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लापरवाही: परिवहन में लेटलतीफी, पहले से नहीं बनाई व्यवस्था, झमाझम बारिश में भीगी धान

बारिश हुई तब तिरपाल खरीदने गए, खुले में सवा लाख क्विंटल धान
परिवहन की रफ्तार धीमी होने से बिगड़ी व्यवस्था, गुणवत्ता भी होगी प्रभावित

शाहडोल

Published: December 29, 2021 12:45:23 pm

शहडोल. खून-पसीना बहाकर एक-एक दाना सहेजने वाले किसानों के अनाज की जिले में दुर्गति हो रही है। पहले तो ओपेन कैप में रखा पुराना स्टॉक खराब हुआ और अब खरीदी के दौरान खरीदी केन्द्र प्रभारियों और परिवहन कर्ता की लापरवाही की बदौलत किसानों का लाखों क्विंटल अनाज भीग रहा है। मंगलवार की दोपहर हुई झमाझम बारिश ने खरीदी केन्द्रो में व्यवस्था के उन सभी दावों की पोल खोलकर रख दी है जिसका पाठ अधिकारियों ने कलेक्ट्रेट की चार दिवारी के अंदर बैठकर समिति प्रबंधकों और इससे जुड़े अधिकारियों को पढ़ाया था। आलम यह रहा कि खुले आसमान के नीचे केन्द्रो में पड़े सवा लाख क्विंटल से ज्यादा धान भीगती रही और समिति प्रबंधक नजारा देखते रहे। केन्द्रो में न तो धान को बचाने कोई समुचित व्यवस्था थी और न ही इसे लेकर प्रबंधक गंभीर नजर आए। जब बारिश शुरु हो गई तो प्रबंधक शहर की ओर तिरपाल खरीदने भागे। जब तक वह तिरपाल लेकर आते तब तक बारिश ने अपना काम कर दिया। जिले के अलग-अलग खरीदी केन्द्रो में लगभग 1 लाख 17 हजार 818 क्विंटल से ज्यादा धान खुले आसमान के नीचे पड़ी हुई है।
किसानों का लटकेगा भुगतान
उल्लेखनीय है कि जब तक समितियों में किसानों से खरीदी गई धान गोदाम तक नहीं पहुंचगी तब तक किसानों का भुगतान नहीं होगा। अब जब किसानों से खरीदी गई यह धान भीग गई है तो फिर इसकी गुणवत्ता भी प्रभावित होगी। ऐसे में किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। जब तक धान पूरी तरह से सूखेगी नहीं तब तक इसका परिवहन संभव नहीं हो पाएगा। ऐसे में किसानों का भुगतान लटका रहेगा। गोदाम में धान पहुंचने के बाद वहां से स्वीकृत पत्रक जारी होने के बाद ही किसानों का भुगतान संभव हो पाएगा।
खुले में पड़ी 1 लाख 17 हजार क्विंटल धान
जिले के 48 खरीदी केन्द्रो में से समिति स्तर पर की जा रही धान खरीदी केन्द्रो से परिवहन की रफ्तार लगातार घटती गई। अब स्थिति यह है कि समिति स्तर पर खरीदी के बाद लगभग 1 लाख 17 हजार क्विंटल से ज्यादा धान खुले आसमान के नीचे पड़ी हुई है। सोमवार से ही मौसम का मिजाज बदला हुआ था। इसके बाद भी समिति प्रबंधकों द्वारा समुचित व्यवस्था नहीं बनाई गई। जिसके चलते मंगलवार की दोपहर हुई बारिश के बाद हजारों क्विंटल धान भीग गई। अब समिति प्रबंधक लीपा-पोती में जुट गए हैं।
बारिश शुरू हुई तो भागे तिरपाल लेने
पड़मनिया खुर्द खरीदी में आलम यह रहा है कि खुले में पड़े लगभग 12 हजारा बोरा धान को ढ़कने के लिए समुचित व्यवस्था हीं नही थी। फटी-पुरानी तिरपाल से कुछ स्टेक को ढ़ककर कोरम पूर्ति कर ली गई। जब स्थिति और बिगडी तो समिति प्रबंधक को तिरपाल की सुध आई और वह वहां से तिरपाल खरीदने मुख्यालय भगे। जब तक वह तिरपाल खरीदकर लौटते तब तक बारिश ने अपना काम कर दिया। खरीदी केन्द्र के जिम्मेदार देखते रहे और धान के बोरे बारिश में भीगते रहे। इतना ही नहीं जहां खरीदी गई धान के स्टेक लगाए गए हैं वहां भी कई स्टेक बिना कुछ बिछाए ही जमा दिए गए हैं।
एक सप्ताह से सिर्फ एक गाड़ी से परिवहन
जिले में धान परिवहन की स्थिति यह है कि जिला मुख्यालय से लगे सिंहपुर के खरीदी केन्द्र पड़मनिया खुर्द में पिछले 8-10 दिन के बीच में सिर्फ एक गाड़ी धान का ही परिवहन हो पाया है। बताया जा रहा है कि यहां की धान का उठाव कर उमरिया भेजा जाना है। परिवहनकर्ता की लेट-लतीफी के चलते यहां धान के बोरों का ढ़ेर लग गया है। उक्त खरीदी केन्द्र में लगभग 12 हजार से ज्यादा बोरों का स्टॉक लग गया है। परिवहन की रफ्तार धीमी होने की वजह से धान का उठाव न हो पाने के कारण अब खरीदी में भी समस्या हो रही है।

लापरवाही: परिवहन में लेटलतीफी, पहले से नहीं बनाई व्यवस्था, झमाझम बारिश में भीगी धान
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