नेशनल डॉक्टर्स डे : मरीज को नई जिंदगी मिली तो खुद के डॉक्टर होने पर हुआ गर्व

आदिवासी अंचल में मरीजों के लिए भगवान साबित हो रहे डॉक्टर्स

By: amaresh singh

Published: 01 Jul 2019, 05:27 PM IST

शहडोल। डॉक्टर्स हम सबकी जिंदगी के लिए अहम हिस्सा हैं। प्रोफेशन के साथ ही उनका व्यक्तित्व और व्यवहार भी मरीजों के बेहतर करने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे तो हर डॉक्टर भगवान के दूत होते हैं लेकिन शहर के कई ऐसे डॉक्टर्स भी हैं, जिन्होने मरीजों को अंतिम क्षण में नई जिंदगी दी है। नेशनल डॉक्टर्स डे पर ऐसे डॉक्टर्स की कहानियों से रू-ब-रू करा रहे हैं, जिन्होने करियर के दौरान कई गंभीर केसों का सामना किया लेकिन हार नहीं मानी और मरीज को नई जिंदगी दी। किसी का पूरा परिवार डॉक्टर है तो कोई गरीब मरीज का नि:शुल्क इलाज कर घर तक जाने के पैसे और दवाईयां भी मुफ्त में दे रहे हैं।

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10 हजार से ज्यादा ऑपरेशन, नि:शुल्क भी इलाज
शहर के वरिष्ठ डॉ एके श्रीवास्तव सरलता सहजता को लेकर पहचाने जाते हैं। वे अब तक 10 हजार से ज्यादा बड़े आपरेशन कर चुके हैं। क्लीनिक पहुंचने वाले कई गरीब मरीजों का डॉ श्रीवास्तव न केवल इलाज करते हैं, बल्कि दवाइयों के साथ घर तक जाने के वापस पैसे भी देते हैं।

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पिता नहीं था, इलाज के नहीं थे पैसे, किराया भी दिया
आंत में इंफेक्शन की वजह से एक बालक को मां ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। बचपन में ही पिता की मौत हो गई थी। मां भी मजदूरी करती थी। इलाज के पैसे नहीं थे। बाद में बच्चा प्राइवेट अस्पताल में भर्ती था। डॉ राजा शितलानी न केवल इलाज में मदद की थी, बल्कि आर्थिक सहायता कर ठीक होने तक जिम्मा भी उठाया था।

सेवाभावना ऐसी कि पूरे परिवार में 9 सदस्य डॉक्टर
शहर में एक ऐसा भी परिवार है, जहां 9 सदस्य डॉक्टर हैं। जिला अस्पताल में पदस्थ सिविल सर्जन डॉ उमेश नामदेव के अनुसार, करियर के शुरूआत के वक्त गंभीर बीमारी से पीडि़त बच्चे को लेकर मां पहुंची थी। मां सामने तड़प रही थी तभी सोचा था कि परिवार में ज्यादा से ज्यादा डॉक्टर होंगे। पत्नी डॉ सुधा नामदेव के अलावा दोनों बेटियों के साथ 9 सदस्य परिवार में डॉक्टर हैं।

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प्रसव के बाद नहीं मिला खून तो खुद कर दिया डोनेट
बेहतर कार्यो को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाली गायनिक डॉ रीना गौतम कई बार रक्तदान कर चुकी हैं। डॉ रीना के अनुसार, कई साल पहले प्रसव के बाद एक प्रसूता की हालत बिगड़ गई थी। परिजन भी साथ नहीं थे और खून की तत्काल जरूरत थी। बाद में ऑपरेशन करते हुए डॉ रीना गौतम खुद रक्तदान कर दी थीं। यह भी पढ़ें-शहर में फैल रही गंदगी, कचरा फैलानों वालों के खिलाफ नहीं हो रहा ऑन स्पॉट फाइन

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