बुजुर्ग पिता लगाता रहा गुहार-साहब फंदे से उतार दो बेटे की लाश

बुजुर्ग पिता लगाता रहा गुहार-साहब फंदे से उतार दो बेटे की लाश

Shubham Singh | Publish: Apr, 17 2019 11:36:07 AM (IST) | Updated: Apr, 17 2019 11:36:08 AM (IST) Shahdol, Shahdol, Madhya Pradesh, India

असंवेदनशीलता: रातभर थाने के लगाते रहे चक्कर, घटनास्थल पर नहीं पहुंची पुलिस

शहडोल. घर से चंद दूरी पर जवान बेटे की लाश फंदे पर लटकी हुई थी। घर में मातम का माहौल था। मासूम बच्चा, पत्नी और बुजुर्ग पिता बेटे की एक झलक देखने तड़प रहा था। आंखों से बहती आंसुओं की धार के साथ बुजुर्ग पिता रातभर पुलिस और ग्रामीणों से गुहार लगाता रहा कि साहब बेटे की लाश को फंदे से उतार दो लेकिन पुलिस नहीं पहुंची। आंखों के सामने ही रातभर बेटा फांसी के फंदे पर लटकता रहा। जब पुलिस नहीं सुनी तो गांव के अन्य लोगों को जानकारी दी। रात में ही ग्रामीण और ग्राम सचिव थाना पहुंचकर घटना के बारे में बताया लेकिन थाना की पुलिस ने सुबह आने की बात कहकर वापस लौटा दिया। वाक्या सिंहपुर थाना क्षेत्र के पड़मनिया खुर्द गांव का है। जानकारी के अनुसार, दीपनारायण गुप्ता पिता बद्री प्रसाद निवासी पड़मनिया खुर्द ने सोमवार की शाम लगभग साढ़े छह बजे फांसी लगा ली थी। युवक ने घर के नजदीक हवाई पट्टी के पास फांसी लगाकर आत्महत्या किया था। 8 बजे ग्रामीणों ने देखकर घटना की जानकारी परिजनों को दी। सूचना मिलते ही परिजन घटनास्थल पर पहुंच गए और पुलिस को सूचना दी लेकिन पुलिस नहीं पहुंची। परिजन शव उतारने के लिए काफी समय तक पुलिस का इंतजार करते रहे लेकिन नहीं पहुंची तो रात में ही अन्य ग्रामीण और सचिव को जानकारी दी। ग्रामीण भी रातभर थाने का चक्कर काटते रहे लेकिन पुलिस नहीं आई। अगली सुबह मंगलवार को लगभग साढ़े छह बजे पुलिस की मौजूदगी में शव को फंदे से उतारा गया।
डेढ़ किमी दूर थाना, रात में पहुंच गई थी सूचना
घटनास्थल थाना सिंहपुर से चंद दूरी पर ही था। रात में सचिव और ग्रामीण थाना पहुंच गए थे। फांसी लगाकर खुदकुशी की सूचना भी दी लेकिन पुलिस अधिकारियों ने सुबह आने की बात कही। इसके बाद परिजनों ने डॉयल १०० को सूचना दी। इसके बाद भी घटनास्थल पर कोई पुलिस नहीं पहुंची। कई ग्रामीण और परिजन रातभर लाश के नजदीक ही रोशन देकर बैठे रहे और लाश की रखवाली करते रहे। मामले में पुलिस की लापरवाही उजागर हुई है। मामले को लेकर ग्रामीणों में काफी आक्रोश भी पुलिस के लिए बना रहा।
परिजन रातभर लाश की करते रहे रखवाली

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परिजन पूरी रात पुलिस के पहुंचने का इंतजार करते रहे लेकिन नहीं पहुंची। रातभर परिजन और बुजुर्ग पिता शव के पास रोशनी देकर बेटे की लाश की रखवाली करते रहे। सुबह साढ़े ६ बजे पहुंची पुलिस ने फंदे से उतारकर शव को पीएम के लिए भेजा। दूसरे दिन ९ बजे शव परिजनों के सुपुर्द किया। परिजनों का कहना था कि शाम को ७ बजे ही फांसी का पता चल गया था। पुलिस को इस स्थिति में शव पहले ही उतार देना था।
पापा रोज बैठते थे, बोले थे घर जाओ, मेला चलेंगे
परिजनों के अनुसार, युवक दीपनारायण गुप्ता कुछ दिनों से परेशान था। अक्सर घर के नजदीक एक सुनसान जगह मे जाकर बैठ जाता था। परिजन भी जगह पहचानने लगे थे। घटना के दिन भी दोपहर में घर से युवक चला गया था। १४ वर्षीय बेटे के अनुसार, पापा रोज वहीं बैठते थे। घटना के दिन भी शाम को बुलाने गया था। पापा बोले थे अभी घर जाओ, बाद में मेला चलेंगे लेकिन फिर घर वापस नहीं लौटे।
एक्सपर्ट व्यू : साक्ष्य का डर है तो और पहले पहुंचना था
अधिवक्ता संदीप तिवारी के अनुसार, घटना की सूचना मिलते ही पुलिस को मौके पर पहुंचना चाहिए था। परिजन मौजूद थे तो फिर शव उतारने में देरी करनी ही नहीं चाहिए। पुलिस की यह बड़ी लापरवाही है। साक्ष्य खत्म होने का डर था तो पुलिस को तो और जल्दी मौके पर पहुंचकर शव को पेड़ से उतारना चाहिए था।
साक्ष्य खत्म होते, इसलिए नहीं उतारा
मर्ग में हम छेड़छाड़ नहीं कर सकते हैं। रात में लाश नहीं उतार सकते थे। कई नियम हैं, साक्ष्य खत्म हो जाते।
नरेन्द्र सिंह राजपूत, टीआई सिंहपुर।
बात करता हूं, क्यों बरती गई लापरवाही
रात में शव उतारने के निर्देश दिए थे। अधिकारियों से बात करता हूं, मामले में लापरवाही क्यों बरती गई है।
कुमार सौरभ, एसपी शहडोल
अधिकारियों से लेते हैं जानकारी
इस संबंध में अधिकारियों से बात करता हूं। लाश को रात में उतार लेना चाहिए था। लापरवाही पर कार्रवाई होगी।
एसपी सिंह, आईजी शहडोल

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