ऐसा वक्त था.. हूटर बजते ही घरों में कैद हो जाते थे लोग, बिजली बंद कर लेते थे लेकिन ऐसी एकता कभी नहीं देखी

देश बंटवारा, इमरजेंसी, ब्लैक आउट और अन्न संकट देख चुके बुजुर्गों ने साझा किए अनुभव

शहडोल। देश बंटवारा, इमरजेंसी, ब्लैक आउट और अन्न संकट नजदीक से देख चुके बुजुर्गों का कहना है कि मानवता के लिए ऐसी एकजुटता इसके पहले कभी नहीं देखने को मिली। देश को बंटते देखा। कई पार्टियों के बड़े आंदोलन देखने को मिले। दंगे के साथ देश में कफ्र्यू भी देखा लेकिन मानवता को बचाने जिस तरह शहर और संभाग की जनता एकजुट हुई है, ऐसा कभी नहीं रहा। बुजुर्गों का कहना है कि जिस तरह से सबने एक होकर कोरोना को हराने का संदेश दिया है, ये हमेशा इतिहास में याद रहेगा।

देश को बंटते देखा, इमरजेंसी के खराब हालात, लेकिन ये पहला नजारा
मैं 12 साल का था, जब भारत और पाकिस्तान में बंटवारा हो रहा था। विभाजन का समय देखा। पाकिस्तान से लोग आ रहे थे। इमरजेंसी के भी बिगड़े हालात देखे। चुनावी संग्राम नेता गिरफ्तार कर लिए जाते थे। बाहर नहीं निकलने दिए जा रहा था। जेल भेज दिया जाता था। इमरजेंसी के बाद आंदोलन और कफ्र्यू भी देखे। उस वक्त पूरा सन्नाटा हो जाता था। लोग घरों में कैद हो जाते थे लेकिन किसी बीमारी को मात देने ऐसा पहली बार मैं देख रहा हूं। 84 वर्षीय समाजसेवी व वरिष्ठ अधिवक्ता जेठानंद भागदेव ने पत्रिका के साथ पुराने अनुभव साझा किए। कई आंदोलन और कफ्र्यू में भी ऐसी एकजुटता नहीं थी। डर के बाद भी लोग घरों से निकल जाते थे। तब ऐसा सन्नाटा नहीं था। लोगों ने एकजुटता की मिसाल पेश की है।

दंगे, कफ्र्यू, सबकुछ देखा लेकिन ऐसी एकजुटता नहीं
देश का बंटवारा, युद्ध के अलावा कई दंगे देखे। कई बार नौकरी के वक्त कफ्र्यू भी देखने को मिला लेकिन स्वास्थ्य और देश की सुरक्षा के लिए ऐसी एकजुटता कभी नहीं देखी। हम कोरोना को मात देते हुए एकजुटता का भी संदेश दे रहे हैं। अन्नसंकट में अपील के बाद पहली बार ऐसी मिसाल देखने को मिली है। ब्लैक आउट में हम घरों के भीतर पहुंच जाते थे। बिजली तक बंद कर लेते थे। हूटर बजने के बाद बाहर निकलते थे। उस वक्त डर का माहौल था। फिर भी लोग वक्त मिलते ही बाहर निकल जाते थे। सेवानिवृत्त प्रबंधक एफसीआई संतोष कुमार श्रीवास्तव ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि देश के लिए जनता का ऐसा कफ्र्यू पहली बार देखा है। हमारी एकजुटता और स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता कोरोना को जरूर दूर करेगी।

बाढ़ के साथ चेचक मलेरिया का प्रकोप, लेकिन ऐसा नहीं देखा
जनता कफ्र्यू में अपने घर पर बच्चोंं और नातियों के साथ कोरोना से बचाव का संदेश देते हुए 82 वर्षीय बुजुर्ग महिला बब्बीबाई गुप्ता ने पत्रिका को बताया कि उन्होने अब तक के अपने जीवनकाल मेंं इतनी बड़ी आपदा कोरोना के खिलाफ लोगों की एकजुटता को कभी नहीं देखा। इसके पहले उनके गांव में बाढ़ आई थी, चेचक और मलेरिया का प्रकोप हुआ था, लेकिन घरों में रहकर एक साथ पूरे देश में एक साथ कोरोना महामारी के विरूद्ध लोगों की एकजुटता का शंखनाद एक अलग नजारा है। भविष्य में इसके सार्थक परिणाम आएंगे और कोरोना के खिलाफ इस जंग में जीत हमारी होगी।

shubham singh Incharge
और पढ़े

MP/CG लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned