कोरोना वॉरियर्स: मरीजों की सेवा के बाद घर पर होती हैं होमआइसोलेट, बच्ची को घर पर छोड़कर आती है पैरामेडिकल स्टाफ

पति को नहीं मिली वर्क फ्राम होम की अनुमति

शहडोल। कोरोना को लेकर जहां एक तरफ आम लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। लोग कोरोना का नाम सुनकर ही भयभीत हो जा रहे हैं। वहीं डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ कोरोना वॉरियर्स के रूप में काम कर रहे हैं। जिला अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट की प्रभारी डॉ सुधा नामदेव ने कहा कि यहां मरीज अपनी विभिन्न प्रकार की जांच करवाने आ रहे हैं। ऐसे में यहां पर रिस्क ज्यादा है। इस दौरान हम लोग सबसे पहले मरीज को हैंडसेनेटाइजर देते हैं। इसके बाद उसे एक मीटर दूरी बनाकर रहने को कहते हैं। यहां से जाने के बाद घर पर भी सावधानी बरतनी पड़ती है। वहीं पैथोलॉस्टि में स्टाफ नर्स मंजू तिवारी ने बताया कि हम दोनों पति-पत्नी स्वास्थ्य विभाग में ही पदस्थ हैं। पति मलेरिया विभाग में पदस्थ हैं। उन्होंने वर्क फ्राम होम की अनुमति मांगी थी लेकिन उनको नहीं मिली।
बच्ची को छोड़कर आती है ड्यूटी
इसके बाद मेरी ड्यूटी सुबह ८ बजे से दोपहर २ बजे तक रहती है। एक ढ़ाई साल की बच्ची है। चूंकि घर पर काम करने वाली महिला नहीं आ रही है। इसके चलते बच्ची घर पर अकेली हो जा रही है। इसको लेकर मेरी ड्यूटी के समय पति घर पर रहते हैं और जब दोपहर २ बजे जब मेरी ड्यूटी खत्म होती है तो वे ड्यूटी पर जाते हैं।घर पर पहुंचने के बाद होमआइसोलेट होना पड़ता है। सबसे पहले घर पर जाने के बाद सैनिटाइजर का उपयोग करते हैं। इसके बाद सभी कपड़े धोकर स्नान करना पड़ता है। इसके बाद बच्ची को अपने पास लाते हैं। इस दौरान पैरामेडिकल स्टाफ के सदस्यों ने कहा कि जब कोई जांच के लिए आता है तो हम लोगों को पूरी सावधानी बरतनी पड़ती है। हाथों में ग्लब्स, मास्क, अप्रैन और कैंप का इस्तेमाल कर रहे हैं। घर पर जाने के बाद परिवार को बाकी सदस्यों से दूरी बनाकर रहनी पड़ रही है। रिश्तेदारों ने घर आना छोड़ दिया है।

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