वार्ड बने स्टोर, जमीन में लिटाकर हो रहा इलाज

हॉस्पिटल के पलंग और कुर्सियां बदहाल

By: Shahdol online

Published: 11 Sep 2017, 12:09 PM IST

शहडोल- संभाग के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल के हालात सुधर ही नहीं रहे हैं...। सरकारी हॉस्पिटल में अब मरीजों को जमीन पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है। जमीन पर ही बोतल से लेकर इंजेक्शन और खून चढ़ाया जा रहा है। इतना ही नहीं, महिलाओं को भी जमीन पर लेटने के लिए कहा जाता है।
पत्रिका टीम ने जिला हॉस्पिटल की लडख़ड़ाई स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को देखा, जहां पर सुधार की काफी गुजाइंशे नजर आई। जिला हॉस्पिटल के वार्ड तो ठीक यहां पर गलियारे में मरीजों को इलाज के लिए लेटा दिया जाता है। जिसके चलते मरीजों को जमीन पर लेटकर ही इलाज कराना पड़ता है। ऐसा भी नहीं है कि हॉस्पिटल के अधिकारियों के संज्ञान में ना हो।
कई मर्तबा हॉस्पिटल और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का हॉस्पिटल में आना जाना होता है, लेकिन मरीजों की समस्याओं को लेकर प्रभावी पहल नहीं की जा रही है। इसके चलते स्थिति जस की तस बनी हुई है। गर्मी और मौसम में फेरबदल के बाद लगातार बढ़ रहे मरीजों की संख्या के बाद अब हॉस्पिटल के हालात और खराब होते जा रहे हैं। स्थिति ये है कि वार्ड के भीतर भी मरीजों के लिए जगह नहीं है। उधर नई बिल्डिंग भी अभी पूरी तरह शिफ्ट ना होने के कारण मरीजों को दिक्कतें हो रही हैं।
पत्रिका पड़ताल के दौरान कई खामियां सामने आईं। यहां पूर्व का प्रसूता वार्ड स्टोर रूम में बदलता जा रहा है। प्रबंधन द्वारा हॉस्पिटल से निकलने वाली टूटी कुर्सियां और पलंग को यहां पर बेतरतीब तरीके से रख दिया गया है, जिसके चलते मरीजों को भर्ती करने की जगह नहीं है। इसके कारण यहां भर्ती होने वाले पूरे मरीजों को गलियारे में लेटाकर इलाज किया जा रहा है। इसी तरह कई पलंग को जनरेटर और ओपीडी कक्ष के नजदीक कबाड़ में है, लेकिन मरीजों के लिए वार्ड में नहीं रखा है। डिप्टी कलेक्टर के निरीक्षण के बाद भी जिला हॉस्पिटल की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है। गंदगी और अव्यवस्था के बीच मरीजों का इलाज होने से उनमें अन्य संक्रमित रोग फैलने की आशंका भी बनी रहती है।

हर दिन पांच सैकड़ा मरीज
जिला हॉस्पिटल संभागीय मुख्यालय का सबसे बड़ा हॉस्पिटल होने के कारण शहडोल उमरिया अनूपपुर के अलावा छत्तीसगढ़ के जनकपुर एरिया से भी मरीजों का आना लगा रहता है। यहां हर दिन पांच सैकड़ा से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं और लगभग १०० से अधिक मरीजों को भर्ती किया जाता है लेकिन बेहतर इलाज न मिलने के कारण मरीजों को वापस लौटना पड़ता है या फिर महंगे दामों में निजी हॉस्पिटल में इलाज कराना पड़ता है।

ये हैं खामियां
- महिलाओं को भी प्रसूता वार्ड के गलियारों में लेटाकर इलाज किया जा रहा था।
- पूर्व के प्रसूता वार्ड में बायोमेडिकल बेस्ट और खंडहर पलंग का स्टोर था।
- कई पलंग को ऑपरेशन थियेटर के नजदीक कबाड़ में रख दिया गया था। कई कमरे खाली पड़े लेकिन मरीजों का      इलाज गैलरी में हो रहा

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