चिन्मयानंद को मिली सुप्रीम कोर्ट से राहत, जमानत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज, यूपी सरकार को नोटिस जारी

चिन्मयानंद को जमानत देने वाली इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

By: Abhishek Gupta

Updated: 03 Mar 2020, 08:27 PM IST

लखनऊ. पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री चिन्मयानंद को उच्च न्यायालय से बढ़ी राहत मिली है। चिन्मयानंद को जमानत देने वाली इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इसी के साथ ही मामले को दिल्ली ट्रांसफर करने वाली याचिका पर कोर्ट ने यूपी सरकार, चिन्मयानंद और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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कोर्ट ने कहा यह-
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चिन्मयानंद को जमानत देने वाले आदेश में कारण दिए थे। इस वहज से सुप्रीम कोर्ट के इसमें हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रहे मामले को दिल्ली कोर्ट को सौंपने के संबंध वाली एक अन्य याचिका पर यूपी सरकार व अन्य को नोटिस जारी किया। यौन उत्पीड़न के एक मामले में गिरफ्तार चिन्मयानंद को उच्च न्यायालय ने 3 फरवरी को जमानत दे दी थी। चिन्मयानंद पर शाहजहांपुर में उनके ट्रस्ट द्वारा संचालित कॉलेज में विधि की छात्रा ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था यह-
चिन्मयानंद की जमानत याचिका पर जस्टिस राहुल चतुर्वेदी ने जमानत का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि निजी मुचलका और संबंधित अदालत की संतुष्टि के हिसाब से दो पुख्ता जमानती के साथ चिन्मयानंद उर्फ कृष्ण पाल सिंह को रिहा किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि आवेदक इस बात का एक शपथ पत्र देगा कि जब अदालत में प्रमाण पेश करने के लिए गवाह मौजूद हों, वह निर्धारित तारीख को सुनवाई टालने की मांग नहीं करेगा। इस शर्त के उल्लंघन पर निचली अदालत इसे आजादी का दुरुपयोग मानने के लिए स्वतंत्र होगी और कानून के मुताबिक आदेश पारित करेगी।

साथ ही कहा कि आवेदक सुनवाई के लिए निर्धारित हर तारीख पर निचली अदालत में खुद या अपने वकील के माध्यम से मौजूद रहेगा। पर्याप्त कारण के बगैर अनुपस्थित रहने पर निचली अदालत उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 229-ए के तहत कार्यवाही शुरू कर सकती है।

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