विशेषज्ञों ने बताया संस्कृत के साहित्यों में है सभी ज्ञान

पं. एस एन शुक्ला विवि में मानक संस्कृत क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन

By: shubham singh

Published: 24 May 2018, 09:27 PM IST

शहडोल। जिसके पास संस्कृत नहीं है वह ज्ञान की श्रेष्ठ व आदर्श अवस्था को प्राप्त नहीं कर सकता है। धरती में जब तक मानव सभ्यता है तब तक संस्कृत जीवंत रहेगी। संस्कृत वैज्ञानिक व सरल भाषा है। संस्कृत के साहित्य में ही सम्पूर्ण ज्ञान निहित है। वर्तमान में संस्कृत के साथ जो अन्याय हो रहा है वह देश व यहां के युवाओं के हित में नही हैं। संस्कृत बेहद ही सरल व सहज भाषा है जिसे यह कठिन लगती है उसने निश्चय ही इसे पढऩे व समझने का प्रयास नहीं किया। उक्त आशय के उद्गार प्रो. रहस बिहारी द्विवेदी पूर्व प्राध्यापक एवं अध्यक्ष संस्कृत विभाग रानी दुर्गावती विवि जबलपुर ने पं. एस एन शुक्ला विवि में आयोजित मानक संस्कृत विषय पर क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुऐ व्यक्त किए। कार्यशाला का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम की अगली कड़ी में मंचासीन अतिथियों का पुष्प गुच्छ से स्वागत किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से डा. मुकेश तिवारी कुलपति पं. एस एन शुक्ला विवि, प्रो. विनय सिंह कुल सचिव, प्रो. करुणेश झा, डा. आर पी झारिया, डा. माण्डवी शरण त्रिपाठी, डा. बृजेन्द्र कुमार पाण्डेय, डा. शिव कुमार दुबे, डा. नीलेश शुक्ला प्राचार्य हितकारणी महाविद्यालय जबलपुर, डा. मनीषा तिवारी, प्रो. प्रमोद पाण्डेय के साथ विवि के अन्य प्राध्यापक व छात्र गण मौजूद रहे। कार्यशाला के विषय प्रवर्तक डा. शिव कुमार दुबे ने कहा कि संस्कृत के साहित्य का अनुवाद सभी भाषाओं में है। दुनिया के ज्ञान, विज्ञान, धर्म, सदाचार, दर्शन, न्याय शास्त्र, कृषि शास्त्र को जानना है तो संस्कृत के साहित्य को पढऩा होगा। क्योंकि यह सब कुछ सिर्फ और सिर्फ संस्कृत साहित्य में ही मिल सकता है। इस अवसर पर अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान सभी ने संस्कृ़त विषय की महत्ता पर प्रकाश डाला। सभी ने बताया कि संस्कृत देवभाषा है जिसका अपना अलग ही महत्व है।

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