अजब गजब : आधी खोपड़ी के साथ जन्म, गर्भ में नहीं बना ब्रेन और सिर, दुनिया देखने से पहले ही कह गई अलविदा

अजब गजब : आधी खोपड़ी के साथ जन्म, गर्भ में नहीं बना ब्रेन और सिर, दुनिया देखने से पहले ही कह गई अलविदा
birth of a wonderful child

Shubham Singh | Publish: Aug, 14 2019 07:46:06 PM (IST) Shahdol, Shahdol, Madhya Pradesh, India

जिला अस्पताल में प्रसव, जन्म लेने से पहले तोड़ दी दम, गर्भ में ही एनेनसिफेली का शिकार

शहडोल. घर में नए मेहमान के आने की तैयारियां हो रही थी। अपनों की बधाईयों का सिलसिला भी चल रहा था। प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों की जांच पर सारी खुशियां एकाएक ध्वस्त हो गई। प्रसव के पहले डॉक्टरों ने सोनोग्राफी के माध्यम से जांच की तो पता चला कि जन्म लेने वाले शिशु का गर्भ में ब्रेन और सिर ही नहीं बना है। किसी तरह डॉक्टरों की टीम ने जिला अस्पताल में प्रसव कराया लेकिन तब तक बच्ची ने दम तोड़ दिया था। जिला अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, शहर के बलपुरवा में रहने वाली एक महिला को परिजन प्रसव के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराए थे। यहां प्रसूता की हालत भी बिगड़ रही थी। इसी दौरान डॉक्टरों ने सोनोग्राफी कराई। सोनोग्राफी कराने पर सामने आया कि गर्भ में पल रहे शिशु को एनेनसिफेली बीमारी ने अपनी चपेट में ले रखा है। एनेनसिफेली की वजह से मस्तिष्क का हिस्सा ही नहीं बन पाया है, जबकि बच्चे के धड़ का हिस्सा विकसित हो रहा था।

एनेनसिफेली : हर 15 दिन में जिला अस्पताल में एक केस
डॉक्टरों के अनुसार, जिले के आदिवासी अंचलों में एनेनसिफेली (anencephaly) के काफी मामले आते हैं। हर १५ दिन में इस तरह का एक केस अस्पताल में पहुंचता है। माह से लगभग दो से तीन एनेनसिफेली के मामले डायग्नोस किए जाते हैं। कई मामलों में तो गर्भपात की भी सलाह दी जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, एनेनसिफेली में गर्भ में पल रहा बच्चा अविकसित मस्तिष्क और अधूरी खोपड़ी के साथ पैदा होता है। जन्म से ही मस्तिष्क नहीं बन पाता है। इससे बच्चा मरा हुआ पैदा होता है या फिर जन्म के कुछ घण्टों में ही दम तोड़ देता है।


आदिवासी समुदाय में सबसे ज्यादा गंभीर बीमारियां
संभाग की सबसे बड़ी अस्पताल होने की वजह से शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, डिंडौरी और छग के जनकपुर तक के मरीज यहां इलाज पर निर्भर रहते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, आदिवासी समुदाय इस तरह की कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आकर जिला अस्पताल पहुंचता है। कई महिलाओं के गर्भ में पल रहा शिशु एनेनसिफेली का शिकार हो जाता है तो कई महिलाओं में यूट्रेस ही नहीं बन पाता है।

कभी- कभी आते हैं ऐसे केस
एनेनसिफेली में गर्भ में बच्चों का सिर और ब्रेन नहीं बन पाता है। धड़ का हिस्सा विकसित हो जाता है। इसमें बच्चों की मौत हो जाती है। कई बाद जीवित जन्म लेते हैं, लेकिन कुछ ही घण्टों में मौत हो जाती है। गर्भावस्था के दौरान नियमित डॉक्टरों से सलाह लेनी चाहिए। निर्धारित फॉलोअप हर हाल में कराते रहना चाहिए।
डॉ उमेश नामदेव, वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ

फोलिक एसिड हर हाल में लेना चाहिए
प्रसव के कुछ समय पहले डॉक्टरी सलाह पर फोलिक एसिड की दवाईयां हर हाल में लेनी चाहिए। अधिकांशत फोलिक एसिड की कमी की वजह से एनेनसिफेली होता है। जिला अस्पताल में भी इस तरह के केस अक्सर आते हैं। सोनोग्राफी करने पर पता चलता है कि बच्चे का ब्रेन या फिर सिर का हिस्सा ही नहीं बना है।
डॉ पंकज श्रीवास्वत, रेडियोलाजिस्ट
जिला अस्पताल, शहडोल

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