राजनीतिक रोटी सेंकने वैज्ञानिकों की मेहनत पर फेर रहे पानी

बाल्यावस्था में है शहडोल मेडिकल कॉलेज, बेहतर करने की जिम्मेदारी है आपकी

By: amaresh singh

Published: 09 Jan 2021, 11:51 AM IST

शहडोल । ईश्वर ने चिकित्सकों को मानव सेवा कर उनकी जान बचाने का शुभ अवसर प्रदान किया है इसे वे अपना मान कर करें यह सोच उनके जेहन में होनी चाहिए। चिकित्सा सेवा से जहां चिकित्सकों को श्रेय मिलती है वही महान पुण्य का अर्जन भी होता है। शहडोल मेडिकल कॉलेज अभी बाल्यावस्था में है इसे जैसा चाहेंगे आगे बनाने व बढ़ाने का अवसर आप सबके हाथों में हैं। ये बातें मंत्री विश्वास सारंग ने शहडोल मेडिकल कॉलेज के निरीक्षण के दौरान कही। बैठक में उन्होंने कहा कि शीघ्र ही 12.13 विषयों पर भविष्य में मंथन कार्य प्रारंभ होगा। जिससे प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज नए लुक में आगे बढ़ेंगे। मेडिकल कॉलेज शहडोल के निरीक्षण पर पहुंचे चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कोरोना वैक्सीन को लेकर उठाए जा रहे सवालों के जवाब में विपक्ष को जमकर घेरा। मंत्री ने कहा कि कांग्रेस के नेता राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए वैज्ञानिकों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं। यदि कांग्रेस के नेता वैज्ञानिकों से ज्यादा गुणवत्ता रखते हैं तो इस पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है। मंत्री सारंग ने कहा कि कांग्रेस के नेता वैज्ञानिकों की मेहनत पर सवाल उठा रहे हैं। जबकि वैज्ञानिकों ने दिन रात मेहनत करके वैक्सीन बनाई है। आईसीएमआर पर देश में आज तक कोई दाग नहीं लगा है लेकिन कांग्रेस के नेता इस पर सवाल उठाकर दिन रात मेहनत करने वाले वैज्ञानिकों पर सवाल उठा रहे हैं। इस तरह के सवालों पर कोई टिप्पणी नहीं की जाए तो ही अच्छा रहेगा। चिकित्सा शिक्षा एवं भोपाल गैस त्रासदी राहत तथा पुर्नवास मंत्री विश्वास सारंग ने शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया। मंत्री सारंग ने मेडिकल कॉलेज के आईसीयू, ओटी, माइक्रोबायलॉजी, बायोकेमिस्ट्री लैब सहित अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान मेडिकल कॉलेज में मधुमक्खी के छत्ते देखकर मंत्री ने इसे तत्काल हटवाने को कहा। मंत्री ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान बताया कि मेडिकल कॉलेज में विभागवार विभागों की क्या-क्या जरूरत है तथा कब तक विभाग चालू होगा इसके लिए एक सप्ताह में कैलेंडर तैयार करने के लिए मेडिकल कॉलेज के एचओडी को जिम्मेदारी दी है। मंत्री ने इसके लिए मेडिकल कॉलेज के डीन, कलेक्टर और कमिश्नर के साथ बैठक की। विभाग को शीघ्र चालू करने के लिए शासन स्तर से प्रयास किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है तो व्यामप की प्रक्रिया पूरी हो गई है। फरवरी माह तक भर्ती पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद से मेडिकल कॉलेज पूरी तरह से चालू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि संभाग के लिए मेडिकल कॉलेज सौगात है। यदि मेडिकल कॉलेज के लिए सीएसआर से फंड लेना होगा तो कमिश्नर बात करेंगे।

- जनप्रतिनिधियों से भी सतत संपर्क बनाकर सीएसआर व सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी सहयोग लें
- चीरघर की स्थिति की भी जानकारी ली तथा ब्लड बैंक एवं मानव संसाधन में रिक्त पदों की जानकारी ली।
- कोरोना की स्थितियों और जनरल ओपीडी गायनी विभाग आदि के बारे में भी पूछताछ की।
- पेयजल सड़क एंबुलेंस एडवांस सपोर्ट एंबुलेंस मिनी बस की आवश्यकता की पूर्ति के निर्देश दिए।
- मेडिकल कॉलेज हेतु एप्रोच रोड की सुविधा उपलब्ध कराने कमिश्नर को निर्देश दिए।
-माइक्रोबायोलॉजी लैब, बायोकेमिस्ट्री लैब, साइटोपैथोलॉजी, हिस्टोपैथोलॉजी का भी निरीक्षण किया।

बच्चों की मौत के बारे में जाना
निरीक्षण के दौरान मंत्री सारंग ने जिला अस्पताल में हो रही बच्चों की मौत के बारे में पूछा। उन्होंने पूछा कि जिला अस्पताल में कहां के डॉक्टरों की ड्यूटी थी। उन्होने पूछा कि बच्चों की मौत आखिरकार क्यों हो रही थी। इस पर उन्होंने बताया कि ज्यादातर बच्चे गंभीर हालत में आ रहे थे। उनको बचाना मुश्किल था। ठंड में इस तरह की घटनाएं बढ़ जाती है। उन्होंने पूछा कि आखिरकार इसी जिला में बच्चों की मौत इतनी क्यों हो रही है। इस पर उन्हें बताया कि दूसरे जगहों पर भी बच्चों की मौत हो रही है।

डीन ने कोविड कर्मचारियों के लिए दिया प्रपोजल
मंत्री सारंग ने बताया कि जिन कोविड कर्मचारियों को नौकरी से हटाया गया है। उनको एनएचएम के द्वारा अस्थाई तौर पर रखा गया था। उनका कार्यकाल पूरा हो गया था लेकिन डीन ने उनके लिए प्रपोजल दिया है, उस पर विचार किया जाएगा।

प्रोत्साहन राशि नहीं मिली, नौकरी से भी निकाल दिया
कोविड स्वास्थ्य कर्मचारियों ने नौकरी से निकाले जाने के बाद शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज के गेट पर मंत्री को पुन: नियुक्ति की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। दिए ज्ञापन में मांग करते हुए बताया कि कोविड १९ के तहत विभागीय नियमानुसार एवं पूर्ण मापदंडों के अनुसार तीन माह के लिए नियुक्ति की गई थी। इससे समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा है। इस तरह ८ से ९ माह में पूरी ईमानदारी एवं कर्मव्यनिष्ठा के साथ जान को जोखिम में डालकर कोरोना पॉजिटिव मरीजों के संपर्क में रहकर सेवाएं देते आ रहे हैं। ३१ दिसंबर को छटनी का आदेश जारी कर दिया गया है। इसमें स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वॉय और आया के आधे से ज्यादा स्टाफ शामिल हैं। इसलिए कोरोना को लेकर संविदा अथवा स्थाई नियुक्ति का आदेश जारी किया करने, कर्मचारियों के छटनी के आदेश को तुरंत निरस्त किया जाए। इसके साथ मुख्यमंत्री द्वारा जो दस हजार रुपए सहायता राशि देने का एलान किया गया था। छटनी हो गई लेकिन प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है। हाल में व्यापम की तरफ से स्टाफ नर्स की भर्ती निकाली गई है,जिसमें कोविड १९ स्वास्थ्य कर्मियों के लिए अलग से आरक्षण नहीं दिया गया है।

डॉक्टरों ने सौंपा ज्ञापन, मंत्री के सामने रखी मांगें
मांगों को लेकर मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के डॉक्टरों ने मंत्री विश्वास सारंग को ज्ञापन सौंपा। दिए ज्ञापन में मांग करते हुए बताया कि नेशनल पेंशन स्कीम २००५ के वित्त विभाग के आदेश एवं २०१३ के चिकित्सा शिक्षा विभाग के आदेश होने के बाद भी नेशनल पेंशन स्कीम का नियमानुसार क्रियान्वयन नहीं किया गया। इसलिए इसका क्रियान्वयन किया जाए। कोरोना के गंभीर महामारी में सेवा प्रदान करने वाले डॉक्टरों का भोजना भत्ता एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान किया जाए। आदिवासी एवं दुर्ग क्षेत्र में स्थापित मेडिकल कॉलेज में भी चिकित्सा शिक्षकों को आदिवासी क्षेत्र भत्ता प्रदान किया जाए। सातवें वेतनमान का वास्तविक लाभ राज्य के अन्य कर्मचारियों की तरह एक जनवरी २०१६ से प्रदान किया जाए। प्रावेट प्रेक्टिस करने वाले चिकित्सा शिक्षकों को भी आयुष्मान योजना का लाभ दिया जाए। ३०० दिन का अवकाश नगदीकरण आर्दश सेवा नियम २०१८ में चिकित्सा शिक्षकों को वर्तमान नियमानुसार अधिकतम ३०० दिन के अर्जित अवकाश का प्रावधान करने व अवकाश को नकदीकरण किया जाए। शासकीय कर्मचारियों के समान ग्रेजुइटी लाभ अन्य शासकीय कर्मचारियों के समान स्वशासी संस्था के अधीन नियुक्त चिकित्सा शिक्षकों के लिए भी ग्रेजुइटी का लाभ करें।

इनकी रही मौजूदगी
कमिश्नर शहडोल संभाग नरेश पाल विधायक जयसिंहनगर जयसिंह मरावी विधायक जैतपुर मनीषा सिंह कलेक्टर डॉ सतेंद्र सिंहए नगर पालिका अध्यक्ष शहडोल उर्मिला कटारे अधिष्ठाता एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी चिकित्सा महाविद्यालय डॉ मिलिंद शिलारकर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिपं पार्थ जयसवाल रहे।

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