जल्द चुनी जाएगी भारत की राष्ट्रीय तितली, दौड़ में सात प्रजातियां

शहडोल में तितलियों की मिली 100 से ज्यादा प्रजातियां

By: shubham singh

Published: 16 Sep 2020, 01:42 PM IST

शहडोल। राष्ट्रीय पशु और पक्षी की अब राष्ट्रीय तितली के लिए भी देशभर में अभियान शुरू हो गया है। भारत की राष्ट्रीय तितली चुनने के लिए देशभर के 50 से ज्यादा तितली उत्साही, शोधकर्ता और विशेषज्ञ जुटे हैं। इसमें शहडोल संभाग में पाए जाने वाली तितलियां भी शामिल हो सकती हैं। तितली माह यानी सितंबर से इसके लिए प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। एक माह के भीतर वोटिंग से तितलियों की तीन शीर्ष प्रजातियों के प्रस्ताव के साथ पर्यावरण और वन मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। 2021 तक नाम की घोषणा भी हो सकती है। कृष्णा पीकॉक, नार्दन जंगल क्वीन, कॉमन जेजेबेल, फाइव बार स्वार्डटेल, येलो गोरगोन, ऑरेंज ओकलीफ और कॉमन नवाब उन सात प्रजातियों में हैं जो नेशनल बटरफ्लाई बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं। अच्छी बात यह है कि, इसमें अधिकांश तितलियां शहडोल में पाई जाती हैं।

सर्वे में शहडोल में 100 से ज्यादा प्रजातियां
मध्यप्रदेश का शहडोल संभाग तितलियों की बसाहट के नजरिये से काफी समृद्ध है। अनूपपुर नेचर क्लब के द्वारा किए जा रहे सर्वे में अभी तक शहडोल संभाग में 100 से ज्यादा तितलियों की प्रजातियां मिली हैं। जिनमे से कई दुर्लभ और महत्वपूर्ण प्रजातियां भी शामिल हैं। अनूपपुर नेचर क्लब के संजय पयासी बताते हैं, जल्द ही राष्ट्रीय तितली चुनी जाएगी। इसमें शहडोल में मौजूद तितलियों में एक राष्ट्रीय तितली में शामिल हो सकती है।

सोशल मीडिया में ऑनलाइन फार्म, चुन सकते हैं तितली
इसके लिए सोशल मीडिया में नेशनल बटरफ्लाई कैम्पेन में एक्सपर्ट नागरिकों के बीच पोल करा रहे हैं। इस पोल में कोई भी हिस्सा लेकर अपना वोट पसंदीदा तितली को दे सकता है। इसके लिए बकायदा फार्म भी अपलोड किया गया है। अपनी पसंद बनाने के लिए सात तितलियों को पहले शामिल किया है। जिनकी विशेषताओं के साथ फोटो अपलोड है। यहां जाकर चुन सकते हैं। हालांकि राष्ट्रीय तितली के चयन में यह है कि तितली की प्रजाति पहले से ही राज्य तितली नहीं होनी चाहिए। अभी भारत के सातों राज्यों के पास राज्य तितली हंै।

तितलियों के लिए सितंबर माह अनुकूल
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रकृति को बचाने में तितलियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कई दुर्लभ वनस्पतियों का संवर्धन और संरक्षण होता है। हमारे आस पास तितलियों का बड़ी संख्या में होना एक श्रेष्ठ पारिस्थितिक तंत्र बताता है। तितलियों के अध्ययन के लिए सितंबर का महीना सबसे अनुकूल होता है।

ये तितलियां हैं शहडोल संभाग में मौजूद
- ब्लू मॉरमॉन (भारत की तीसरी बड़ी तितली)
- इंडियन मैपविंग (नक्शे वाली तितली)
- डेड लीफ (सूखे पत्ते जैसी तितली)
- लार्ज ओक ब्लू
- क्रिमसन रोज (डब्लूपीए के शेड्यूल -1 में संरक्षित)
- गाडी बैरन
-कॉमन जेजेबेल
- कॉमन नवाब

देशभर में चल रहा है अभियान
राष्ट्रीय तितली के लिए अभियान चलाया जा रहा है। जानकारी को मंत्रालय को उपलब्ध कराई जाएगी। प्रकृति में हो रहे बदलाव के बारे में सबसे पहले तितलियां सचेत करती हैं। प्रकृति के संरक्षण के लिए जागरूकता पैदा कर रहे हैं।
रवि शुक्ला, फारेस्ट प्रोटेक्टर्स गु्रप

तितलियों का संरक्षण बेहद जरूरी
तितलियां एक स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र की हैं । खाद्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ साथ बच्चों की कल्पनाशीलता एवं रचनात्मक विकास में भी अहम योगदान दे सकती हैं। इन्हें जानना और इनका संरक्षण करना बहुत जरूरी है।
संजय पयासी, अनूपपुर नेचर क्लब

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