लॉकडाउन में किताबों से बढ़ रही दूरियां और मोबाइल से बन रही करीबियां

मोबाइल व टीवी स्क्रीन पर ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों की आंखों पर पड़ रहा है जोर, ऑनलाइन पढ़ाई में फीडबैक के जरिए हो रहा छात्रों की समस्याओं का समाधान, टीवी केबिल कनेक्शन और व्हाट्स एप से हो रही कक्षा नौवीं से बारहवीं तक की पढ़ाई, कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों के लिए ग्रुपों में प्रतिदिन भेजी जा रही है पठन-पाठन सामग्रियां

By: brijesh sirmour

Published: 05 May 2020, 12:24 PM IST

शहडोल. लॉकडाउन के कारण इन दिनों जिले के शासकीय व अशासकीय विद्यालयों के बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। जिससे स्कूली बच्चों का ज्यादा समय मोबाइल और टीवी स्क्रीन के सामने गुजर रहा है और इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों की आंखों पर पड़ रहा है। जानकारों के मुताबिक ज्यादा समय तक टीवी व मोबाइल स्क्रीन के सामने रहने से आंखों में सूखापन आ जाता है। इसलिए ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान बच्चों को अपनी आखों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है। इन दिनों कक्षा एक से लेकर बारहवीं तक और कॉलेजोंं की पूरी पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है। जिसके लिए विभाग द्वारा प्रतिदिन पठन-पाठन की सामग्रियां उपलब्ध कराई जा रही है और संकुल, जिला और राज्य स्तर पर उसकी मॉनीटरिंग भी की जाती है। इस दौरान फीडबैक लेकर छात्र-छात्राओं को होने वाली दिक्कतों का समाधान भी किया जा रहा है।
456 ग्रुपों में हो रही है आठवीं तक की पढ़ाई
जिला शिक्षा केन्द्र के सहायक परियोजना अधिकारी जीतेन्द्र पटेल ने बताया है कि जिले में कक्षा एक से लेकर आठवीं तक के बच्चों को 456 व्हाट्स एप के जरिए पठन-पाठन संबंधी सामग्रियां उपलब्ध कराई जा रही है। जिसमें दस मिनट से लेकर आधे घंटे तक के शिक्षकों की पढ़ाई के विडियो भी रहते हैं। पढ़ाई के दौरान यदि किसी बच्चे को कोई परेशानी होती है तो उसका समाधान भी किया जाता है।
नौवीं से बारहवीं तक टीवी में भी होती है पढ़ाई
रमसा के सहायक परियोजना अधिकारी अरविन्द्र पाण्डेय ने बताया है कि कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के बच्चों को व्हाट्स एप और केबिल कनेक्शन के जरिए टीवी में पढ़ाया जा रहा है। प्राइवेट स्कूलों के 45 और सरकारी स्कूलों के 189 ग्रुप बनाए गए है। शहडोल, धनपुरी, बुढ़ार और बाणसागर में टीवी केबिल कनेक्शन से पढ़ाई कराई जा रही है तथा अन्य स्कूलों में व्हाट्स एप में पठन-पाठन की सामग्रियां भेजी जाती है।
एक्सपर्ट व्यूह
सामान्य तौर पर टीवी व मोबाइल को देखने से आंखों को ज्यादा नुकसान नहीं होता है, मगर मोबाइल व टीवी स्क्रीन में ज्यादा समय तक बने रहने से बच्चों को आई स्ट्रेन हो सकता है, क्योंकि स्क्रीन को देखने के लिए उनकी आंखों में ज्यादा जोर पड़ता है। इससे बचने के लिए उन्हे आखों मेें लुब्रिकेशन की दवा डालनी चाहिए। साथ ही कुछ देर के लिए आंखों को बंद करके रखना चाहिए।
डॉ. बीएस बारिया, नेत्र रोग विशेषज्ञ, शहडोल

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