शहर के चारों ओर विराजे हैं गणेश, विघ्नहर्ता की हर प्रतिमा है कुछ खास

कलेक्ट्रेट में नृत्य गणेश, बाणगंगा में दामवर्ती और दक्षिण मुखी विघ्नहर्ता, सोहागपुर, बुढ़ार चौराहा व आईटीआई के पास भी स्थापित है प्राचीन गणेश प्रतिमा

शहडोल. शुभ कार्य के शुभारंभ में सर्वप्रथम विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का स्मरण किया जाता है। नगर के चारो दिशाओं में भगवान श्री गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की गई थी। यह प्रतिमाएं आज भी विद्यमान हैं और लोगों की इनसे विशेष आस्था है। चारो दिशाओं में अलग-अलग मुद्रा में स्थापित इन प्रतिमाओं को लेकर लोगों की अलग-अलग अवधारणाएं हैं। पुरातत्व वेत्ताओं की माने तो यह प्रतिमाएं 9-10 वीं शदी की है।
यहां स्थापित हैं दामवर्ती विघ्नहर्ता
नगर के बाणगंगा मुख्यमार्ग में भगवान श्री गणेश का विशाल मंदिर है। यहां स्थापित भगवान श्री गोश की प्रतिमा को अत्यंत ही शुभकारी माना गया है। बताया जा रहा है कि यह प्रतिमा दामवर्ती होने के साथ ही दखिणमुखी है।
यहां भी स्थापित है प्रतिमाएं
उक्त स्थानों के अलावा सोहागपुर व आईटीआई के समीप भी भगवान श्री गणेश की अति प्राचीन प्रतिमा है। साथ ही जिला मुख्यालय से लगे ग्राम सिंहपुर में भगवान श्री गणेश की प्रतिमा है। जिसे कल्चुरी काल के समय का बताया जा रहा है। यह विशाल प्रतिमा कुछ वर्ष पूर्व मंदिर परिसर से चोरी भी हो गई थी। लेकिन कुछ समय बाद ही यह पुन: मिल गई और उसे लाकर वापस यहीं पर स्थापित कर दिया गया।
सबकी मुरादें करते हैं पूरी
बुढ़ार चौक स्थित भगवान श्री गणेश का अति प्राचीन मंदिर स्थापित है। यहां जो कोई भी सच्चे मन से मुरादे मांगता है भगवान श्री गणेश उसकी मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं। बताया जा रहा है कि यह प्रतिमा भी प्राचीन काल से यहां पर स्थापित है। पहले यह प्रतिमा पीपल के पेढ़ के नीचे स्थापित थी जिसके बाद यहां मंदिर का निर्माण कराया गया।
अद्भुत है अष्टभुजी नृत्य गणेश
कलेक्ट्रेट परिसर में अष्टभुजी भगवान गणेश की नृत्य मुद्रा में प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा अपने आप में अद्भुत है जिसमें भगवान श्री गणेश ऊपर के दोनो हांथो में नाग देवता को पकड़े हुए नृत्य की मुद्रा में देखे जा सकते हैं। वामवर्ती होने की वजह से इन्हे और भी शुभ माना गया है। पूर्व में यह प्रतिमा कलेक्ट्रेट परिसर में ही कंजी के वृक्ष के नीचे स्थापित थी।

आज विराजेंगे विघ्नहर्ता, जगह-जगह सजे पण्डाल
शहडोल। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक गणेश उत्सव मनाया जाएगा। जिसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। भगवान सिद्धि विनायक की प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी जोरो पर है। जगह-जगह पण्डाल सज गए हैं और गणेश प्रतिमाएं भी ले जाई जा रही है। ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्यान्ह काल में हुआ था इसीलिए मध्यान्ह के समय को गणेश पूजा के लिए ज्यादा उपयुक्त माना जाता है। मध्यान्ह मुहूर्त में भक्त पूरे विधि विधान से गणेश पूजा करते हैं जिसे शोड़शोपचार गणपति पूजा के नाम से जाना जाता है। गणेशोत्सव को लेकर लोगों में अच्छा खासा उत्साह देखने मिल रहा है। सार्वजनिक स्थानों एवं घरों में गणेशजी की प्रतिमाओं की स्थापना व आराधना होगी।
प्रतिमा स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त
सर्वश्रेष्ठ अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 11.50 से 12.40 बजे तक
शुभ- प्रात: 6.00 से 7.30 बजे तक
लाभ- 12.00 से 1.30 बजे तक
अमृत- 1.30 से 3.00 बजे तक
शुभ- दोपहर 4.30 से सायं 6.00 बजे तक
सायंकालीन मुहूर्त
अमृत- सायं 6.00 से 7.30 बजे तक
चल- सायं 7.30 से 9.00 बजे तक

shivmangal singh
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