जिला अस्पताल से रैफर होने के बाद ड्राइवर के लिए भटकते हैं मरीज, दो एम्बुलेंस भी खराब

108 एम्बुलेंस का लेना पड़ता है सहारा

शहडोल। जिला अस्पताल से रैफर होने के बाद मरीज एम्बुलेंस के लिए अस्पताल प्रांगण में इधर से उधर भटकते रहते हैं। एम्बुलेंस के ड्राइवर वाहन छोड़कर इधर-घूमते रहते हैं। शनिवार को इसी प्रकार नजारा जिला अस्पताल में देखने को मिला जब एक मरीज को डॉक्टरों ने जबलपुर के लिए रैफर कर दिया लेकिन जब वह बाहर निकला तो एम्बुलेंस को खोजता रहा। काफी देर बाद जब 108 एम्बुलेंस का चालक आया तो फिर मरीज को जबलपुर लेकर गया।


नहीं सुधरी एम्बुलेंस
जिला अस्पताल में वर्तमान में चार एम्बुलेंस हैं लेकिन ड्राइवर मात्र तीन हैं। इसके अलावा दो एम्बुलेंस काफी समय से खराब पड़ी है लेकिन उसको बनवाया नहीं जा रहा है। ऐसे में मरीजों को 108 एम्बुलेंस का ही सहारा मिल पाता है। जिला अस्पताल में हर दिन आधा दर्जन से ज्यादा मरीज जबलपुर और रीवा के लिए रैफर किए जाते हैं। शनिवार को भोरी घाट धनोर के रामनरेश पाल के साले को मस्तिष्क बुखार नहीं उतरने के चलते उसे डॉक्टरों ने जबलपुर रैफर कर दिया। इसके बाद रामनरेश पाल एवं अन्य लोग अपने मरीज को लेकर जिला अस्पताल के प्रांगण में पहुंचे और एम्बुलेंस को खोजने लगे लेकिन चालक का पता नहीं चल रहा था। इस पर रामनरेश पाल आस-पास के लोगों से पूछताछ करते रहे। काफी देर बाद जब चालक आया तो मरीज को लेकर गया।

shubham singh Incharge
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