लॉकडाउन: दूध की खपत हुई आधी, पेट पालने पर आ गया है संकट

चूनी खली के लिए नहीं मिल रहा है पैसा

By: shubham singh

Published: 23 Apr 2020, 08:56 PM IST

शहडोल। लॉकडाउन का असर दूध विक्रेताओं पर भी पर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के बड़े दूध विक्रेताओं की खपत घटकर आधी हो गई है। दूध विक्रेताओं की हालत यह है कि मवेशियों को खिलाने के लिए उनके पास खली और चूनी के लिए भी पैसे नहीं बच पा रहे हैं। इससे उनके पेट पालने पर भी संकट आ गया है। पचगांव निवासी दूध विक्रेता सज्जन यादव ने कहा कि उनके यहां 34 मवेशी हैं। इनसे लॉकडाउन के पहले करीब एक क्विंटल दूध हर दिन दूध डेयरी और मिठाई दुकानों पर खपत हो रही थी। दूध डेयरी और मिठाई दुकानों के बंद होने से दूध की खपत घटकर 50 लीटर रह गई है। ये दूध अब घर-घर जाकर बेचना पड़ रहा है। इसके बाद भी काफी दूध बच जाता है। इसलिए बछड़ों को दूध पिला दिया जा रहा है।
नहीं मिल रही चूनी और खली
दूध की खपत बंद होने से पैसे भी नहीं मिल पा रहे हैं। इससे एक ओर तो मवेशियों के लिए दुकानों से खली और चूनी नहीं मिल पा रही है। अगर मिल भी रही है तो उसे खरीदने के लिए पैसे नहीं है। इससे मवेशियों का दूध उत्पादन भी घटकर आधा हो गया है। लगभग इस गांव में सभी दूध विक्रेताओं का एक जैसा हाल है। सबका दूध का खपत घटकर आधा हो गया है। अगर लॉकडाउन आगे बढ़ा तो सबकी घर की हालत काफी बिगड़ जाएगी।

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