इस खास तरह की खेती से फेमस हो गया किसान

बढ़ गई आमदनी, बढ़ गई उपज

By: Shahdol online

Published: 15 Jan 2018, 06:17 PM IST

मंडला- स्पेशल तरीके से खेती के दम पर इस किसान ने अपनी एक अलग ही पहचान बना ली है। और ऐसा उसके कड़ी मेहनत और एक अलग ही तरीके से खेती करने के दम पर हो सका है। पहले खेती तो होती थी। लेकिन उत्पादन ना के बराबर था, आलम ये था कि कई बार लागत भी नहीं निकल पाती थी। लेकिन जब इस किसान ने अपनी खेती करने के तरीके को बदला तो सबकुछ बदल गया।

ऐसे हुई आय दोगुनी
खेती करने के तरीके में जैसे ही बदलाव किया गया किसान की आय दो गुनी हो गई है। शासन की योजना व स्वयं की मेहनत से किसान दूसरे किसानों के लिए मिशाल बन रहा है। नैनपुर विकासखंड ग्राम पाला सुंदर निवासी कृषक मुकेश झारिया जिनके पिता का नाम महेश झारिया है, पहले पारंपरिक तरीके से धान, गेहूं एवं सब्जी में टमाटर की खेती करते थे। जिससे धान एवं गेहूं में 7-8 क्विंटल ही उपज प्राप्त हो जाती थी। जो सिर्फ मुकेश झारिया के परिवार के खाने के लिए ही हो पाता था। उन्हें अपनी उपज से कोई भी आमदनी नहीं हो पा रही थी। आलम ये था कि परिवारिक भरण पोषण के लिए उन्हें कृषि कार्य को छोड़कर मजदूरी तक करनी पड़ती थी।
ऐसा नहीं था कि मुकेश पढ़ा लिखा नहीं था, मुकेश शिक्षित भी था फिर भी खेती के साथ-साथ अपने गांव से बाहर जाना पड़ता था। कुछ समय बाद मुकेश कृषि विभाग एवं आत्मा विभाग से समय-समय पर प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम में हिस्सा लेने लगा। इन कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद मुकेश को समझ आने लगा कि कम लागत पर अधिक से अधिक उपज हासिल किया जा सकता है।

Farmers who grew up with this kind of farming

मुकेश ने एटीएम नैनपुर राय सिंह सोलंकी के तकनीकी मार्गदर्शन से उन्नत खेती शुरू करना प्रारंभ किया। जिसमें पहले रबी मौसम में सरसों की श्रीविधि से खेती करना प्रारंभ किया। ये मुकेश का पहला अनुभव रहा। जिसके द्वारा उन्होंने सरसों की श्रीविधि से एक एकड़ में 8 क्विंटल उपज हासिल किया। जिसका उत्पादन पहले की अपेक्षा ढाई गुना ज्यादा प्राप्त हुआ।

इसके बाद मुकेश के द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन से खेती करना प्रारंभ किया। इसके परिणामस्वरूप धान, गेहूं, सरसों एव अन्य मौसमी फसलें, सब्जी की खेती मुकेश द्वारा की गई। उन्हें आत्मा परियोजना के कृषि विभाग से फसल उत्पादन तकनीक अपनाने से फसल उत्पादन में बढोत्तरी हुई, जिससे अधिक मात्रा में उपज प्राप्त होने लगी। जिनका उन्हें बाजार मूल्य भी प्राप्त होने लगा एवं परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ। मुकेश झारिया की सफलता को देखते हुए ग्राम के अन्य कृषक भी अब इसी तकनीक से खेती करने में इंट्रेस्ट ले रहे हैं।

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