300 फीट उतरकर बुझाते हैं प्यास, न सड़क न मतदान केन्द्र, वोटिंग से हैं अंजान ग्रामीण

चुनाव आयोग ने लिया संज्ञान फिर भी दाल जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे अफसर

By: shubham singh

Updated: 25 Nov 2018, 09:52 PM IST

शहडोल। विकास और मूलभूत सुविधाओं से कोसो दूर ब्यौहारी के दाल गांव तक अफसर चुनाव आयोग के संज्ञान लेने के बाद भी नहीं पहुंच पाए हैं। आयोग के गंभीर होने के बाद अफसर सिर्फ कागजों में गांव टटोलते रहे लेकिन गांव तक कोई भी अफसर और मैदानी अफसर नहीं पहुंचे हैं। लगभग डेढ़ सौ से ज्यादा आबादी और 60 वोटर्स वाले इस गांव के लोग पिछले कई दशकों से बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं। ब्यौहारी के झिरिया से 8 किमी एकदम खड़ी पहाड़ी में स्थित दाल गांव तक पहुंचने के लिए न तो सड़क बनी हैं और न ही कोई सरकारी व्यवस्थाएं हैं। गांव के लोग भी गिनती के दिनों में नीचे आते हैं। पेयजल की कोई व्यवस्था न होने के कारण दाल गांव के ग्रामीण पिछले कई दशकों से 300 फीट नीचे खाई में उतरकर प्यास बुझाते थे। यहां न तो कोई अफसर पहुंचा था और न ही कोई जनप्रतिनिधि। पत्रिका ने प्रशासन की पहुंच से दूर दाल गांव की रोज की जद्दोजहद पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। मामले में चुनाव आयोग ने भी संज्ञान में लिया और अधिकारियों से रिपोर्ट मंगाई। चुनाव आयोग के संज्ञान में दो दिन बीतने के बाद भी अफसर और मैदानी अमला की टीम दाल गांव तक नहीं पहुंच सकी है। हालात यह हैं कि दाल गांव के ग्रामीण मतदान की प्रक्रिया से भी अंजान हैं।


प्रेक्षक ने की पड़ताल, नहीं पहुंच सके गांव
चुनाव आयोग के संज्ञान लेने के बाद ब्यौहारी प्रेक्षक बीके देहुरे ने गांव जाने के लिए स्थानीय अधिकारियों से बात भी की थी। वन विभाग की टीम के साथ गांव पहुंचने वाले थे लेकिन मीटिंग होने की वजह से स्थगित हो गया। प्रेक्षक की जांच में यह बात सामने आई है कि दाल गांव में लगभग 60 वोटर्स हैं।

दाल गांव की दुश्वारियों पर एक नजर
- गांव में पहुंचने के लिए न तो सड़क हैं और न ही कोई साधन है। 8 किमी सीधी चढ़ाई और पहाड़ी है।
- गांव में कई दशक बीतने के बाद भी अफसर और कोई भी नेता नहीं पहुंचा है।
- प्रशासन की पहुंच से दूर होने की वजह से ग्रमीणों को कोई भी योजना का लाभ नहीं मिला है।
- यहां न तो पीएम आवास बने हुए हैं और न ही शौचालय तैयार कराएं गए हैं।
- पानी की कोई व्यवस्था न होने की वजह से हर दिन 300 फीट नीचे उतरते हैं ग्रामीण।
- 8 किमी तक पत्थरी पहाड़ी है। बड़े वाहन जाना संभव नहीं है। ग्रामीण गिनती के दिनों में उतरते हैं।

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