Video Story: शहडोल पहुंचे 7 विदेशी डॉक्टर, आदिवासी बच्चों की जांच की तो सामने आई ये बीमारियां

आदिवासी बच्चों में पोषण की कमी और फ्लोराइड की अधिकता से खराब हो रहे दांत, आंखों में सूखापन
- बच्चों में विटामिन की कमी और टीबी देखने से बढ़ रहा चश्मे का नंबर
- यूएस से पहुंचे सात डॉक्टर, शहडोल में कैंप, ३५० लोगों को मिला इलाज

By: ajay gupta

Published: 02 Jan 2020, 07:51 PM IST

Shahdol, Shahdol, Madhya Pradesh, India

आदिवासी बच्चों में पोषण की कमी और फ्लोराइड की अधिकता से खराब हो रहे दांत, आंखों में सूखापन
- बच्चों में विटामिन की कमी और टीबी देखने से बढ़ रहा चश्मे का नंबर
- यूएस से पहुंचे सात डॉक्टर, शहडोल में कैंप, ३५० लोगों को मिला इलाज
शहडोल. फ्लोराइड की कमी और अधिकता के अलावा पोषण में कमी से आदिवासी बच्चों में दांत और आंखों की बीमारी हो रही है। यूएस से पहुंचे सात डॉक्टरों की टीम ने शहडोल के अलग- अलग जगहों में पहुंचकर जांच की। यहां ७० फीसदी से ज्यादा आदिवासी बच्चों के दांत खराब मिले। जबकि आंखों में भी सूखापन की बीमारी मिली। डॉक्टरों के अनुसार, न्यूट्रिशियन की कमी और फ्लोराइड की अधिकता व कमी से बच्चे आंख और दांतों की बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। न्यूट्रिशियन की कमी से बच्चों की आंखों में विजन की भी दिक्कतें पाई गई। दरअसल आंखों और दांतों के लिए नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया। इसमें विदेश से आए सात डॉक्टरों की टीम ने ३५० लोगों के आंखों और दांतों की जांच कर इलाज किया। इस दौरान यह बात सामने आई कि बच्चों की आंखों में समस्या बढऩे का कारण विटामीन की कमी, टीबी ज्यादा देर तक देखना और मोबाइल का अधिक उपयोग करना है। डॉक्टरों के अनुसार, दांतों में समस्या का कारण पानी और अच्छी तरीके से ब्रश नहीं करना है। संयोजक विजय दुबे एवं डॉ रोहित दुबे ने बताया कि शिविर में १३० लोगों की आंखों की जांच करने के बाद चश्मा दिया गया। इसके बाद सर्व ब्राह्मण समाज की मदद से प्रेरणा फांउडेशन के दिव्यांग बच्चों के आंखों और दांतों का इलाज कराया गया। इससे पहले बुधवार को विदेश से शहडोल पहुंचे सात डॉक्टरों की टीम ने दो स्कूलों में ३०० बच्चों के आंखों और दांतों की जांच कर इलाज किया गया। इसमें ९० बच्चों की आंखों में ज्यादा समस्या मिली। यहां बच्चों को उन्हें चश्मा दिया गया।
बच्चों में ये मिली कमियां
- बच्चों में न्यूट्रिशियन की कमी।
- पानी में फ्लोराइड की अधिकता और कमी।
- खानपान में अनदेखी से बच्चों की जनरल ग्रोथ न होना।
- ब्रश का तरीका सही न होने से दांतों में बीमारियां।
- आंखों में सूखापन।
बच्चों में न्यूट्रिशन की कमी देखने को मिली है। पानी में भी फ्लोराइड की अधिकता और कमी से बच्चों में दांतों की बीमारी हो रही है। मुह के माध्यम से कई बीमारियां बच्चों के भीतर तक जा रही हैं। ब्रश करने का तरीका भी सही नहीं है। मुंह साफ न होने से अन्य बीमारियां भी बच्चों को अपनी चपेट में ले रही हैं। आंखों में भी विजन की दिक्कतें मिली हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह पूरा न्यूट्रिशन न मिलने के अलावा टीबी और मोबाइल भी है।
डॉ नीता शुक्ला, चिकित्सक
न्यू मैक्सिको

Patrika
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