scriptWas lying on the cot, wild elephants were 50 steps away, if the buffal | खाट पर लेटा था, 50 कदम की दूरी पर थे जंगली हाथी, सामने भैंस न भिड़ती तो चली जाती जान | Patrika News

खाट पर लेटा था, 50 कदम की दूरी पर थे जंगली हाथी, सामने भैंस न भिड़ती तो चली जाती जान

शहडोल के दो क्षेत्रों में जंगली हाथियों का उत्पात, तीसरे झुण्ड का बांधवगढ़ क्षेत्र में मूवमेंट

शाहडोल

Published: April 14, 2022 09:08:12 pm


- पांच लोगों को कुचलकर मारने वाला झुण्ड कर रहा वापसी, नदी के नजदीक बांधवगढ़ सीमा में मूवमेंट
शहडोल. संभाग में जंगली हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक झुण्ड का जयसिंहनगर के बाद अब सोन नदी होते हुए बांधवगढ़ की ओर मूवमेंट है तो दूसरे झुण्ड का पथखई पहाड़ी के नीचे खैरहा सांरगपुर में उत्पात जारी है। छत्तीसगढ़ से अनूपपुर बेनीबारी के रास्ते शहडोल के सिंहपुर बुढ़ार क्षेत्र में पहुंचे जंगली हाथियों का झुण्ड चार दिन से सारंगपुर क्षेत्र में डेरा जमाया हुआ है। हाथियों का झुण्ड सारंगपुर उर्स मैदान के आगे डोंगरी वार्ड क्रमांक 14 में गन्ना और टमाटर के बगीचे में घुस गया। यहां पर आंगन में सो रहे वृद्ध तक हाथी का झुण्ड पहुंच गया था। इस दौरान दो हाथी बगीचे की ओर पहुंच गए और एक हाथी घर की ओर आगे बढ़ रहा था तभी भैंस सामने से आकर भिडऩा शुरू कर दी। बाद में वृद्ध किसी तरह जान बचाकर भागा। डोंगरी वार्ड क्रमांक 14 निवासी मोहम्मद सहजान ने बताया कि रात के 9 बज रहे थे। बिजली भी नहीं थी तभी हाथियों का झुण्ड पहुंच गया। आहत पाकर खाट से उठा तो देखा कि लगभग 50 कदम की दूरी पर हाथी थे। किसी तरह जान बचाकर भागकर कमरे की ओर पहुंच गया। इस दौरान दो हाथी बगीचे में खाने के लिए चले गए और एक हाथी कमरे की ओर आ रहा था तभी आंगन में बंधी भैंस हाथी के सामने खड़ी हो गई। हाथी सिर को हिलाता रहा लेकिन किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया। जब भैंस नहीं हटी तो हाथी बगीचे की ओर चले गए। बाद में वन विभाग के अधिकारी भी वृद्ध सजहान के घर पहुंच गए। पत्रिका से बातचीत में सहजान ने बताया कि हाथी क्षेत्र में आए हैं, पता था लेकिन ये नहीं मालुम था कि घर तक पहुंच जाएंगे।
खाट पर लेटा था, 50 कदम की दूरी पर थे जंगली हाथी, सामने भैंस न भिड़ती तो चली जाती जान
खाट पर लेटा था, 50 कदम की दूरी पर थे जंगली हाथी, सामने भैंस न भिड़ती तो चली जाती जान
पर्याप्त भोजन व पानी, घूम फिर कर दोबारा आ रहे वापस
सारंगपुर और खैरहा क्षेत्र में हाथियों का मूवमेंट बना है। यहां से जंगली हाथी आगे जंगल तक जाते हैं लेकिन वापस लौट आते हैं। यहां पर पानी के लिए बांध होने की वजह से आसानी से मिल जाता है। इसके अलावा यहां पर ग्रामीणों ने गन्ना के अलावा टमाटर और सब्जियों की फसल लगा रखी है। जंगली हाथियों को आसानी से पर्याप्त भोजन और पानी मिल रहा है। जिसकी वजह से आगे नहीं बढ़ रहे हैं।

बांधवगढ़ की सीमा पर पंहुचा जंगली हाथियों का झुंड
उमरिया. बीते दो सप्ताह से शहडोल के जंगलों में आतंक का पर्याय बन चुके जंगली हाथियों का मूवमेंट अब बांधवगढ़ की ओर बढ़ रहा है। जंगली हाथी उत्तर शहडोल वन मंडल के जयसिंहनगर परिक्षेत्र के घियार बीट के कंपार्टमेंट 322 में पंहुच चुका है जो सोन नदी की सीमा पर स्थित है नदी के बाद बांधवगढ़ की सीमा शुरू होती है। बांधवगढ़ में जंगली हाथियों के आगमन की संभावना से पार्क प्रबंधन ने हाई अलर्ट जारी किया है। हाथियों के मूवमेंट की निगरानी के लिए पार्क प्रबंधन ने टीम का गठन कर उन्हें जंगलों में अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। संयुक्त संचालक लवित भारती ने बताया है कि बांधवगढ़ में जंगली हाथियों की निगरानी प्रबंधन एवं ग्रामीणों इलाको में सुरक्षा एवं बचाव के लिए अलर्ट जारी है।
बांधवगढ़ में पहले से मौजूद हैं 60 जंगली हाथी
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पूर्व से ही 60 जंगली हाथियों का दल मौजूद है जो यहां के सघन वनों में विचरण कर रहा है इन जंगली हाथियों ने बांधवगढ़ को अपना रहवास बना लिया अब नौ नए जंगली हाथियों के आ जाने से पार्क प्रबंधन को ज्यादा मशक्कतोंं का सामना करना पड़ेगा।

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