भार के अंत:पुर में स्थापित 18 भुजी मां कंकाली की प्रतिमा, पंडा लगाते हैं देवी को भोग

जंगल के बीच में खुले आसमान के नीचे था मां का डेरा, अब भव्य मंदिर

By: amaresh singh

Published: 13 Oct 2021, 08:04 PM IST

शहडोल. जिला मुख्यालय से लगभग 10 किमी दूर ग्राम अंतरा में मां आदि शक्ति जगदम्ब का भव्य मंदिर स्थापित है। जिसमें 18 भुजाओं वाली मां कंकाली अस्त्र-सस्त्र से शुषोभित है। इनकी इस अलौकिक छबि की एक झलक पाने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और लंबी कतार लगाकर अपनी बारी आने का इंतजार करते हैं। जानकारों का कहना है कि जिस स्थान पर माता रानी का दरबार सजा है वह बियाबान जंगल था। जिसके बीच मां कंकाली की 10वीं-11वीं सदी की प्रतिमा स्थापित थी। जैसे-जैसे माता का प्रताप बढ़ता गया क्षेत्र का विकास भी होता गया और अब यहां भव्य मंदिर सज कर तैयार है। मां कंकाली मंदिर के साथ परिसर में अन्य देवी-देवताओं के भी भव्य मंदिर बने हुए है।


दूर-दूर से दर्शन करने पहुंचते हैं श्रद्धालु
अंतरा स्थित मां कंकाली की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है। यहां नवरात्र में दूर-दूर से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं। सुबह से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरु हो जाता है जो कि देर शाम तक चलता रहता है। प्रतिदिन हजारों की तादाद में श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता
रानी के दर्शन कर अपनी अरजी लगाते हैं।


काली चरण बाबा ने कराया था मंदिर का निर्माण
मां कंकाली मंदिर में लगभग 11 वर्ष से देवी की सेवा कर रहे पुजारी चन्द्रिका प्रसाद तिवारी का कहना है कि कंकाली माता भार के अंत:पुर की देवी है। धीरे-धीरे कर इसका नाम अंतरा पड़ गया। यहां कालीचरण बाबा पहुंचे थे जिन्होने ही माता के मंदिर का निमार्ण कराया था। धीरे-धीरे इसका विस्तार होता गया। जहां अठारह भुजी माता कंकाल रूप में स्थापित है। पूरा आकार कंकाल का होने की वजह से माता का नाम कंकाली देवी पड़ा। यहां आदिवासी पंडा पहला भोग देवी को लगाते हैं।

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