समय पूरा होने पर भी नहीं बदले पांचों बीआरसी

जांच में प्रतिनियुक्ति के मामलो में पाई गई गड़बड़ी...

By: Shahdol online

Published: 04 Jan 2018, 09:04 AM IST

शहडोल. जिला पंचायत अध्यक्ष के धरना प्रदर्शन व मौके में ही विलाप करने के बाद पसीजे प्रशासन ने जो आश्वासन का झुनझुना धरना स्थल पर पकड़ाया था। उसके परिणाम लगभग तीन माह बाद जिला पंचायत अध्यक्ष के हाथ में आ गये हैं। जिसमें भी जांच के नाम पर महज औपचारिकता के सिवा कुछ भी नही है। तीन बिदुंओ पर जांच के नाम पर बैठक व आश्वासन का सिलसिला ही चल रहा है। डीपीसी द्वारा की गई प्रतिनियुक्तियों के मामले में भी डीपीसी को क्लीन चिट दे दी गई है। हालांकि जांच टीम ने यह माना है कि जिले के पांचो बीआरसी ४ वर्ष की समयावधि पूरी होने के बाद भी डंटे हुये हैं। जिनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त करके मूल विभाग में भेजना उचित होगा। साथ ही बीआरसी व बीएसी की प्रतिनियुक्ति के मामले में भी कार्यादेश निरस्त करने व मूल पद में भेजने का प्रस्तावित किया गया है।
नियमों के विपरीत पदस्थापना
वरिष्ठ अध्यापक श्याम नारायण पाठक, श्रद्धानंद दुबे व मनीषा मिश्रा की प्रतिनियुक्तिमामले की जांच सहायक आयुक्तआदिवासी विकास विभाग द्वारा की गई। जिसमें तीनो प्रतिनियुक्तियों को नियम विरुद्ध माना गया है। तीनो मामलो में सहायक आयुक्त द्वारा अलग-अलग तर्क देते हुये प्रतिनियुक्तियों को नियम विरुद्ध बताते हुये अनुशासानात्मक कार्रवाई करने के लिये प्रस्तावित किया है।
यह मामले अभी भी लटके
जिला पंचायत अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह मरावी द्वारा 4 बिंदुओ पर जांच की मांग की गई थी। जिसमें डीपीसी द्वारा की गई प्रतिनियुक्ति, एसईसीएल कोल माईन्स अंतर्गत ३७२ लोगो को मुआवजा वितरण, जिले में बढ़ रहे शराब के अवैध कारोबार व सचिवों की प्रतिनियुक्ति के मामले में जांच कराने जाने की मांग की गई थी। जिसमें से डीपीसी द्वारा की गई प्रतिनियुक्ति के मामले में जांच रिपोर्ट जिला पंचायत अध्यक्ष को मिली है। शेष मामले अभी भी अधर में लटके हुये हैं और उनमें आश्वासन ही मिला है।
कार्रवाई का आश्वासन
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष नेरन्द्र मरावी पत्रकारों से रू-ब-रू हुये। इस दौरान उन्होने बताया कि प्रतिनियुक्ति के मामले में कलेक्टर नरेश पाल द्वारा आश्वासन दिया गया है कि जिन मामलो में कार्रवाई करना उनके अधिकार क्षेत्र में है उनमें वह एक सप्ताह के अंदर कार्रवाई करेंगे। जांच प्रतिवेदन उनके द्वारा राज्य शासन को भेज दिया गया है।
नोट सीट व दस्तावेज उपलब्ध नहीं
जांच रिपोर्ट में कई बिन्दु ऐसे भी रहे जिसमें डीपीसी द्वारा जांच संबंधी दस्तावेज व नोटशीट जांच कर्ताओं को उपलब्ध नहीं कराये। जिसमें प्रमुख रूप से महेन्द्र त्रिपाठी और सुरेन्द्र सिंह को बालिका विद्यालय व छात्रावास में लेखापाल का प्रभार दिए जाने के आदेशों की नोटशीट उपलब्ध नहीं कराई गई। जिसके चलते यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि किस आधार पर आदेश जारी किया गया है।

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