ऑनलाइन में अंगदाताओं का जरूरतमंद करतें हैं इंतजार

ऑनलाइन में अंगदाताओं का जरूरतमंद करतें हैं इंतजार

Brijesh Chandra Sirmour | Publish: May, 18 2019 07:10:00 AM (IST) Shahdol, Shahdol, Madhya Pradesh, India

जिले में नहीं है अंगों को कलेक्ट करने की टीम और अंगों के प्रत्यारोपण की व्यवस्था

शहडोल. जिले में मेडिकल कॉलेज की सौगात के साथ अब दूसरे के जीवन को बचाने के लिए अंगदान की जरूरत को महसूस किया जा रहा है, मगर आदिवासी अंचल में अंगदान करने वालों के अंगों को एकत्र कर उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाने की अभी कोई टीम नहीं है और न ही अंगों को सुरक्षित रखने का कोई साधन उपलब्ध है। ऐसी स्थिति में यदि कोई अंगदान करता भी है तो उनके अंग को दिल्ली या इंदौर तक सुरक्षित ले जाना होगा, मगर अंगों को दिल्ली या इंदौर ले जाने तक की भी कोई व्यवस्था नहीं है। नतीजतन देहदान या अंगदान के लिए कोई प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा है। गौरतलब है कि हमारे देश में ऐसे बहुत सारे व्यक्ति हैं, जिनका कोई महत्वपूर्णं अंग खराब हो गया हो और उन्हें अपने जीवन को जारी रखने के लिये किसी दूसरे व्यक्ति के अंग की जरुरत हो। ऐसी स्थिति में किसी व्यक्ति के ब्रेन डेथ के बाद ही अंगदान की प्रक्रिया के द्वारा अंग प्रतिरोपण की जरूरत को पूरा किया जा सकता है, लेकिन सिर्फ अफवाह और भ्रम की वजह से आज भी हमारे देश में अंगदान करने वालों की संख्या बहुत कम है।
ब्रेनडेड की स्थिति में किया जा सकता है अंगदान
जानकार बताते हैं कि एक व्यक्ति के अंगदान से पांच लोगों को नया जीवन मिल सकता है। रेटिना, कॉर्निया, लीवर, किडनी, हार्ट और पैंक्रियाज जैसे अंगों को प्रत्यारोपित कर दूसरे जरूरतमंद लोगों को नई जिंदगी दी जा सकती है। अंगदान ब्रेनडेड की स्थिति में ही किया जा सकता है। ब्रेन डेड वेंटिलेटर पर रखकर अंगों को जरूरतमंद के लिए डोनेट कर सकते हैं, लेकिन सामान्य मौत पर अंगदान संभव नहीं है।
ईश्वर की भूमिका निभाता है अंगदाता
अंग प्रतिरोपित व्यक्ति के जीवन में अंगदान करने वाला व्यक्ति एक ईश्वर की भूमिका निभाता है, क्योंकि वह अपने अच्छे क्रियाशील अंगों को दान करके पांच से ज्यादा जीवन को बचा सकता है। कोई भी व्यक्ति चाहे, वह किसी भी उम्र, जाति, धर्म और समुदाय का हों, वह अंगदान कर सकता है। अंगदान करने की कोई निश्चित उम्र नहीं होती है। अंगदान उम्र के आधार पर नहीं किया जाता है, बल्कि यह निर्णय विशुद्ध चिकित्सा मापदंडों के आधार पर किया जाता है।
इन अंगों का कर सकते है दान
जानकारों के अनुसार प्राकृतिक मृत्यु की स्थिति में कॉर्निया, हृदय वाल्व, त्वचा और हड्डी जैसे ऊतकों का दान किया जा सकता हैं, लेकिन मस्तिष्क की मृत्यु होने की स्थिति में केवल लीवर, गुर्दे, आंत, फेफड़े और अग्न्याशय का दान ही किया जा सकता है। हृदय, अग्न्याशय, लीवर, गुर्दें और फेफड़े जैसे अंगों का प्रत्यारोपण उन अंग प्राप्तकर्ताओं में किया जाता हैं, जिनके अंग असफल हो चुकें हैं। ताकि यह प्राप्तकर्ता सामान्य जीवनयापन कर सकें।
इनका कहना है
जिले में दान वाले अंगों को एकत्र करने के लिए फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं है, इसके लिए कई बार प्रयास भी किए गए हैं, लेकिन उसके सार्थक परिणाम नहीं आए हैं। वैसे अभी नेत्रदान करने वालों की नेत्रों को सुरक्षित रखकर संबंधित स्थानों तक पहुंचाने की टीम बनाई जा सकती है।
डॉ. राजेश पाण्डेय, सीएमएचओ, शहडोल

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