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प्राचीन काल से रहा तालाबों का इतिहास, पहले सहेज नहीं पाए अब पांच हजार नए तालाब बनाएगी सरकार

तालाबों का खत्म कर दिया कैचमेंट एरिया, बारिश का पानी भी नहीं नहीं हो रहा संग्रह

शाहडोल

Published: April 26, 2022 09:06:40 pm

कल्चुरी कालीन तालाबों के अस्तित्व पर संकट, प्रदेश में पांच हजार नए तालाब बनाने की तैयारी
- शहडोल की 365 तालाबों से थी पहचान, श्रृंखला में जुड़े थे तालाब, सीधे नदियों में पहुंचता था पानी
शहडोल. मध्यप्रदेश में अमृत सरोवर योजना से एक साल में पांच हजार नए तालाब बनाने की तैयारी है। जबकि सैकड़ों प्राचीन तालाब अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। शहडोल संभाग के तालाबों की अनदेखी इस कदर हुई कि अब उनकी पहचान पर ही संकट खड़ा हो गया है। संभाग में कई तालाब कल्चुरी कालीन है। जिनका ऐतिहासिक के साथ धार्मिक महत्व भी है। अनदेखी व लापरवाही का शिकार हुए यह तालाब अब धीरे-धीरे समाप्त होते जा रहे हैं। इन कल्चुरी कालीन तालाबो में सिंहपुर का रजहा तालाब, ऐंंताझर के दो तालाब, और अंतरा स्थित तालाब भी शामिल है। इनका क्षेत्रफल दिन व दिन सिकुड़ता जा रहा है। क्षमता के अनुरूप जलभराव भी नहीं हो रहा है। ऐेसी स्थिति में तालाब पहचान खोते जा रहे हैं।
प्राचीन काल से रहा तालाबों का इतिहास, पहले सहेज नहीं पाए अब पांच हजार नए तालाब बनाएगी सरकार
प्राचीन काल से रहा तालाबों का इतिहास, पहले सहेज नहीं पाए अब पांच हजार नए तालाब बनाएगी सरकार
कैचमेंट एरिया खत्म़, सूख गए किनारे
15 किमी दूर सिंहपुर स्थिति ऐतिहासिक रजहा तालाब का प्राचीन पहचान के साथ धार्मिक महत्व भी है। सिंहपुर माता मंदिर के ठीक सामने स्थित तालाब कि कुछ वर्ष पहले सफाई कराने के साथ ही लगभग 85 लाख रुपए खर्च किए थे। ग्रामीण बताते हैं, उम्मीद थी कि यह एक बार फिर से जीवंत हो जाएगा, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। कैचमेंट एरिया व मेढ़ बंधान में बरती लापरवाही के चलते उम्मीदों पर पानी फिर गया। जहां-जहां से कैचमेंट एरिया बनाया गया है उसके आस-पास की मिट्टी धसकने लगी। यहां तक कि एक किनारे की पाइप लाइन पूरी तरह से टूट गई है और पूरी मिट्टी बह गई है। तेज बारिश हुई तो पूरी मेढ़ का कटाव हो जाएगा। अन्य कैचमेंट एरिया के किनारे से भी मिट्टी धसकने लगी है।
ऐतिहासिक तालाब: कभी नहीं सूखता था पानी, चार गांव से आते थे मवेशी
सिंहपुर से लगे ऐंताझर में भी दो ऐसे ऐतिहासिक तालाब है जिनका पानी कभी नहीं सूखता था। इन तालाबों का पानी पीने चार गांव के मवेशी आते थे साथ ही ग्रामीण दैनिक उपयोग के लिए इसके पानी का उपयोग करते थे। यहां स्थिति दो तालाबो में से एक पूरी जरह से सूख गया है और दूसरा सूखने की कगार पर पहुंच गया है। स्थानीय रहवासी बताते हैं कि पांच वर्ष पहले तक दोनों तालाबों में गर्मी के दिनों में भी लबालब पानी भरा रहता था। कुछ वर्षों से एक तालाब गर्मी के पहले ही सूख जाता है और दूसरे में नाममात्र का ही पानी बचता है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश का पानी तालाबों में एकत्रित नहीं हो पाता है। पहाड़ी क्षेत्रों का जो पानी इसमें एकत्रित होता था वह भी रुक गया है। वहीं तालाबों की सफाई व बंधान न होने की वजह से पानी नहीं रुक पाता है। जलस्त्रोत भी समाप्त हो गए हैं।
दशकों पुराना इतिहास, सिकुड़ते जा रहे तालाब
जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर अंतरा स्थित मां कंकाली मंदिर के बगल में स्थित तालाब का इतिहास बहुत पुराना है। यह तालाब कल्चुरी कालीन है। जिसके संरक्षण की विशेष जरूरत है। कुछ वर्ष पूर्व इसकी सफाई व संरक्षण को लेकर कार्य किया गया था लेकिन वह कम है। तालाब में जलभराव तो है लेकिन धीरे-धीरे यह सिकुड़ता जा रहा है। समय रहते इसका संरक्षण न किया गया तो यह भी अस्तित्व खो देगा।
मध्यप्रदेश के इन जिलों में बनेंगे पांच हजार तालाब
अमृत सरोवर जबलपुर एवं मुरैना में 237-237, धार में 192, सिवनी में 140, रीवा में 137, नर्मदापुरम में 132, राजगढ़ में 120, छिंदवाड़ा में 124, खरगोन में 116, सागर में 111, अलीराजपुर में 110, सीहोर एवं सिंगरौली जिले में 106-106 तालाब बनाए जाएंगे। अशोकनगर, भिण्ड, डिण्डोरी, कटनी और मण्डला जिले में 105-105, सीधी में 104, आगर-मालवा में 71, अनूपपुर, बुरहानपुर, छतरपुर, शाजापुर एवं विदिशा में 100-100 तालाब बनेंगे। बालाघाट में 112, बड़वानी में 90 अमृत सरोवर बनेंगे। इसी तरह बैतूल में 95, भोपाल में 45, दमोह में 83, दतिया में 92, देवास में 94, गुना में 84, ग्वालियर में 81, इंदौर में 45, झाबुआ में 102, खण्डवा में 93, मंदसौर में 75, नरसिंहपुर में 68, नीमच में 102, पन्ना में 85, रायसेन में 90, रतलाम में 85, सतना में 78, शहडोल में 76, श्योपुर में 93, शिवपुरी में 81, टीकमगढ़ में 76, उज्जैन में 72 और उमरिया जिले में 84 अमृत सरोवर बनेंगे।
लिंक थे सभी तालाब, 365 का इतिहास, अब सिर्फ 60 बचे
शहडोल में 365 तालाबों का इतिहास रहा है लेकिन 60 से 70 तालाब ही बचे हैं। शहडोल में दशकों पहले तालाबों की श्रृंखला थी। पौनांग तालाब सहित कई प्राचीन तालाबों का एक साथ समूह था। सभी तालाब आपस में लिंक थे। इसके बाद यहां का पानी शहर की लाइफ लाइन मुडऩा नदी में पहुंचता था।
तालाबों के सूखने की बड़ी वजह
- तालाबों का कैचमेंट एरिया खत्म कर अतिक्रमण।
- तालाबों में बड़ी मात्रा में मछली पालन।
- जलीय पौधे व जीवजन्तुओं का नष्ट होना।
- बारिश का जल सहेजने कोई प्रयास नहीं।
एक्सपर्ट व्यू:
जल संरक्षण की दिशा में काम कर रहे सेवानिवृत्त अधिकारी महेन्द्र शुक्ला बताते हैं, पानी की आवक बंद हो गई है। कैंचमेंट एरिया बनाकर तालाबों को संरक्षित कर सकते हैं। वर्षा जल प्रबंधन से भी तालाबों को जान मिलेगी। अतिक्रमण रोकना होगा। तालाबों को रेकार्ड में भी दर्ज करना होगा।
तालाबों को संरक्षित करने कार्ययोजना बनाई है। पुराने तालाबों पर भी काम करेंगे। पहचान बनाएंगे।
राजीव शर्मा, कमिश्नर

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