मेडिकल कॉलेज में मरीजों को रेमडेसिविर न लगाकर दलाल और मेडिकल दुकानों में कर देते थे सप्लाई

मरीजों को लगने वाले रेमडेसिविर की मेडिकल कॉलेज से होती थी कालाबाजारी

By: amaresh singh

Updated: 11 May 2021, 09:17 PM IST

शहडोल. कोविड मरीजों के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले गिरोह का शहडोल पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह के मुखिया का सीधा कनेक्शन शासकीय मेडिकल कॉलेज शहडोल से मिला है। मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए दिए जाने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते हुए सीधे बाजार में सप्लाई कर दिया जाता था। इसमें मेडिकल कॉलेज के तीन कर्मचारियों की संलिप्तता मिली है। ये इंजेक्शन मेडिकल कॉलेज के नजदीक स्थित एक मेडिकल दुकान में सप्लाई कर दी जाती थी। यहां पर कोरोना मरीजों के लिए महंगे दामों में रेमडेसिविर इंजेक्शन बेची जाती थी। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद पुलिस खुद ग्राहक बनकर सुराग जुटाते हुए आरोपियों तक पहुंची और कालाबाजारी से जुड़े गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करने में सफल रही। आरोपियों में मेडिकल कॉलेज शहडोल की स्टाफ नर्स सुषमा साहू, लैब टेक्निशीयन दीपक गुप्ता पिता सीताराम गुप्ता निवासी कौडिया और उज्जवल द्विवेदी पिता धनीराम द्विवेदी निवासी चंदिया उमरिया के साथ अमित फार्म के संचालक अमित मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

स्टॉफ नर्स और लैब टेक्निशीयन करते थे बाहर सप्लाई
एसपी के अनुसार, रेमडेसिवर इंजेक्शन और ऑक्सीजन सिलेण्डर की कालाबजारी की शिकायत मिली थी कि मेडिकल कॉलेज में पदस्थ दीपक गुप्ता एवं उज्ज्वज द्विवेदी पास रेमेडेसिविर इन्जेक्शन बेचने के लिए रखे हैं। मेडिकल कॉलेज के नजदीक ही सौदा कर रहे हैं। एसपी ने एसआइटी बनाई। पुलिस टीम मरीज का परिजन बनकर पहुंची और सौदा शुरू कर दिया। भनक लगते ही आरोपी भागने लगे तभी पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की। इस दौरान उज्जवल द्विवेदी और दीपक गुप्ता के पास से दो रेमडेसिविर इंजेक्शन जब्त किया। आरोपियों के पास कोई रेकार्ड नहीं था। सख्ती से पूछताछ करने पर पता चला कि सुषमा साहू (मेडिकल कॉलेज स्टॉफ नर्स) देती थी। इसके बाद मेडिकल स्टोर संचालक अमित मिश्रा को इंजेक्शन की सप्लाई कर दी जाती थी।

गंभीर और मृत मरीजों के रेमडेसिविर में हेरफेर
पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि मेडिकल कॉलेज में पदस्थ तीनों आरोपी गंभीर कोरोना संक्रमित और मृत मरीजों के रेमडेसिविर में हेरफेर करती थी। गंभीर मरीजों के लिए पांच से छह डोज मिलते थे लेकिन कर्मचारियों द्वारा एक दो डोज दिया जाता था। बाकी का बाहर सौदा कर दिया जाता था।

आरोपियों का होगा एनएसए
पुलिस मरीजों के आवंटित रेमडेसिविर में हेरफेर करने वाले चारों आरोपियों के एनएसए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है। आरोपियो के विरूद्व धोखाधडी, मप्र ड्रग कन्ट्रोल एक्ट, मप्र आयुर्वेदिक अधिनियम, आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया है। कार्यवाही में डीएसपी सोनाली गुप्ता, निरीक्षक योगेन्द्र सिंह, एसआई सुभाष दुबे, एएसआई राकेश बागरी, एएसआई रजनीश तिवारी, अमित दीक्षित, निखिल श्रीवास्तव, हीरालाल, अजीत सिंहं, अभिषेक दीक्षित रहे।

14 रेमडेसिविर बेच चुके, 6 का कर रहे थे सौदा
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने बताया है कि अब तक 14 रेमडेसिविर इंजेक्शन की बाहर सप्लाई कर चुके हैं। ये मेडिकल कॉलेज से ही गायब किया गया था। इसके अलावा 6 इंजेक्शन अभी मेडिकल स्टोर संचालक से जब्त किए हैं।

मरीज की स्थिति देख कॉलेज में ही होता था सौदा
रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी से जुड़े इस गिरोह का नेटवर्क पूरे मेडिकल कॉलेज में था। अभीभी कई आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर है। बताया जा रहा है कि मरीज की स्थिति देख रेमडेसिविर का सौदा तय होता था। मेडिकल कॉलेज में ही दलाल सक्रिय थे। इसमें कर्मचारी खुद दलालों से मिलाते थे। मरीज की स्थिति अगर नाजुक होती थी तो ज्यादा वसूली की जाती थी। कुछ मरीजों से 10 तो कुछ मरीजों से 20 हजार रुपए वसूले है। कुछ मामलों में 40 हजार रुपए तक में खरीदने की बात सामने आ रही है।

कई जगहों से कनेक्शन, निजी अस्पतालों से भी जुड़े हैं तार
पुलिस की पूछताछ में कई तथ्य सामने आए हैं। पुलिस ने दवाइयों के थोक कारोबार से जुड़े एक बड़े व्यापारी को भी पूछताछ के लिए सोमवार की रात थाने लाई थी। इसके अलावा निजी अस्पताल के मालिक से भी पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक अमित के पास और भी कई नेटवर्क से रेमडेसिविर इंजेक्शन आती थी। इसके बाद यहां से सप्लाई भी की जाती थी। सवाल उठता है कि शहर में किस और माध्यम से इसके बाद रेमडेसिविर आती थी। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए निजी अस्पताल के साथ कई अधिकारी भी दहशत में हैं। पुलिस की पूछताछ में कई तथ्य सामने आ सकते हैं।
मरीजों के इलाज के लिए आवंटित रेमडेसिविर इंजेक्शन का कम डोज देकर हेरफेर करने का मुद्दा पत्रिका लगातार उठा रहा था। मेडिकल कॉलेज व निजी अस्पतालों के लिए पर्याप्त रेमडेसिविर, फिर भी कालाबाजारी और रेडक्रॉस को सिर्फ 42 रेमडेसिविर इंजेक्शन मिले, सात मरीजों में ही खड़े कर दिए हाथ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। जिसे संज्ञान में लेते हुए अधिकारियों ने सुराग जुटाते हुए कार्रवाईकी।
इनका कहना है
रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी की शिकायत लगातार मिल रही थी। टीम एक सप्ताह से इस पर काम कर रही थी और पूरे गिरोह पर नजर रखी हुई थी। मेडिकल कॉलेज के तीन कर्मचारियों के साथ एक मेडिकल स्टोर संचालक को पकड़ा है। पूछताछ की जा रही है। और लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
अवधेश गोस्वामी, एसपी शहडोल

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