संदेह के घेरे में बड़े अधिकारी, बेटे और रिश्तेदारों के नाम कर ली हैं नियुक्तियां

10 फरवरी के भीतर मांगी थी रिपोर्ट, एक सप्ताह बीता, अधिकारियों ने नहीं दी नियुक्ति की रिपोर्ट

By: shubham singh

Published: 18 Feb 2020, 09:06 PM IST

शहडोल। स्वास्थ्य विभाग अनूपपुर में मलेरिया विभाग के अलग- अलग पदों पर हुई भर्ती में गड़बड़ी के बाद अब दस्तावेजों को दबाने के साथ हेरफेर किया जा रहा है। जांच टीम ने सीएमएचओ अनूपपुर से 10 फरवरी के भीतर पूरे दस्तावेज मांगे थे लेकिन एक सप्ताह का समय बीतने के बाद भी रिकार्ड नहीं दिया गया है। अधिकारियों ने मूल दस्तावेजों की फाइल ही दबा ली है। जांच टीम को सिर्फ फोटोकापी रिकार्ड भेजा है। जबकि 7 फरवरी को जांच अधिकारी ने सीएमएचओ अनूपपुर बीडी सोनवानी को पत्र लिखकर 10 फरवरी तक चयन प्रक्रिया से जुड़ी मूल दस्तावेजों की फाइल मांगी थी। मामले में अब कई बड़े अधिकारियों की भूमिका भी सामने आ रही है। जांच टीम ने सीएमएचओ से दोबारा मूल दस्तावेजों की फाइल मांगी है। जांच रिपोर्ट की समय - सीमा एक सप्ताह का समय बीतने के बाद भी पूरी न होने पर अब कई अधिकारियों पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं। गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग अनूपपुर में कई पदों पर भर्तियां हुई थी। इसमें अधिकारी- कर्मचारियों ने अपने बेटे और रिश्तेदारों की ही नियुक्तियां कर ली थी। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, चयन समिति के सदस्यों ने अपने बेटों की भी भर्तियां कर ली थी। पत्रिका ने लगातार स्वास्थ्य विभाग की इस गड़बड़ी को मुद्दा बनाते हुए खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसे संज्ञान में लेते हुए कमिश्नर कलेक्टर ने जांच बैठाई है।


देरी करने से प्रभावित होगी जांच रिपोर्ट
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जांच प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों के पास पहले से नियुक्तियां प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की मूल फाइल है। इसके बाद भी अधिकारियों द्वारा रिकार्ड नहीं दिया जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो देरी से जांच रिपोर्ट आने से जांच को काफी प्रभावित किया जा सकता है।


सवाल: नोटशीट के बाद भी कैसे हुई चूक
मामले की नोटशीट सीएमएचओ कार्यालय से चली थी। इसके पूर्व जिला मलेरिया अधिकारी के पास से भी नोट शीट आगे बढ़ाई गई थी लेकिन डीएमओ को नोटशीट कलेक्टर की प्रक्रिया के बाद वापस नहीं मिली थी। इसके लिए डीएमओ ने दो बार पत्र कलेक्टर और जांच समिति को पत्र भी लिख चुके थे। अनुमोदन के लिए कलेक्टर के पास भी फाइल गई थी। नोटशीट लौटने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी की गई लेकिन अधिकारियों ने संज्ञान ही नहीं लिया। मामले में बड़े अधिकारियों के साथ रसूखदार नेताओं का भी हस्तक्षेप है।

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