कृषि कानूनों के विरोध में कांग्रेस ने निकाली विशाल किसान रैली

ट्रैक्टरों में भरकर कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान

By: amaresh singh

Published: 09 Jan 2021, 08:47 PM IST

शहडोल। कृषि कानूनों के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी ने शनिवार को विशाल किसान रैली निकाली। किसान रैली जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय से शुरू हुआ। ट्रैक्टरों में भरे हुए किसान रैली के दौरान कृषि कानून वापस लेने, मोदी सरकार मुर्दाबाद सहित अन्य नारे जमकर लगाते रहे। रैली बुढ़ार चौक से होते हुए गांधी चौक, जयस्तंभ चौक पहुंची यहां कलेक्ट्रेट गेट पर कांग्रेस पदाधिकारियों के साथ किसानों ने मोदी सरकार के खिलाफ में जमकर नारेबाजी की। इसके बाद कांग्रेस पदाधिकारियों के साथ किसान कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठ गए। इस दौरान भी कृषि कानूनों को वापस लेने केन्द्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी होती रही।
किसानों के हित में नहीं है कानून
इसके बाद कांग्रेस पदाधिकारियों ने किसानों के साथ एसडीएम धर्मेद्र मिश्रा को राष्ट्रपति के नाम कृषि कानून वापस लेने ज्ञापन सौंपा। दिए ज्ञापन में मांग करते हुए बताया गया कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां का संविधान जनता का जनता के लिए जनता द्वारा निर्मित है। प्रत्येक निर्वाचित सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है। आश्चर्य है कि इस देश में पिछले 50 दिनों से काफी संख्या में किसान सड़कों पर बैठा है। उसकी एक ही मांग है कि केन्द्र ने जल्दबाजी में कृषि से संबंधित जो तीन नए कानून बनाए हैं। उन्हें तत्काल वापस लें। इसके पीछे किसानों का तर्क है कि कानून बनाने के पूर्व सरकार जल्दबाजी की है। संबंधित पक्ष से विचार-विर्मश नहीं किया। जल्दबाजी में पाए किए गए इन कानूनों में किसानों का हित नहीं बल्कि पूंजीपतियों का हित है। इन बातों को लेकर ठंड में भी अन्नदाता बच्चों के साथ सड़कों पर बैठा है। केन्द्र सरकार असफल वार्ता करके वक्ता बिता रही है। उसे इस बात का भी ख्याल नहीं है कि आंदोलन के चलते 50 से ज्यादा किसानों की जान जा चुकी है। फिर भी किसान मौसम का और सरकार की हठधर्मिता का सामना कर रहा है।
किसानों को संरक्षण दे सरकार
किसानों की मांग है कि सरकार किसानों को संरक्षण दे, मिनिमम सपोर्ट प्राइस को कानूनी दर्जा दे और कृषि को एक स्वतंत्र इकाई के रूप में यथावत बरकरार रखें। साथ ही उत्पादन बढ़ाने में किसानों की पूरी मदद करें। सरकार ने किसानों के ऊपर प्रदूषण बिगाडऩे का आरोप लगाते हुए पराली जलाने के नाम पर भारी भरकम दंड राशि का विधान किया है और बिजली बिल थोपे गए थे। इन्हीं दो बातों को स्वीकार कर केंद्र सरकार ढिंढोरा पीटने लगी कि हमने किसानों की चार में से दो मांगों को स्वीकार कर लिया है और किसानों से आंदोलन समाप्त करने की अपील करने लगी। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार कितनी भ्रम की स्थितियां पैदा कर रही है। आंदोलनकारियों का खालिस्तानी से रिश्ता जोडऩे, देश विरोधी आरोप लगाकर किसानों का बदनाम करने का साजिश रचा जा रहा है। देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि का व्यवसाय है। इसी कृषि व्यवसाय ने विश्वव्यापी गंभीर आर्थिक संकटों में भारत के लोगों को राहत दी है। देश आज इतना मजबूती से खड़ा है उसके पीछे इसी अन्नदाता का पसीना है। अगर अन्नदाता सरकार से मांग कर रहा है कि यह तीनों कालू कानून उसके हित में नहीं हैं तो ऐसी स्थिति में सरकार जो जनता के द्वारा चुनी गई है। वह फिर कानून वापस क्यों नहीं ले रही है। आप देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर हैं इसलिए इस जन विरोधी सरकार पर दबाव डालते हुए तीनों काले कानूनों को वापस करवाएं। विशाल रैली में कांग्रेस कमेटी के जिला अध्यक्ष आजाद बहादुर सिंह, युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष अनुपम गौतम, जिला अध्यक्ष सेवा दल नौसेरमा खान,जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष शिम्पी अग्रवाल, जिला युवा कांग्रेस महासचिव सुफियान खान, जिला कांग्रेस कमेटी महासचिव पंकज सिंह, जिला अध्यक्ष शिक्षक प्रकोष्ठ रामनरेश तिवारी, जिला अध्यक्ष समाजसेवी प्रकोष्ठ रामलखन तिवारी, प्रवक्ता दिनेश अग्रवाल, हुसैन अली, नारेन्द्र सिंह मरावी सहित आदि शामिल रहे।

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