बेहतर परीक्षा परिणाम के लिए कॉलेज में लगा रहे रेमेडियल कक्षाएं

महाविद्यालयों में अलग से कक्षाओं का संचालन

गुणवत्ता सुधार की दिशा में उच्च शिक्षा विभाग का प्रयास

By: Ramashankar mishra

Updated: 06 Jan 2020, 12:49 PM IST

शहडोल. महाविद्यालयीन छात्राओं की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधान के उद्देश्य से रेमेडियल कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। जिसमें छात्रों के स्लेबस के अनुसार प्राध्यापकों द्वारा अध्यापन कार्य कराया जा रहा है। जिससे कि इनके परीक्षा परिणाम में बेहतर सुधार हो सके। यह रेमेडियल कक्षाएं प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्रों के लिए संचालित की जा रही हैं। जिसमें प्राध्यापकों द्वारा छात्रों की अलग से तैयारी कराई जा रही है। यह रेमेडियल कक्षाएं जिला मुख्यालय स्थित शासकीय कन्या महाविद्यालय के साथ ही अन्य महाविद्यालयों में संचालित हो रही है।
अलग से लगती है कक्षाएं
उल्लेखनीय है कि सभी महाविद्यालयों में कक्षा संचालित करने के लिए समय सारणी निर्धारित की गई है। जिसके अनुसार कक्षाओं का संचालन किया जाता है। इसके बाद शेष समय में अलग से रेमेडियल कक्षाएं संचालित की जाती है। जिसमें प्राध्यापकों द्वारा कमजोर छात्रों को स्लेबस से संबंधित अलग से पढ़ाई कराई जाती है। जिससे कि उनके शैक्षणिक स्तर में सुधार हो सके। रेमेडियल कक्षा संचालित करने के क्या फायदे हैं इसका छात्रों को कितना लाभ मिल रहा है। इसका मूल्यांकन किया जाता है। जिसमें परीक्षा उपरांत परीक्षा परिणाम के आधार पर रेमेडियल कक्षाओं की उपलब्धि का आंकलन किया जाता है। इस मूल्यांकन से स्थिति स्पष्ट होती है कि छात्रों के शैक्षणिक स्तर में रेमेडियल कक्षाओं का क्या प्रभाव पड़ रहा है।
इनका कहना है
छात्रों के शैक्षणिक स्तर में सुधार के उद्देश्य से रेमेडियकल कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। यह कक्षाएं प्रतिदिन समय सारणी के बीच शेष समय में लगाई जाती है। परीक्षा उपरांत शैक्षणिक स्तर में होने वाले सुधार का आंकलन भी किया जाता है।
डॉ ऊषा नीलम प्राचार्य शासकीय कन्या महाविद्यालय शहडोल

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