समाज को शिक्षित करने बच्चों को पढ़ा रहे मानवीयता का पाठ

समाज को शिक्षित करने बच्चों को पढ़ा रहे मानवीयता का पाठ

shivmangal singh | Publish: Sep, 05 2018 09:19:13 PM (IST) Shahdol, Madhya Pradesh, India

वेतन के अंशदान से कराया विद्यालय का जीर्णोद्धार

शहडोल. किसी भी व्यक्ति द्वारा अर्जित की गई सबसे बड़ी सम्पत्ति शिक्षा की होती है। जिसे आप किसी को भी दे सकते हैं और आपके पास से कुछ भी नहीं जाता है, बल्कि बढ़ता ही है। शिक्षा का सबसे बड़ा स्त्रोत शिक्षकों को माना जाता है। हर व्यक्ति के जीवन में शिक्षक का महत्वपूर्ण स्थान होता है। पूर्व काल से लेकर वर्तमान समय तक समाज में शिक्षकों को विशेष स्थान दिया गया है। शिक्षकों ने कई लोगों को पढ़ाया और उन्हें उनके मुकाम तक पहुँचाया है। कुछ शिक्षक ऐसे भी होते हैं, जिन्होने अपने जीवन में नि:स्वार्थ भावना से विद्या की सेवा की है। इनका उल्लेख शिक्षक दिवस पर किया जाना इसलिए जरूरी है कि उनकी नि:स्वार्थ भावना अन्य लोगों के समक्ष उदाहरण के रूप में पेश हो सके और लोग उनकी प्रेरणा से समाज को बेहतर दिशा दे सकें। आज हम अपने पाठकों को जिले कुछ ऐसे ही शिक्षकों के बारे में जानकारी दे रहे, जिन्होंने अपने नि:स्वार्थ भावना और बुलंद हौसलों से शिक्षकीय कार्य को एक नया आयाम दिया है और उनकी त्याग और तपस्या से बच्चों का भविष्य संवर रहा है। समीपी ग्राम कोटमा के शासकीय हाई स्कूल के प्राचार्य संजय पाण्डेय ने अपने जीवन काल में शिक्षकीय कार्य को श्रेष्ठ सेवा का आधार बनाया। उन्होने बैंक, रेलवे एएसएम और जेआरएफ की नौकरी को ठुकरा कर शिक्षा के क्षेत्र में व्याख्याता के पद पर कार्य करना बेहतर समझा। शासकीय रघुराज हायर सेकेण्ड्री स्कूल में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने रसायन शास्त्र की एक स्तरीय श्रेष्ठ प्रयोगशाला का निर्माण किया। जिसमें कॉलेज स्तर के विद्यार्थियों ने शोध का भी कार्य कर पीएचडी की उपाधि हासिल की। इस प्रयोगशाला को भोपाल की एक टीम ने सराहा था। जबसे वह कोटमा हाई स्कूल के प्राचार्य बने हैं तब से विद्यालय में कायाकल्प ही कर दिया है। विद्यालय के हर क्लास रूम में ग्रीन बोर्ड लगे हुए हैं। स्टाफ रूम सहित अन्य कई कक्षों का जीर्णोद्धार कराया। बालसभा कक्ष को मॉडल सभा कक्ष बनाया। बेहतरीन प्रयोगशालाएं निर्मित की गई तो अधिकांश कमरों में टाइल्स पुट्टी भी कराया गया। उन्होने बताया कि विद्यालय में स्टाफ के १८ लोग अपने-अपने वेतन से अंशदान करने को सदैव तत्पर रहते हैं। स्टाफ ने श्रमदान से एक बेहतर मंच और अच्छे मैदान की सौगात दी है।

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