रथ में सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकले भगवान जगन्नाथ, रास्ते में श्रद्धालुओं ने की पूजन-अर्चन, देखें वीडियो

Amaresh Singh | Updated: 04 Jul 2019, 06:29:23 PM (IST) Shahdol, Shahdol, Madhya Pradesh, India

दो दिन विश्राम के बाद लौटेंगे अपने धाम

शहडोल। मोहनराम तालाब से दोपहर 2 बजे भगवान जगन्नाथ रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकले। रथ यात्रा फूलों से सजी हुई थी। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु रथयात्रा खींचते रहे। यह रथ यात्रा मोहन राम तालाब मंदिर से प्रारंभ होकर बुढ़ार चौक स्थित गणेश मंदिर पहुंची। वहां से गुरुनानक चौक, डेवलपमेन्ट, गायत्री मंदिर, जयस्तंभ पहुंची। इसके बाद रथ यात्रा वहां से वापस स्टेडियम के बगल से गंज होते हुए गांधी चौक, परमठ से पुरानी सब्जी मण्डी होते हुए पंचायती मंदिर पहुंची यहां भगवान दो दिन विश्राम करेंगे। जहां से 6 जुलाई की शाम वह वापस अपने धाम मोहन राम तालाब मंदिर पहुंचेगे। रथ यात्रा के दौरान रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं की स्वागत के लिए लोगों ने रास्ते में जगह-जगह प्रसाद वितरण किया। रास्ते भर श्रद्धालु ढोल नगाड़ों पर भगवान जगन्नाथ की जयकारा करते रहे।

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रथ यात्रा परंपरा सवा सौ साल पुरानी
मोहनराम तालाब मंदिर में स्थापित भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की परंपरा लगभग सवा सौ वर्ष से भी अधिक पुरानी है। जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर यहां भी भगवान जगन्नाथ रथ में सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। नगर भ्रमण के बाद वह अपनी जनक पुरी यानी पंचायती मंदिर पहुंचते हैं। जहां दो दिन विश्राम के बाद वह अपने धाम लौटते हैं। मोहनराम तालाब मंदिर के ट्रस्टी लवकुश शास्त्री की माने तो पहले भगवान की जनक पुरी कहीं दूसरी जगह थी। लेकिन बाद में उसे बदलकर पंचायती मंदिर में स्थान दिया गया। तब से लेकर अभी तक पंचायती मंदिर को ही भगवान जगन्नाथ की जनकपुरी के रूप में जाना जाता है।

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डेढ़ सौ वर्ष पूराना है मंदिर का इतिहास
जानकारों की माने तो मोहन राम तालाब मंदिर का इतिहास लगभग डेढ सौ वर्ष पूराना है। जिसका निर्माण अमरपाटन के मोहन राम पाण्डेय द्वारा कराया गया था। भगवान की प्रेरणा से उनके द्वारा उक्त मंदिर व तालाबों का निर्माण कराया गया। इसके बाद यहां पर भगवान नारायण, राम दरबार व जगन्नाथ स्वामी की स्थापना कराई गई। मंदिर निर्माण व भगवान की स्थापना के कुछ वर्ष बाद से ही भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की परंपरा प्रारंभ की गई। यह परंपरा तब से अनवरत चली आ रही है। पहले यह यात्रा कुछ दूर तक ही जाती थी। अब यह लगभग पूरा नगर भ्रमण करती है। यह भी पढ़ें-नियम तोड़ने वाले कोचिंग संचालकों की सूची जारी, मचा हड़कंप

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