जानिए छोटे कारोबारियों का हाल, परिवार चलाना मुश्किल

चाट, पान और चाय दुकानदारों पर रोजी रोटी का संकट

By: lavkush tiwari

Published: 24 May 2020, 08:56 PM IST

शहडोल. कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते दो महीने से लगाए गए लाकडाउन के कारण नगर के चाट ठेला, पानी गुमटी, चाय दुकानदार और अन्य छोटे मोटे व्यवसाय कर अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले लोगों पर अब रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। अब ज्यादातर व्यवसाइयों को जीवनयापन चलाने में मुश्किल हो रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि नगर की चौपाटी में चाट, डोसा, फुल्की, चाउमीन, पिज्जा और बर्गर बेंचने वाले दुकानदार अब आर्डर पर घरों में होम डिलेवरी कर किसी तरह अपनी रोजी रोटी चला रहे हैं। सबसे बड़ी मुश्किल चाय, गुमटी और पान दुकानदारों को झेलनी पड़ रही है। इन व्यवसाइयों की मानें तो अब तक दो महीने के दौरान लगभग २ करोड़ रुपए से अधिक का व्यवसाय प्रभावित होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
परिवार चलाना मुश्किल- गिरिजा पटवा- चाय दुकानदार-
सड़क किनारे चाय की दुकान चलाकर परिवार का भरण पोषण करने वाली महिला गिरिजा पटवा ने बताया कि पति विकलांग है। प्रतिदिन एक हजार से दो हजार रुपए की चाय बेंच लेती थी, लेकिन अब परिवार चलाने में मुश्किल हो रही है।
चाट ठेला बंद- चाट, फुल्की व्यवसाई-
चाट फुल्की व्यवसाई प्रेमदास गुप्ता ने बताया कि प्रतिदिन 1500 से 2000 रुपए की चाट, फुल्की बेंचकर परिवार चलाताथा, चाट ठेला बंद होने से अब परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
भूखों मरने की स्थिति- कैलाश पान ठेला व्यापारी
पुराने बस स्टैंड स्थित धांसू पान भण्डार के नाम से पान ठेला दुकान चलाने वाले कैलाश गुप्ता ने बताया कि पान ठेला बंद होने से अब रोजी रोटी चलाना मुश्किल हो गया है। प्रशासन को छोटे दुकानदारों को मदद देकर उनको दुकान खोलने की अनुमति देनी चाहिए।
मुश्किलों का कर रहे सामना- बृ्रजेश गुप्ता-समोसा व्यापारी
समोसा व्यापारी ब्रृजेश गुप्ता ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 5 हजार का समोसे का करोबार था, लेकिन दुकान बंद होने के कारण अब बहुत मुश्किल हो रही है। हम छोटे दुकानदारों को प्रशासन को दुकान खोलने की अनुमति देनी चाहिए।
परिवार चलाने के लिए बदल दिया धंधा- संदीप गुप्ता-
सर्दी के दिनों में मुमफली का ठेला लगाने वाले और गर्मी में गन्ने के जूस का व्यवसाय करने वाले संदीप गुप्ता ने बताया कि परिवार चलाने लिए गन्ने जूस का धंधा बंद करने के बाद अब फल का ठेला चलाकर परिवार का भरण पोषण कर रहा हूं।

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