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स्थिति बिगड़ी तब ली सुध, रिमझिम बारिश के बीच केन्द्रों से करा रहे परिवहन

आसमान में छाए रहे काले बादल: बारिश के चलते खरीदी प्रभावित, कई केन्द्रो में नहीं हुई खरीदी

शाहडोल

Published: December 29, 2021 08:43:18 pm

स्थिति बिगड़ी तब ली सुध, रिमझिम बारिश के बीच केन्द्रों से करा रहे परिवहन
आसमान में छाए रहे काले बादल: बारिश के चलते खरीदी प्रभावित, कई केन्द्रो में नहीं हुई खरीदी
ओपन कैप में गेहूं और पुरानी धान का भण्डारण, खरीदी के बाद धान रखने जगह नहीं
शहडोल. तीन दिन से मौसम के बदले रुख ने खरीदी केन्द्रो और परिवहन व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। अब जब केन्द्रों में रखी लगभग सवा लाख क्विंटल धान बारिश और नमी से प्रभावित हो गई तो परिवहनकर्ता और जिम्मेदारों ने इसकी सुध ली है। बुधवार को आसमान में छाए काले बादलों और रिमझिम फुहार के बीच जिले के खरीदी केन्द्रों के साथ ही ओपेन कैप से अनाज का परिवहन किया जाता रहा। इधर बारिश की वजह से बुधवार को धान खरीदी प्रभावित रही। जहां-जहां खुले में खरीदी केन्द्र बनाया गया है वहां किसानों से अनाज की खरीदी नहीं की गई। जहां हुई भी है वहां न के बराबर ही धान खरीदी हुई है।
स्थिति बिगड़ी तब ली सुध, रिमझिम बारिश के बीच केन्द्रों से करा रहे परिवहन
स्थिति बिगड़ी तब ली सुध, रिमझिम बारिश के बीच केन्द्रों से करा रहे परिवहन
नमी से प्रभावित होगी धान
मंगलवार को हुई झमाझम बारिश के बाद बुधवार को भी पूरा दिन आसमान में काले बादल छाए रहे और बूंदा-बांदी का सिलसिला जारी रहा। जानकारों की माने तो वातावरण में लगातार नमी बने रहने की वजह से खुले आसमान के नीचे खरीदी के बाद रखी हुई धान की गुणवत्ता नमी से प्रभावित होगी। जिन बोरो में बारिश की बौछार पड़ी है या फिर जिन्हे ढंक दिया गया था और अब परिवहन के लिए खोला जा रहा है उसमें भी नमी का खतरा बना हुआ है।

खाली नहीं हुआ ओपन कैप, जमीन पर लगाई छल्ली
जिला मुख्यालय से १० किमी दूर ग्राम छतवई में ओपेन कैप में ही खरीदी केन्द्र भी बनाया गया है। जिससे कि परिवहन की समस्या से बचा जा सके और खरीदी के साथ ही धान को सुरक्षित ओपेन कैप में रखा जा सके। शासन की इस मंशा पर भी पानी फिरता नजर आ रहा है। दरासल ओपेन कैप में पहले से ही रखी धान और गेहूं का उठाव अब तक नहीं हो पाया। जिसके चलते ओपेन कैप में खरीदी गई धान रखने के लिए पर्याप्त जगह ही नहीं बची है। तीन दिन से बदले मौसम के मिजाज को देखते हुए खरीदी गई धान के बोरों की छल्लियां जमीन में ही लगा कर उन्हे ढ़क दिया गया है। ऐसे में स्टेक से बहकर आने वाला पानी इन बोरो को प्रभावित कर रहा है। बताया जा रहा है कि उक्त ओपेन कैप में २ स्टेक में गेहूं और आधे से ज्यादा कैप में पूरानी धान रखी हुई है।

तीन माह में हो जाना चाहिए उठाव
उल्लेखनीय है कि खरीदी के बाद अनाज रखने के लिए ओपेन कैप वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में बनाए गए हैं। जहां से अनाज रखने के तीन माह के अंदर उठाव करने का प्रावधान है। विडम्बना यह है कि यहां पिछले वर्ष की रखी धान का पूरा उठाव अब तक नहीं हो पाया है। ऐसे में नई खरीदी गई धान रखने के लिए पर्याप्त स्थान ही नहीं मिल पा रहा है। तिरपाल के भरोसे खुले-आसमान के नीचे रखी धान की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।
केन्द्रों में रखी किसानों की धान, नहीं हुई खरीदी
मौसम का मिजाज बदलने के साथ ही खरीदी केन्द्रो में खरीदी की रफ्तार धीमी पड़ गई है। वहीं मंगलवार को हुई झमाझम बारिश के चलते केन्द्रो में खरीदी बंद कर दी गई है। ऐसे में कई किसानों की धान खरीदी केन्द्रो में ही खुले आसमान के नीचे रखी हुई है। कई किसान ऐसे भी थे जिनकी धान खरीदी की अंतिम समय सीमा मंगलवार और बुधवार को ही थी ऐसे में किसान परेशान है कि अब उनकी खरीदी होगी भी या नहीं।

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