ईको टूरिज्म से विकसित करने की थी तैयारी, खनन के लिए खोद दिया आधा पहाड़

पिछले एक दशक से टूरिज्म में पहचान, पर्यटन हब बड़ी व छोटी तुम्मी में लगा रहे मशीनें
घुनघुटी व बांधवगढ़ से सटे होने की वजह से बाघ और कई विलुप्त हो रहे पक्षियों की प्रजातियां हैं मौजूद

By: Ramashankar mishra

Updated: 15 Sep 2021, 12:44 PM IST

शहडोल. वन्यजीवों के गढ़ किरर के साथ ही पर्यटन हब बड़ी और छोटी तुम्मी में माफिया बाघों के मूवमेंट के बीच खनन के लिए मशीनें उतार रहे हैं। पर्यटन हब, जंगल और जैव विविधता क्षेत्र होने के बावजूद अधिकारियों ने गठजोड़ करते हुए खनन और क्रशर के लिए अनुमति दे दी। पिछले दो साल के भीतर क्रशर के लिए आधा पहाड़ ही खोद दिया गया है। कई जगहों पर लीज से हटकर खनन कराते हुए गहरी खाइयां तैयार कर दी हैं। पिछले एक दशक से टूरिज्म को लेकर बड़ी और छोटी तुम्मी की अलग पहचान बन रही है। वन्यजीवों के मूवमेंट, पहाड़ी और घना जंगल होने की वजह से ईको टूरिज्म से भी विकसित करने का प्रयास किया जा रहा लेकिन माफिया पहाड़ों पर हैवी मशीनें लगाकर प्रकृति से छेड़छाड़ कर रहे हैं। जंगल का स्वरूप भी बदल रहा है। ऐसा भी नहीं है कि अधिकारियों के जानकारी में न हो। लगातार ग्रामीण शिकायत कर रहे हैं। अधिकारियों तक शिकायतें पहुंच रही हैं फिर भी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
8 टन सड़क पर हाइवा, घरों की दरक रहीं दीवारें
क्रशर और खनन गतिविधियां होने की वजह से बड़ी तुम्मी और छोटी तुम्मी की पहाड़ी में हैवी वाहन और मशीनें दौड़ रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस मार्ग में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क परियोजना की सड़कें हैं। जिनकी क्षमता 8 टन है लेकिन हैवी वाहन और हाइवा की आवाजाही के चलते लगातार सड़कें उखड़ रही हैं। इसी तरह माफिया पहाड़ी पर रात में ब्लास्टिंग भी कर रहे हैं। इसके चलते आसपास घरों की दीवारों पर भी दरारें आ रही हैं। स्कूल और आसपास क्षेत्रों में जलस्तर भी घट रहा है। ग्रामीणों ने भी क्रशर और खनन गतिविधियों को लेकर शिकायत की थी। ग्रामीणों का कहना था कि खनन गतिविधियां होने की वजह से सड़क ज्यादा समय तक नहीं सही रह पाती है। कुछ माह में ही उखडऩे लगती है।
पुराना जंगल, पर्यटन और वन्यजीवों से पहचान
बड़ी और छोटी तुम्मी गांव प्रकृति से घिरा है। यहां वन्यजीवों के मूवमेंट के साथ पुराना जंगल है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग और टूरिज्म बोर्ड ने इको पार्क तैयार किया था। यहां पहाड़ी से हरियाली के बीच उगते और ढलते सूरज को देखने हर दिन लोग पहुंचते हैं। इसके अलावा पूरे क्षेत्र में कई संकटापन्न वृक्षों के साथ विलुप्त हो रहे पक्षियों की प्रजातियां भी हैं।
इनका कहना है
इस संबंध में जानकारी नहीं थी। पर्यटन क्षेत्र और पुराने जंगलों में खनन गतिविधियां नहीं होने देंगे। पूर्व में अधिकारियों को भी निर्देशित किया जा चुका है कि नई अनुमतियां बिल्कुल नहीं दें। मैं खुद बड़ी-तुम्मी और छोटी तुम्मी जाऊंगा। ग्रामीणों की भी समस्याएं सुनेंगे।
राजीव शर्मा, कमिश्नर शहडोल।

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