इस कॉलेज के छात्रों के साथ हो रहा खिलवाड़

बिना तकनीकी ज्ञान के तीन वर्ष से गढ़े जा रहे इंजीनियर

By: shivmangal singh

Published: 24 May 2018, 11:05 AM IST

शहडोल। तीन वर्ष बीत गए न तो लाइब्रेरी बनी औैर न ही वार्षिक कैलेण्डर तैयार हुआ। जब भी आवाज उठी तो आश्वासनों का झुनझुना पकड़ाकर उसे दबा दिया गया। पढ़ाई करने कालेज आने वाले छात्रों को भविष्य की चिंता सताई तो वह अपने हक के लिए लडऩा शुरु कर दिए। ऐसे तैसे तीन वर्ष बीत गए लेकिन व्यवस्थाएं जस की तस बनी रही। अब पहला बैच निकलने वाला है बिना तकनीकी ज्ञान के तैयार हो रहे इन इंजीनियरों को को कौैन प्लेसमेन्ट देगा कौैन पूछेगा यह सबसे बड़ा सवाल इनके सामने आ खड़ा हुआ हैै। जिसका जवाब न तो कालेज प्रबंधन के पास है और न ही स्वयं उन छात्रों के पास जो कि कालेज से निकलकर कैरियर बनाने कि दिशा में अपने कदम आगे बढ़ाएंगे।
न लैब है न पुस्तकालय
पालिटेक्निक भवन में तीन वर्ष से संचालित इंजीनियरिंग कालेज में माइनिंग व मैकेनिकल ब्रांच के छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इनके लिए कालेज प्रबंधन द्वारा न तो लैब की व्यवस्था की गई और न ही पुस्तकें उपलब्ध हो पाई। ऐसे में दोनो ब्रांच के लगभग ४५० छात्रों का भविष्य अंधकार मय नजर आ रहा है।
दिया धरना, फिर भी नहीं जागे
इंजीनियरिंग कालेज में हालात कुछ इस कदर बिगड़ गये थे कि छात्रों को सुविधाएं बहाल करने के लिए विरोध प्रदर्शन करने की नौबत आ गई। पढ़ाई के लिए कालेज पहुंचने वाले छात्रों को कालेज अव्यवस्थाओं के विरोध में जयस्तंभ में धरना प्रदर्शन करना पड़ा। इसके बाद भी उन्हे वह सुविधाएं मुहैया नहीं पाई जिसके लिए छात्रों ने यह लड़ाई लड़ी।
सिर्फ मिला आश्वासन
इंजीनियरिंग कालेज के छात्रों में अव्यवस्थाओं को लेकर जब भी आवाज उठाई है तो उन्हे आश्वासन के सिवा कुछ भी नहीं मिला। यहां तक कि राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय प्रबंधन ने छात्रों को आश्वस्त किया था कि शीघ्र ही फैकल्टी के साथ ही वार्षिक कैलेण्डर, लैब व पुस्तकों की समुचित व्यवस्थाएं मुहैया कराई जाएगी। इस आश्वासन को तीन माह से भी अधिक का समय बीतने को है और विवि प्रबंधन एक भी आश्वासन पर खरा नहीं उतर पाया।
ये है कमियां
1. अब तक नहीं बन पाया वार्षिक कैलेण्डर
2. जाब प्लेसमेन्ट के लिए कोई व्यवस्था नहीं
3. लैब का अभाव, पुस्ताकलय में नहीं है पुस्तकें
4. नियमिति फैकल्टी का अभाव
5. ट्रेनिंग के लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं
6. तकनीकी संसाधनों का अभाव
7. इंजीनियरिंग के छात्रों के डिजिटलाईजेशन के लिए संसाधनों का अभाव
8. बिना डायरेक्टर के संचालित हो रहा इंजीनियरिंग कालेज
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shivmangal singh
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