हृदय रोग, ब्रेन हेमरेज, अस्थमा,मलेरिया का खतरा बढ़ा, जानिए इनसे बचने के उपाय

Shahdol online

Publish: Dec, 08 2017 12:43:47 (IST)

Shahdol, Madhya Pradesh, India
हृदय रोग, ब्रेन हेमरेज, अस्थमा,मलेरिया का खतरा बढ़ा, जानिए इनसे बचने के उपाय

दिन में हो रही चटक धूप, रात की तीखी ठंड बढ़ा रही मर्ज

शहडोल. चटक धूप और तीखी ठण्ड लोगों का मर्ज बढ़ा रही हैं। सुबह दोपहर और रात के तापमान में लगातार बदलाव के चलते लोग कई बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। सुबह और रात की ज्यादा ठण्ड से जहां बच्चे निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर बुजुर्ग हदय रोग, ब्रेन हेमरेज, अस्थमा की चपेट में आने के बाद जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टर्स की मानें तो सुबह रात की तेज ठण्ड और दोपहर की चटक धूप के चलते मरीजों की संख्या में पिछले एक माह में बढ़ोत्तरी हुई है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार हर दिन जांच के लिए पांच सैकड़ा मरीज जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसमें 10 से 15 गंभीर मरीजों को जबलपुर रेफर किया जा रहा है। स्थिति यह है कि जिला अस्पताल के सभी वार्ड मरीजों से खचाखच भरे हुए हैं। इसके अलावा ग्रामीण अंचलों के हालात खराब हैं। बुढ़ार, धनपुरी, जयसिंहनगर, जैतपुर और ब्यौहारी में भी हर दिन 100 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

15 हजार की जांच, 29 सौ मरीज भर्ती
जिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक महीने के भीतर 18 हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचे हैं। इसमें 15 हजार 232 मरीजों की जांच की गई। इसमें अलावा 29 सौ मरीजों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह आंकड़े 1 नवंबर से 30 नबंवर तक के हैं। इसके साथ ही लगभग 300 मरीजों को जिला अस्पताल से रेफर किया गया है। पैथालाजी में भी हर दिन एक सैकड़ा मरीज मलेरिया, डेंगू सहित कई जांचों के लिए पहुंच रहे हैं।

मलेरिया, निमोनिया व लकवा के मरीज ज्यादा
डॉक्टर्स के अनुसार जिला अस्पताल में इन दिनों मलेरिया, निमोनिया और लकवा के मरीज सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। इसके पीछे सुबह रात की तेज ठण्ड और दोपहर की चटक धूप सबसे मुख्य वजह है। देखभाल के अभाव में बच्चों में निमोनिया तेज से पकड़ रहा है। हर दिन निमोनिया से ग्रसित होकर पांच बच्चे अस्पताल आ रहे हैं।

मौसम बदला, बढ़े मरीज
- 40 दिन में 18 हजार 492 मरीजों की जांच, 36 सौ मरीज भर्ती
- 50 फीसदी मरीज मलेरिया से पीडि़त होकर पहुंचे अस्पताल।
- 30 फीसदी मरीज बे्रन हेमरेज लकवा और हदय रोग से पीडि़त।
- 20 फीसदी मरीज सांस रोग और हाइपोथर्मिया, बेल्स पाल्सी से पीडि़त
- 40 दिन में दो सौ से ज्यादा बच्चे निमोनिया से पीडि़त।


ठण्ड और धूप से इन बीमारियों का खतरा
1. हाइपोथर्मिया
वजह: शरीर का तापमान 34 डिग्री पहुंच जाना और बीपी कम हो जाना।
बचाव: इससे मौत भी हो जाती है। ठण्ड से बचाव और खानपान में ध्यान रखना।

2. हार्ट अटैक और लकवा
वजह: ठण्ड में ब्लड प्रेशर अधिक होना।
बचाव: बुजुर्गो को सुबह के वक्त ठण्डे पानी से नहाने से बचना और ठण्ड से बचाव।

3. निमोनिया और सांस लेने में तकलीफ
वजह: मौसम में बदलाव, ठण्ड लगना और धूम्रपान।
बचाव: ठण्ड में बच्चों को विशेष परहेज, धूम्रपान से दूरी और ठण्ड से बचाव।

4. बेल्स पाल्सी (फेसियल पैरालाइसिस)
वजह: ठण्ड की वजह से कान के नजदीक नस सिकुडऩा
बचाव: इससे मुहं टेड़ा हो जाता है। ठण्ड में मफलर का उपयोग और बचाव।

5. अल्सर
वजह: बाहरी खानपान और मौसम में बदलाव
बचाव: एक्सरसाइज, खानपान में ध्यान।


एक्सपर्ट सलाह
खतरनाक है सुबह की ठण्ड
जिला अस्पताल के डॉ धर्मेन्द्र द्विवेदी के अनुसार सुबह की ठण्ड बेहद खतरनाक है। बुजुर्ग और बच्चों को सबसे ज्यादा परहेज की जरूरत है। सुबह के वक्त ठण्डे पानी से नहीं नहाना चाहिए। ठण्ड की वजह से लगातार ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और कई बीमारियों की चपेट में लेता है। ठण्ड की वजह से हदयरोग, ब्रेन हेमरेज लकवा, मलेरिया और सांस लेने में तकलीफ के मरीजों में बढ़ोत्तरी हुई है। बीपी नियंत्रित न होने की वजह से बहुत जल्द लकवा अपनी चपेट में ले रहा है। ठण्ड से ही बच्चों को निमोनिया हो रहा है। परहेज करके इन बीमारियों से बचा जा सकता है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन स्ट्रीम सहित कई सुविधाएं अलग से कर रखी हैं।

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