अद्भुत है शिवमंदिर, एक-एक पत्थर से गढ़ीं है यहां की दीवारें

नागदेवता की बामियों से घिरा था शिवलिंग

शहडोल. नगर की बूढ़ी माता मंदिर स्थित भगवान शिव का मंदिर बहुत ही अद्भुत व प्राचीन है। ऐसी मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ के दरबार में उनके गण नागदेवता का आना जाना हमेशा बना रहता है। यहां तक श्रावण मास में हर दिन इन गणों की मौजूदगी आम बात है। इस मंदिर की खासियत यह भी है कि यहां की दीवारें व पिल्लर एक ही पत्थर को गढ़कर बनाई गई है। जिसके चलते यह अपने आप में अनूठा है। कुछ वर्ष पहले इसके गुंबद का कुछ हिस्सा गिर जाने की वजह से इसके बाहरी गुम्बल के हिस्से का नवीनीकरण किया गया है। फिर भी गुंबद के अवशेष मंदिर के चारो तरफ पड़े हैं। जिसमें पत्थरों में टंकी कई प्रतिमाएं अभी भी विद्यमान हैं जो कि मंदिर की भव्यता व प्राचीनता को प्रदर्शित करती है।
नागदेवता के होते हैं दर्शन
मंदिर में भगवान भोलेनाथ के गण नागदवेता के दर्शन सहज ही हो जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि मंदिर के कायाकल्प के पहले शिवलिंग के चारो तरफ नागदेवताओं की बामियां थी। जिनमें से नागदेवती निकलकर भगवान भोलेनाथ के इर्द-गिर्द घूमते रहते थे। मान्यता यह भी नागदेवता का जोड़ा यहां अक्सर दिखाई देता था। मंदिर के पुजारी नर्वदा प्रसाद की माने तो श्रावण मास में यहां प्रतिदिन नागदेवता दिखाई देते हैं।
बावली में मिलता था जल
मंदिर के पुजारी नर्वदा प्रसाद ने बताया कि मंदिर के समीप ही एक बावली थी। शिवलिंग में जो जल चढ़ाया जाता था। वह इसी बावली में जाकर मिलता था। बावली व मंदिर की दीवार के बीच में एक बामी थी। जिसमें नागदेवता का निवास था जिनके दर्शन अक्सर होते थे। हालांकि अब यह बावली गुंबद के मलवे के बीच दब गई है।
निकलता है गंधक जल
मंदिर परिसर की एक खासियत यह भी है कि यहां कहीं भी खुदाई की जाए तो गंधक या फिर गंधक युक्त जल निकलता है। यह जल चर्मरोग व गैस की बीमारी के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। इसी उपलब्धता एक स्थान पर नहीं बल्कि पूरी मंदिर परिसर में कहीं भी खुदाई करने पर पाया जाता है।

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Ramashankar mishra
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