जिला अस्पताल सहित ब्लॉक की अस्पतालों में भी होंगे ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से 180 ऑक्सीजन सपोर्ट बेड की मिली स्वीकृति

By: amaresh singh

Published: 16 Apr 2021, 11:33 AM IST

शहडोल. जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों की तादाद में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी की वजह से मेडिकल कॉलेज में लगातार दबाव बढ़ रहा था। जिसे देखते हुए जिले के अन्य स्वास्थ्य केन्द्रो में भी मरीजों को भर्ती करने के लिए आवश्यक सुविधाओं को बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिला चिकित्सालय सहित जिले के अन्य किसी भी स्वास्थ्य केन्द्र में आक्सीजन सपोर्टेड बेड की व्यवस्था नहीं थी जहां कोविड मरीजों को भर्ती किया जा सके। जिसे गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर डॉ सतेन्द्र सिंह ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भोपाल से आक्सीजन सपोर्टेड बेड की स्वीकृति की मांग की थी। कलेक्टर के प्रयास से जिले के स्वास्थ्य केन्द्रों के लिए इस सुविधा की स्वीकृति राष्टीय स्वास्थ्य मिशन से मिल गई है। अब मेडिकल कॉलेज के साथ ब्लॉक की अस्पतालों में भी कोरोना से लड़ाई में मरीजों के इलाज के लिए पुख्ता इंतजाम रहेंगे। बताया जा रहा है कि जिले को 180 आक्सीजन सपोर्ट बेड की स्वीकृत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से मिले हैं। जल्द ही ये सिस्टम अस्पतालों में शुरू किया जाएगा।


इन अस्पतालों के लिए मिली स्वीकृति
जिले के जिन स्वास्थ्य केन्द्रो के लिए 180 ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड की स्वीकृति मिली है उसमें जिला चिकित्सालय सहित सिविल अस्पताल ब्यौहारी और जिले के चार अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रो को शामिल किया गया है। जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल शहडोल में 100 आक्सीजन सपोर्ट बेड, सिविल अस्पताल ब्यौहारी को 40, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बुढार केा 10, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र धनपुरी एवं झीकबिजुरी को 10-10 एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र जयसिंहनगर को 10 आक्सीजन सपोर्ट बेड की स्वीकृत प्राप्त हुई है।


मेडिकल कॉलेज से कम होगा दबाव
उल्लेखनीय है कि अभी तक सिर्फ मेडिकल कॉलेज में ही ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड की व्यवस्था थी। जहां जिले के साथ ही आस-पास के जिलो से रेफरल मरीज भी यहीं भर्ती हो रहे थे। मरीजों की तादाद में लगातार बढ़ोत्तरी की वजह से मेडिकल कॉलेज में लगातार दबाव बढ़ रहा था। अब जिला चिकित्सालय के साथ ही सिविल अस्पताल ब्यौहारी व अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रो में ऑक्सीन सपोर्टेड बेड उपलब्ध होने से कुछ हद तक मेडिकल कॉलेज से दबाव कम होगा और इससे मरीजों को भी राहत मिलेगी।

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