गणित में बेहद कमजोर हैं यहां के बच्चे, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

गणित में बेहद कमजोर हैं यहां के बच्चे, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

shivmangal singh | Publish: Feb, 15 2018 02:06:31 PM (IST) | Updated: Feb, 15 2018 05:45:44 PM (IST) Shahdol, Madhya Pradesh, India

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शहडोल- साल 2017 में प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे परीक्षण परीक्षा का आयोजन किया गया था। जिसका उद्देश्य छात्रों की उपलब्धियों का आकलन था। इस परीक्षा के परिणाम ने जिले की प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों के शैक्षणिक स्तर की पोल खोलकर रख दी है। उल्लेखनीय है कि 13 नवम्बर 2017 को एनएएस की परीक्षा आयोजित की गई थी। जिसमें कक्षा ३ के 692, कक्षा 5 के 765 व कक्षा 8 के 1315 छात्रों ने परीक्षा दी थी। जिसमें कक्षा 3 व 5 के तीन विषयों व कक्षा 8 की 4 विषयों की परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा उपरांत मूल्यांकन के बाद हाल में प्रदेश स्तर पर रैंकिंग तैयार करने के बाद जिला शिक्षा केन्द्र को परिणाम भेजे गए हैं। जिसमें प्रदेश स्तर पर शहडोल की 10वीं रैंक है। इसी से आकलन किया जा सकता है कि जिले के शासकीय विद्यालयों का शैक्षणिक स्तर कहां जा रहा है।

समीक्षा हुई, अब बनेगी कार्य योजना
एनएएस 2017 के परीक्षा परिणाम आने के बाद गत दिवस डाइट में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जिसमें कमजोर स्कूलों और विषयों को लेकर विधिवत चर्चा की गई। साथ ही आगामी कार्य योजना तैयार की जा रही है। जिससे कि आने वाले दिनो में कमजोर विद्यालयों व विषयों को मजबूत करने के लिये सार्थक कदम उठाये जा सकें।

संतोषजनक नहीं हैं आठवीं के परिणाम
एनएएस परीक्षा 2017 के जो परिणाम आये हैं उसमें कक्षा 8 वीं के परिणाम सबसे निराशा जनक रहे हैं। कक्षा ३ व ५ के स्तर की तुलना में कक्षा 8 के परिणाम नगण्य है। बढ़ती हुई कक्षाओं के साथ घटे हुये परिणाम चिंता का विषय है। जिसमें कहीं न कहीं सुधार की आवश्यक्ता महसूस की जा रही है। एनएएस परीक्षा के जो परिणाम है वह साफ तौर पर जाहिर कर रहे हैं कि नींव कमजोर हैं।

जानिए परीक्षा परिणाम
कक्षा 3
विषय
ईव्हीएस- 68.16
हिन्दी- 74.48
गणित- 65.32

कक्षा 5
ईव्हीएस- 62.68
हिन्दी- 60.22
गणित- 57.57

कक्षा 8
हिन्दी- 55.93
गणित- 40.00
विज्ञान- 44.47
सामाजिक विज्ञान- 44.74

गणित के शिक्षकों का अभाव
कक्षा 3, 5 व 8 के जो परिणाम हैं वह साफ तौर पर स्पष्ट कर रहे हैं कि गणित के मामले में छात्र काफी कमजोर है। जिसकी एक प्रमुख वजह यह भी बताई जा रही है कि माध्यमकि विद्यालयों में गणित के शिक्षकों का अभाव है। ऐसी स्थिति में वैकल्पित व्यवस्था के आधार पर अध्यापन कार्य कराया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि तीनो कक्षाओं के परीक्षा परिणाम में गणित विषय का प्रतिशत सबसे कम है।

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