उद्योग, पेयजल, कुपोषण पर बात नहीं, राष्ट्रीय मुद्दों पर हो रही पार्टियों में दो-दो हाथ

उद्योग, पेयजल, कुपोषण पर बात नहीं, राष्ट्रीय मुद्दों पर हो रही पार्टियों में दो-दो हाथ

Shiv Mangal Singh | Publish: Sep, 11 2018 02:26:41 PM (IST) Shahdol, Madhya Pradesh, India

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी भी आदिवासी अस्मिता का एजेंडा लेकर चल रही, क्षेत्रीय मुद्दों को भूले जनप्रतिनिधि और पार्टियां, आदिवासी अंचल के हालात खराब

शहडोल (शुभम बघेल). संभाग की राजनीति में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के मुद्दे तो जेरे- बहस हैं लेकिन क्षेत्रीय मुद्दे और बुनियादी समस्याएं गायब हैं। स्थानीय मुद्दों पर न तो दोनों बड़ी पार्टियां बात कर रही हैं और न ही जनप्रतिनिधि और दिग्गज नेता सामने आ रहे हैं। उद्योग, पेयजल, कुपोषण और शिक्षा से जुड़ी सहित तमाम बुनियादी समस्याओं को छोड़ भाजपा और कांग्रेस पूरी तरह राष्ट्रीय और प्रदेश के मुद्दों पर फोकस है। स्थिति यह है कि क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर भाजपा और कांग्रेस ने केवल 15 से 20 फीसदी ही फोकस किया है। जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर न तो कभी प्रदर्शन किया गया है और न ही हाइकमान तक बात पहुंचाई गई है। संभाग के तीनों जिलों की आठ विधानसभा क्षेत्रों में तमाम बुनियादी समस्याएं हैं लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है। उधर जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता की वजह से किसी ने इसको लेकर सरकार को भी नहीं घेरा है। उधर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी भी आदिवासी अस्मिता का एजेंडा लेकर चल रही है।
भाजपा उपलब्धियां तो कांग्रेस गिना रही नाकामियां
क्षेत्रीय मुद्दों को छोड़ दोनों पार्टियां एक दूसरे की उपलब्धि और कमियों पर फोकस है। भाजपा शिवराज और मोदी की उपलब्धियां गिना रही हैं। उधर कांग्रेस सरकार की नाकामियां गिना रही हैं। दोनों पार्टियां क्षेत्र के बड़े बड़े मुद्दे और समस्याओं को लेकर पूरी तरह अंजान बनी हुई है।

यह हैं संभाग के बड़े मुद्दे और समस्याएं
उद्योग नहीं, हर साल पलायन
संभाग में बड़े उद्योगों की कमी है। गिनती के उद्योग संचालित हैं लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है। सरकार ने तमाम इंडस्ट्री शुरू करने की प्लानिंग की थी लेकिन संभाग में कॉलरी और तीन उद्योगों के अलावा कोई उद्योग नहीं है। हर साल संभाग से दस हजार से ज्यादा लोग रोजगार के लिए गुजरात, महाराष्ट्र दिल्ली और उप्र आते हैं।

कुपोषण और स्वास्थ्य सेवाएं
स्वास्थ्य सुविधाओं की हालात खराब हैं। कुपोषण चरम पर है। पैदा होते ही कुपोषित हो जातेे हैं। गर्भवती महिलाएं दम तोड़ रही हैं। 90 प्रतिशत गर्भवती एनीमिक हो जाती है। गांवों में अस्पताल हैं लेकिन 60 फीसदी से अस्पताल विजिटिंग डॉक्टर्स के भरोसे हैं। 2017- 2018 के आंकड़ों में 800 बच्चों की मौत और 50 से ज्यादा गर्भवती महिलाओं की मौत हुई है।


90 प्रतिशत स्कूलों में शिक्षकों की कमी
शिक्षा को लेकर भले ही तमाम प्रयास किया जा रहा हो लेकिन ग्रामीण अंचलों की स्कूलों के हालात अभी भी बदत्तर हैं। स्कूल भवन तो तैयार हैं लेकिन 90 फीसदी स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। कहीं लैब नहीं है तो कहीं खंडहर के बीच पढ़ाना पड़ रहा है। उधर आंगनबाडिय़ों में पहुंचने वाला पोषण बच्चों और गर्भवती माताओं तक नहीं पहुंचता है।


90 प्रतिशत स्कूलों में शिक्षकों की कमी
शिक्षा को लेकर भले ही तमाम प्रयास किया जा रहा हो लेकिन ग्रामीण अंचलों की स्कूलों के हालात अभी भी बदत्तर हैं। स्कूल भवन तो तैयार हैं लेकिन 90 फीसदी स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। कहीं लैब नहीं है तो कहीं खंडहर के बीच पढ़ाना पड़ रहा है। उधर आंगनबाडिय़ों में पहुंचने वाला पोषण बच्चों और गर्भवती माताओं तक नहीं पहुंचता है।


बदहाल सड़क, पेयजल का मुद्दा
संभाग में पेयजल और बदहाल सड़क भी एक बड़ा मुद्दा है। आने वाले समय में पेयजल समस्या से निपटने के लिए भी कोई प्रभावी प्लान नहीं है। शहडोल में कॉलरी का पानी सरफा से सप्लाई किया जाता है। सरफा से पानी न आने की स्थिति में कोई प्लान नहीं है। ग्रामीण अंचलों की बदहाल सड़कें हैं लेकिन पेंचवर्क कर पल्ला झाड़ लेते हैं।

राजनीतिक लोगों को हम अपनी आवाज , उम्मीदों और अपने क्षेत्रीय विकास के प्रतिनिधि मानते हैं, लेकिन अब यह केवल आदर्शवादी अवधारणा भर बन कर रह गई हैं। राष्ट्रीय मुद्दों को केन्द्र सरकार संज्ञान में लेती ही है।
मेघा पवार, समाजसेवी।

किसानों को छोटी-छोटी सब्सिडी बंदकर एकमुश्त राशि जारी करने की मांग कर रहे हैं। अभी तक अमल नहीं हुआ। जिले में कृषि महाविद्यालय की आवश्यकता है, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने गंभीरता नहीं दिखाई।
भानू प्रताप सिंह, किसान संघ।

जनप्रतिनिधि क्षेत्र की समस्याओं को लेकर अंजान हैं। जहां से चुनाव जीतते हैं, वहां के मुद्दों को भूल जाते हैं। मुद्दों पर फोकस करंे तो जनता को तो राहत मिलेगी ही दोबारा चुनाव जीतने के रास्ते भी खुल जाएंगे।
संतोष श्रीवास्तव, रिटा अधिकारी।

निचले स्तर का जीवन बेहद कष्टदायी है। आदिवासी परिवारों की स्थिति नहीं सुधरी है।जनप्रतिनिधि विकास की बात करते हैं। एक भी जनप्रतिनिधि ऐसा नहीं है जो क्षेत्र के मुद्दों को उठाए और हाइकमान तक पहुंचाए।
शबनम मौसी, पूर्व विधायक।

क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर भी समय-समय पर फोकस किया जाता है। क्षेत्र की समस्याओं के निराकरण के लिए हाइकमान तक बात पहुंचाई जाती है। उद्योग सहित कई बड़े मुद्दे हैं, जिन पर प्रयास किया जाएगा।
इन्द्रजीत छाबड़ा, जिलाध्यक्ष भाजपा

राष्ट्रीय मुद्दों के लिए हाईकमान से निर्देश आते हैं फिर भी पार्टी लगातार क्षेत्रीय मुद्दों पर काम कर रही है। सत्तापक्ष को भी रोजगार, कुपोषण और बुनियादी सुविधाओं पर फोकस करना चाहिए। क्षेत्र की समस्या पर प्राथमिकता हो।
अजय अवस्थी, प्रदेश महासचिव युकां

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