बड़े-बुजुर्गों की प्रेरणा से शिक्षकों को मिला राष्ट्रपति पुरस्कार

शिक्षक दिवस पर विशेष-जिले के राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों ने बदली अपनी दिनचर्या, सद्कर्मों से दूसरों के लिए बन रहे प्रेरणास्त्रोत

By: brijesh sirmour

Published: 05 Sep 2019, 07:00 AM IST

शहडोल. हर व्यक्ति के जीवन में शिक्षक का महत्वपूर्ण स्थान होता है। पूर्व काल से लेकर वर्तमान समय तक समाज में शिक्षकों को विशेष स्थान दिया गया है। शिक्षकों ने कई लोगों को पढ़ाया और उन्हें उनके मुकाम तक पहुँचाया है, लेकिन कुछ शिक्षक ऐसे भी होते हैं, जिन्होने अपने जीवन में नि:स्वार्थ भावना से विद्या की सेवा करके एक बेहतर मुकाम हासिल किया है। उनकी इस सफलता पर कहीं न कहीं बड़े-बुजुर्गों की प्रेरणा रहती है। शिक्षक दिवस पर हम आपको को जिले के राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त उनक शिक्षकों से परिचित करा रहे है, जिन्होने अपने जीवन की नियमित दिनचर्या से दूसरों के लिए प्रेरणास्त्रोत बने हुए है।
पति की प्रेरणा से पत्नी को भी मिला राष्ट्रपति पुरस्कार
संभागीय मुख्यालय में निवासरत सेवानिवृत्त शिक्षक एनडी सोनवानी को जब वर्ष २००९ में राष्ट्रपति शिक्षक का पुरस्कार मिला। तब उनकी पत्नी गीता सोनवानी ने भी राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए शिक्षा के उत्कृष्ट कार्यों को अपनाना शुरू कर दिया, तो उन्हे भी दो साल बाद वर्ष २०११ के लिए राष्ट्रपति शिक्षक का पुरस्कार मिल गया। इसके बाद पति-पत्नी ने अपनी नियमित दिनचर्या से समाज के समक्ष एक अनुपम उदाहरण बने हुए है। सेवानिवृत्ति के बाद एनडी सोनवानी ने गरीब विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा देने की ठानी है। वहीं उनकी पत्नी गीता सोनवानी आदिवासी लोक संगीत को राष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाने में जुटी हुई है।
स्काउटिंग को माना जीवन का आदर्श
वर्ष २००० के लिए राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाले सेवा निवृत्त शिक्षक ६९ वर्षीय नंदन श्रीवास्तव ने अपने जीवन में स्काउटिंग को अपना आदर्श बनाया है। वह स्काउंटिंग के राष्ट्रीय प्रशिक्षक के रूप में आज भी सक्रिय है। साथ ही वह सडक़ सुरक्षा कार्यक्रम में अपनी सक्रिय भूमिका का निर्वहन करते चले आ रहे हैं। वह बच्चों के बीच नंदन सर के रूप में काफी लोकप्रिय हैं।
समाज सेवा को बनाया जीवन ध्येय
वर्ष २०१२ के लिए राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाले उत्कृष्ट विद्यालय में पदस्थ शिक्षक लालजी तिवारी ने अपने जीवन का ध्येय समाज सेवा को बनाया। उन्होने अपने जीवन में सात रक्तदान किया है और दूसरों को रक्त दान के लिए हमेशा प्रेरित करते रहते हैं। जिले में गाजर घास उन्मूलन में उन्होने अपना अमूल्य योगदान दिया है। वह जल संरक्षण के लिए दूसरों को प्रेरित कर रहे हैं।
धार्मिक कार्यों में रहते हैं अग्र्रणी
शासकीय माध्यमिक विद्यालय धुरवार में पदस्थ वर्ष २०११ के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक अरूण मिश्रा धार्मिक कार्यों में काफी बढ़-चढक़र भाग लेते हैं। उनकी रूचि भगवान के भजनों के गायन में ज्यादा रहती है। उन्होने शिक्षक सम्मान में प्राप्त २५ हजार रुपए की राशि को गांव के पुराने पूजा स्थल के निर्माण के लिए दिया था और तीन लाख रुपए देकर दुर्गा-शिव मंच का निर्माण कराया।
योग को अपनाया तो सुखमय हुआ जीवन
वर्ष २०१६ के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक राजेन्द्र शर्मा ने अपने जीवन में योग को अपनाया तो उनका जीवन सुखमय हो गया। उन्होने सेवा कार्य की प्रेरणा अपने पिता स्व.रामावतार शर्मा व बड़े भाई कृष्णकांत शर्मा से ली। उनके जीवन को संवारने में योग का विशेष योगदान रहा है। योग से उनका साहस बढ़ा है और नकारात्मक भाव दूर हुए है। वह नियमित रूप से योग की कक्षाएं लगाते हैं और लोगों में सकारात्मक उर्जा का संचार कर रहे हैं।

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