पीएम आवास की वजह से मकान बनाना हुआ मंहगा

दो महीने में बीस रुपए मंहगी हो गई सीमेन्ट, सरिया की कीमतों में हो रहा उतार-चढ़ाव और मनमाने दामों में बिक रही रेत, ईटा व अन्य निर्माण सामग्रियों की कीमतों पर नहीं है लगाम

By: brijesh sirmour

Published: 18 Feb 2020, 07:30 AM IST

शहडोल. लोगों का अपना घर बनाने का सपना अब काफी मंहगा होता जा रहा है। जहां एक ओर सीमेन्ट की कीमतें बढ़ती जा रही है। वहीं दूसरी ओर सरिया, रेत, ईंटा व अन्य निर्माण सामग्रियों की कीमतें भी आसमान छू रही है। पिछले दो महीने का आकलन करें तो सीमेन्ट के दाम दस से बीस रुपए प्रति बोरी बढ़ गए है। वहीं लोहे की छड़ें यानि सरिया की कीमतों में भी तीन से चार रुपए तक उछाल आया है। इसके अलावा रेत व ईंट की कीमतों पर कोई नियंत्रण नहीं रहता। जिससे संबंधित व्यवसाई अपनी मनमर्जी से बाजार की स्थिति को भांपते हुए ग्राहकों से कीमत वसूल लेेते हैं। ऐसी स्थिति में घर के निर्माण मेेें कच्ची सामग्रियों की खरीदारी में पहले से ज्यादा कीमतें चुकानी पड़ रही है। जिससे उनका बजट डगमगा रहा है।
फैक्ट फाइल
जिले में प्रति माह सीमेन्ट की खपत पांच से आठ हजार टन
जिले में प्रति माह सरिया की खपत 1200 से 1500 टन
(व्यापारियों के बताए अनुमान के अनुसार )
सीजन में बढ़ती है सीमेन्ट की कीमत
व्यापारियों की माने तो हर सीजन में सीमेन्ट की कीमतों में परिवर्तन होता है। बरसात के मौसम में अक्सर सीमेन्ट के दाम घट जाते हैं और ठंड व गर्मी के मौसम में कीमतें बढ़ जाती है। जिसकी मुख्य वजह सीमेन्ट उत्पादन की तुलना में बाजार में खपत का बढऩा-घटना माना जाता है। बारिश के सीजन में सीमेन्ट की मांग घट जाती है। जिससे दाम भी घटा दिए जाते हैं। वैसे दुकानदार हर सप्ताह में सीमेन्ट के भाव की टेली करते हैं।
प्रतिदिन बढ़ते-घटते है सरिया केे भाव
व्यवसाई दीपक रस्तोगी ने बताया कि सरिया के दाम प्रतिदिन बढ़ते-घटते रहते हैं। नवम्बर-दिसम्बर माह में सरिया की कीमत 35 से 36 रुपए प्रतिकिलो थी। जो वर्तमान में बढकऱ 41 से 42 रुपए तक पहुंच गई है। आईएसआई सरिया से ज्यादा मंहगी ब्रांडेड आईएसआई सरिया होती है। जो उक्त कीमतों से एक-दो रुपए प्रति किलो ज्यादा रहती है।
धर-पकड़ नहीं होती तो सस्ती रहती है रेत
रेत के कारोबारियों ने बताया कि जब प्रशासनिक अमला सक्रिय होता है और रेत के वाहनों की धर-पकड़ की जाती है, तब रेत की कीमतों में उछाल आ जाता है और जब प्रशासनिक अमला शांत रहता है। तब ग्राहकों को सस्ते दर पर रेत उपलब्ध रहती है। रेत की खदानों में ठेका नहीं होने से भी रेत की कीमतों पर प्रभाव पड़ता है। वर्तमान में टे्रक्टर ट्राली में 100 घन फुट रेत की कीमत 35 सौ से चार हजार और डग्गी में 200 घन फुट रेत की कीमत 5500 से छह हजार रुपए है।
चार साल से स्थिर है ईट की कीमतें
भवन निर्माण सामग्री के सप्लायर शंकर गोले ने बताया कि पिछले चार वर्षों से ईंटों की कीमतें स्थिर बनी हुई है। वर्तमान में एक ट्रेक्टर ट्राली में 17 सौ से 18 सौ ईंटे आती है।जिसकी कीमत 45 सौ रुपए से लेकर 55 सौ रुपए तक रहती है। बारिश में रेत व ईंटों की कीमतें बढ़ जाती है, क्योंकि वाहनों को रेत व ईंटा भ_ों तक पहुंचनें में काफी दिक्कतें आती है।

Show More
brijesh sirmour
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned