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उम्र बढ़ते ही लुंज पड़ जाते हैं बच्चों के शरीर के अंग, पोलियो से मिलते-जुलते मिल रहे लक्षण

आदिवासी इलाकों में शून्य से 15 वर्ष तक के बच्चों में मिल रही एएफपी की बीमारी

लुंज-पुंज हो जाते हैं शरीर के अंग, चार साल में 63 बच्चों में सामने आई बीमारी

शाहडोल

Published: October 29, 2021 09:49:03 pm


शुभम बघेल@ शहडोल.

देश को भले ही पोलियो मुक्त घोषित किया जा चुका है लेकिन आदिवासी इलाकों में अभी भी पोलियो से मिलती-जुलती बीमारी के लक्षण मिल रहे हैं। उम्र बढ़ते ही बच्चों के शरीर के अंग लुंज पड़ जाते हैं। शहडोल जिले में पिछले चार साल के भीतर 63 बच्चों में इस तरह के मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग इसे एएफपी (एक्विट फ्लीड पैरालिसिस) लुंज लकवा की बीमारी मान रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, शून्य से लेकर 15 वर्ष तक के बच्चों में एक्विट फ्लीड पैरालाइसिस के मामले सामने आ रहे हैं। बच्चों के पैर-हाथ के अलावा गर्दन, मुंह और स्पाइनल बोन में ये बीमारी मिल रही है। इससे शरीर का अंग पूरी तरह लुंजपुंज हो जाता है और काम करना बंद कर देता है।
symptoms similar to polio in chindren
children's Treatment
चार लक्षण: हाथ-पैर, चेहरे और रीढ़ की नसें प्रभावित
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, एक्विट फ्लीड पैरालिसिस को चार हिस्सों में बांटा है। इसमें गीयान बारे सिंड्रोम, ट्रांसवर्स माइलाइटिस, ट्रामेटिक न्यूरिटिस, ट्रांसियंट पैरालिसिस, फेसिअल पाल्सी शामिल है। गीयान बारे सिंड्रोम में हाथ और शरीर के ऊपर के अंग प्रभावित होते हैं। नसों के खराब होने से लकवा की शिकायत आने लगती हैं। ट्रांसवर्स माइलाइटिस (रीढ़ की हड्डी में सूजन) बन जाती है। रीढ़ की हड्डी की नसें पूरे शरीर में संदेश नहीं भेज पाती हैं। ट्रामेटिक न्यूरिटिस में प्रसव या इसके बाद चोट लगने से शरीर का हिस्सा काम करना बंद कर देता है। ट्रांसियंट पैरालिसिस नसों में नुकसान की वजह से लुंज हो जाती हैं। रीढ़ की हड्डी में सबसे ज्यादा नुकसान होता है। फेसिअल पाल्सी में चेहरे के अंग प्रभावित होते हैं। चेहरे के एक ओर का बड़ा हिस्सा काम करना बंद कर देता है।

पोलियो का ज्यादा खतरा, एक लाख में एक केस
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बताते हैं, बच्चों में एक्विट फ्लीड पैरालिसिस के मामले शहर और ग्रामीण अंचलों में लगातार सामने आ रहे हैं। इसमें शरीर के अंग लुंजपुंज हो जाते हैं। एएफपी के कम केस देश में मिलते हैं। एक लाख लोग में एक केस मिल सकता है लेकिन शहडोल के आदिवासी इलाकों में लगातार मिल रहे केस से स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है और सैंपलिंग कर मुंबई लैब भेज रहे हंै। 2021 में पिछले 10 माह पर नजर डालें तो 24 बच्चे एक्विट फ्लीड पैरालाइसिस की चपेट में मिले हैं।

शहर और गांवों में टीम, इस वर्ष सबसे ज्यादा केस
पिछले चार वर्षों के रेकार्ड के अनुसार, इस वर्ष सबसे ज्यादा एक्विट फ्लीड पैरालाइसिस के केस बच्चों में देखने को मिले हैं। 2021 में 24 नए केस सामने आए हैं। जबकि 2020 में 10 और 2019 में 19 केस मिले थे। 2019 में 19 बच्चों में एएफपी मिलने के बाद लगातार स्वास्थ्य विभाग गंभीरता दिखा रहा है। सीएससी सेंटर के अलावा पीड्रियाटिक सेंटर और निजी अस्पतालों से सैंपलिंग कर रही है। जिला टीकाकरण टीम ने सैंपलिंग बढ़ाई है। इसके चलते इस वर्ष नॉन पोलियो एएफपी रेट भी बढ़ा है। पिछले चार वर्षो मेंं नॉन पोलियो एएफपी रेट 3 से नीचे था। इस वर्ष 5 प्रतिशत के पार हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इसे अच्छी स्थिति बता रहे हैं।

एक्सपर्ट व्यू: टोना-टोटका में परिवार, मैदानी अमले को दें ट्रेनिंग
एनएचएम के एमजीसीए और चाइल्ड हेल्थ में लंबे समय से काम कर रहे रमेश पांडेय बताते हैं, फील्ड में आदिवासी बच्चों में ज्यादा एक्विट फ्लीड पैरालिसिस केस सामने आ रहे हैं। प्रारंभिक चिंहाकन तत्काल हो जाए तो इलाज संभव है। देरी होने पर खतरा बढ़ जाता है। गांवों में परिवार जागरूक नहीं है। बीमारी के बाद झाडफ़ूंक में लग जाते हैं। मैदानी अमले को भी ऐसे केस की ट्रेसिंग की ट्रेनिंग देनी चाहिए।

ब्लॉक एएफसी केस नान पोलियो एएफसी केस
2018 2019 2020 2021 2018 2019 2020 2021
ब्यौहारी 06 13 04 03 6.92 13.37 4.4 2.66
बुढ़ार 01 01 05 05 0.82 0.8 3.9 4.73
गोहपारू 01 01 01 05 1.97 1.89 1.87 11.34
जैसिंहनगर 01 03 -- 04 1.21 3.5 -- 4.17
सोहागपुर 01 01 -- 07 0.79 0.77 -- 5.48
कुल 10 19 10 24 2.13 3.72 2.03 5.17
गीयान बारे सिंड्रोम - 10
ट्रांसवर्स माइलाइटिस - 07
ट्रामेटिक न्यूरिटिस - 03
ट्रांसियंट पैरालिसिस - 06
फेसिअल पाल्सी - 03
अन्य - 36

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक लेंगे। एएफसी केस बढ़ रहे हैं तो गांव-गांव टीम भेजेंगे। सैंपलिंग बढ़ाएंगे। जरूरत पडऩे पर बच्चों को बाहर भेजकर भी इलाज कराया जाएगा।
राजीव शर्मा, कमिश्नर शहडोल
एएफसी से जुड़े मामलों की समीक्षा की जाएगी। सीएचसी और पीड्रियाटिक सेंटरों में लगातार ऐसे बच्चों को स्वास्थ्य विभाग ट्रेस कर रहा है। इलाज कराया जा रहा है।
डॉ एमएस सागर, सीएमएचओ

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