कच्चे रंग और सोन नदी की मिट्टी से बनाई जा रही गणेश प्रतिमाएं

जल संरक्षण और जलीय जीवों को बचाने ४२ वर्षों से मिट्टी की बना रहे मूर्ति

By: Rajkumar yadav

Published: 22 Aug 2017, 11:06 AM IST

अनूपपुर. आगामी २५ अगस्त से जिलेभर में गणेश चतुर्थी के अवसर पर गणेश उत्सव का शुभारम्भ किया जाएगा। इस दौरान घरों से लेकर पूजा समितियों द्वारा गणपति के विभिन्न स्वरूपों में प्रतिमाओं को स्थापित कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना होगी। जिसके लिए मूर्तिकारों द्वारा श्रीगणपति की प्रतिमाओं को अंतिम स्वरूपों में निखारने का कार्य किया जा रहा है। जबकि वर्तमान में जल संकट तथा जलीय संरक्षण के प्रति मूर्तिकारों द्वारा एनजीटी के दिशा निर्देश में माटी के गणेश बनाने का कार्य कर रहे हैं, ताकि नदियों सहित प्रकृति में पाए जाने वाले अन्य वातावरणीय जीवधारियों को प्रतिमाओं से होने वाले विभिन्न नुकसानों से बचाया जा सके। इसके लिए खुद मूर्तिकारों द्वारा अब माटी के मूर्तियों को अधिक स्थापित करने की कवायद में लोगों से अपील भी कर रहे हैं। जबकि मीडिया और वर्तमान मौसम की मार में जूझ रहे वैश्विक पारिस्थितियों में पूजा समितियों व घरों में प्रतिमाओं के आराधना करने वाले भक्तजन भी माटी की प्रतिमाओं को बनाने अपने ऑर्डर बुक कर रहे हैं। वहीं मूर्तिकार प्रतिमाओं को बनाने में पुरानी परम्पराओं के अनुरूप सोन नदी के माटी और सेरवार(जूट) के साथ साथ धान की भूसी तथा गोबर का मिश्रण कर प्रतिमाओं को मजबूत और प्राकृतिक रंगों के साथ सुंदर प्रतिमा बना रहे हैं। अनूपपुर के प्रसिद्ध मूर्तिकार हरिओम मूर्तिकार जो पिछले ४२ वर्षों से गणेश व आदिशक्ति दुर्गा की प्रतिमाओं का निर्माण करते आ रहे हैं, का कहना है कि पिछले दो-तीन सालों में लोगों का ध्यान पुन: माटी के मूरत पर आई है। भले ही पीओपी और कॉस्टमेटिक कलर सहित डाई के प्रचलन पर चंद समय में चमकदार बनने वाली प्रतिमाओं के प्रचलन में अब भी कुछ लोगों की मांग उनके पास आती है। लेकिन वे पीओपी की प्रतिमाएं बनाने से इंकार कर माटी की मूर्ति के लिए लोगों से अपील करते हैं। हरिओम मूर्तिकार का कहना है कि प्रतिमाओं के निर्माण के लिए पिछले ४२ वर्षों से वे सोननदी के किनारे श्मसान भूमि के पास से इन विशेष मिट्टी का उठाव करते हैं, जिसमें धान की भूसी, जूट तथा गोबर का मिश्रण कर छोटी प्रतिमाओं को सांचे तथा बड़ी प्रतिमाओं को बनाने का कार्य करते हैं। हरिओम के अनुसार अबतक ८० से अधिक माटी की गणपति प्रतिमाओं को निर्माण किया गया है।इसके अलावा जिले में अनूपपुर में ही तीन स्थानों सहित कोतमा, बिजुरी, राजनगर जैतहरी व पुष्पराजगढ़ में मूर्तिकारों द्वारा प्रतिमाओं को बनाया जाता है।

Rajkumar yadav
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