Women's Day Special: मौत के बाद पति को माना गुरु, चित्रकारी देख-देखकर सीखा, देश में बनाई खुद की पहचान

100 से ज्यादा जगहों पर दे चुकी हैं प्रस्तुतियां, देहांत के बाद पति को ही मान लिया था चित्रकारी में गुरु

By: shubham singh

Published: 07 Mar 2020, 01:53 PM IST

शहडोल. हिम्मत, जुनून और हौसले से ख्वाव को हकीकत में बदलना आसान है। डिंडौरी के पाटनगढ़ से निकलकर गोंडी आर्ट में देशभर में अलग पहचान बनाने वाली चन्द्रकली कुशाम का संघर्ष भी कुछ ऐसी ही कहानी बयां कर रहा है। चित्रकार पति की मौत के बाद पूरा परिवार दाने-दाने को मोहताज हो था लेकिन हार नहीं मानी। चन्द्रकली ने हाथ के हुनर को ही मुसीबत से लडऩे का हथियार बनाया और पति की मौत के बाद उनकी चित्रकला के एलबम देख- देखकर हुनर सीखा। इस दौरान काफी चुनौतियां भी आई। लोगों ने तंज भी कसे और मजदूरी करने तक की सलाह दी लेकिन चन्द्रकली के चट्टान जैसे हौसलों के आगे चुनौतियों ने भी हार मान लिया। अब आदिवासी कला में उनका जाना-पहचाना नाम है। चन्द्रकली के पति उदय सिंह आदिवासी कलाकृतियों को लेकर चर्चित थे। 30 अक्टूबर 2009 को पति की मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति लडखड़़ा गई। परिवार में आय का जरिया नहीं था। चन्द्रकली ने बताया कि पति के देहांत के बाद सास - ससुर के अलावा बच्चों की जिम्मेदारी थी। बाद में भोपाल से पेंटिंग डिंडौरी पाटनगढ़ पहुंचा तो पति को ही गुरु माना। उनकी चित्रकारी देख- देखकर पेंटिंग बनानी शुरू की। अब वे देशभर में 100 से ज्यादा जगहों में शामिल होकर आदिवासी कलाकृतियों की प्रस्तुति दे चुकीं हैं और दूसरे कलाकारों को भी प्रशिक्षण दे रही हैं।

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पाटनगढ़ से निकलकर शहरों तक पहुंची आदिवासी कला
डिंडौरी का पाटनगढ़ आदिवासी कला और संस्कृति को जिंदा रखने और देशभर में चित्रकारी की परंपरा को बनाए रखने के लिए प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि पाटनगढ़ आदिवासी गोंड चित्रकला का खजाना है, जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया जा रहा है। गोंडी आर्ट पाटनगढ़ से ही निकलकर शहरों तक पहुंची हैं।

कुछ नहीं आता था, देहांत के बाद पति को माना गुरु
चित्रकला में मुझे कुछ भी नहीं आता था। पति के देहांत के बाद आर्थिक समस्याएं काफी आ गई थी। पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभालनी थी। पति को गुरु मानकर उनकी पेंटिंग से ही सबकुछ सीखा था। कई लोगों ने तंज भी कसा और मजदूरी करने की बात कहते थे। देश के कई बड़ी प्रतियोगिताओं और चित्रकला शिविरों के लिए मेरी पेंटिंग का चयन किया जा चुका है। दूसरे लोगों को भी पेंटिंग का प्रशिक्षण दे रही हूं।
चन्द्रकली कुशाम, आर्टिस्ट

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