग लागत
जून 2313.34 00 150367.10
जुलाई 52764.97 00 3429723.05
अगस्त 8701.92 00 565624.80
सितंबर 5776.83 00 375493.95
अक्टूबर 60.20 00 3913
नवंबर ----- 3703.43 00
कुल 67617.26 3703.43 4525121.90
(ये आंकड़े शहडोल जिले में फोर्टिफाइल चावल वितरण के हैं। मात्रा क्विंटल में)

सम्बधित खबरे

सबसे लोकप्रिय

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

Weather Update: राजस्थान में बारिश को लेकर मौसम विभाग का आया लेटेस्ट अपडेट, पढ़ें खबरTata Blackbird मचाएगी बाजार में धूम! एडवांस फीचर्स के चलते Creta को मिलेगी बड़ी टक्करजयपुर के करीब गांव में सात दिन से सो भी नहीं पा रहे ग्रामीण, रात भर जागकर दे रहे पहरासातवीं के छात्रों ने चिट्ठी में लिखा अपना दुःख, प्रिंसिपल से कहा लड़कियां class में करती हैं ऐसी हरकतेंनए रंग में पेश हुई Maruti की ये 28Km माइलेज़ देने वाली SUV, अगले महीने भारत में होगी लॉन्चGanesh Chaturthi 2022: गणेश चतुर्थी पर गणपति जी की मूर्ति स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त यहां देखेंJaipur में सनकी आशिक ने कर दी बड़ी वारदात, लड़की थाने पहुंची और सुनाई हैरान करने वाली कहानीOptical Illusion: उल्लुओं के बीच में छुपी है एक बिल्ली, आपकी नजर है तेज तो 20 सेकंड में ढूंढकर दिखाये

बड़ी खबरें

मालामाल होगा महाराष्ट्र! चंद्रपुर और सिंधुदुर्ग में मिली सोने की खानसांसद बदरुद्दीन अजमल ने हिंदुओं पर दिया विवादित बयान, कहा- 40 साल तक रखते हैं 2-3 गैरकानूनी बीवियां'मामा किसी को नहीं छोड़ेगा', सीएम शिवराज सिंह ने मंच से 4 अफसरों को किया सस्पेंड, देखें वीडियोBJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति में कैप्टन अमरिंदर और सुनील जाखड़ की एंट्री, जयवीर शेरगिल बने प्रवक्तादिल्ली एमसीडी चुनाव पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, रिट खारिजMCD चुनाव प्रचार के आखिरी दिन केजरीवाल का मास्टरस्ट्रोक, चंदा मांगकर योग शिक्षकों को दिया वेतनसमुद्री सीमाओं को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभा रहे शिपयार्ड : राजनाथ सिंहमहाराष्ट्र में सिंगल यूज प्लास्टिक से सख्त बैन हटा, इन चीजों के उपयोग की अनुमति मिली
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.