आदिनाथ प्रभु ने असी-मसी और कृषि के रूप में व्यवहार धर्म का कराया था ज्ञान

आदिनाथ प्रभु ने असी-मसी और कृषि के रूप में व्यवहार धर्म का कराया था ज्ञान

Gopal Swaroop Bajpai | Publish: Mar, 27 2019 09:12:26 PM (IST) Shajapur, Shajapur, Madhya Pradesh, India

प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जन्म व दीक्षा कल्याणक उपलक्ष्य में नगर में आयोजित त्रिदिवसीय महोत्सव के दूसरे दिन वीररत्नविजयजी ने कहा

शाजापुर.

वेदों में भी जिनका नाम-काम-स्थान और सम्मान है, ऐसे प्रथम महाराज, मुनिराज और जिनराज आदिनाथ भगवान का जन्म व दीक्षा दिवस चैत्र वदी अष्टमी के पावन दिन संपूर्ण भारतवर्ष में धूमधाम सहित मनाया जाता है। इसी दिन से ही हजारों साधक 13 मास के वर्षी तप का शुभारंभ करेंगे। दुनियाभर में प्रभु की एक अलग ही पहचान है, असी-मसी और कृषि के रूप में मानव जाति को व्यवहार धर्म का ज्ञान कराने वाले आदिनाथ भगवान ने ही अग्नि का प्रकटीकरण तथा उसके उपयोग का मार्गदर्शन जनमानस को कराया और युगलिक काल तथा कल्पवृक्ष की व्यवस्था समाप्त करके धर्म के साथ कर्म पुरुषार्थ को भी प्रधानता प्रदान की।

उक्त आशीर्वचन मालव विभूषण अनुयोगाचार्य वीररत्नविजयजी ने प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जन्म व दीक्षा कल्याणक उपलक्ष्य में नगर में आयोजित त्रिदिवसीय महोत्सव के दूसरे दिन बुधवार सुबह 9:15 बजे जैन उपाश्रय में आयाजित प्रवचन कार्यक्रम के दौरान उपस्थितजनों से कहे। इसके पूर्व जैनसंत आगमरत्नविजय व सुप्रसिद्ध व्याख्यात्री हेमप्रभाश्रीजी की सुशिष्याएं कल्पलताश्रीजी आदि ठाणा का नगर में मंगल प्रवेश भी हुआ। सुबह 7:30 बजे बसस्टैंड जीवाजी क्लब से साधु-साध्वीगणों की अगवानी समाजजनों ने की और उन्हें जैन उपाश्रय लाया गया। इसके उपरांत विजय मुहूर्त दोपहर 12:39 बजे 108 औषधी, 108 नदी के पानी, 108 कलश व 68 तीर्थ की मिट्टी से 51 प्रभु प्रतिमाओं के 18 अभिषेक महाविधान आयोजित हुआ। इसमें समाजजनों ने बोलियां लेकर भक्तिभाव सहित प्रभु प्रतिमाओं का अभिषेक किया गया। अखिल भारतीय श्वेतांबर जैन युवक महासंघ के बैनरतले प्रभु के जन्म दिवस के अवसर पर संचालित तीन दिवसीय महोत्सव के दौरान तपागच्छ के अनुयोगाचार्य वीररत्नविजयजी, सागर समुदाय के विद्वान मुनिराज आगमरत्नविजयजी, खरतरगच्छ समुदाय की साध्वी कल्पलताश्रीजी तथा कच्छ समुदाय की साध्वी कल्परसाश्रीजी को एक साथ देखकर कार्यक्रमों में उपस्थित समाजजनों में हर्ष व उत्साह छाया रहा।

61 प्रभु प्रतिमाओं से सुसज्जित चौबीस जिनालय धाम
शाजापुर चौबीस जिनालय धाम की विशेषता का उल्लेख करते हुए अनुयोगाचार्य वीररत्नविजयजी ने बताया कि यहां करीब 300 वर्ष प्राचीन प्रभु आदिनाथ की दिव्य व चमत्कारी प्रतिमा विराजित है। जिनके प्रभाव-स्वभाव और चमत्कार की कीर्ति कथा सर्वत्र गूंजती है। भारत के सबसे बड़े जैन तीर्थ सिद्धाचल पालीताणा स्थित श्रीआदेश्वर दादा की प्रतिष्ठा का दिन जेठ बदी 6 है, संयोग से उसी दिन शाजापुर के प्रभु की प्रतिष्ठा का दिन भी है। संभवत: शाजापुर का चौबीस जिनालय धाम भारत का पहला जैन मंदिर है जहां एक साथ 61 प्रभु प्रतिमाओं की स्थापना है।

नगर में आज निकलेगी विशाल रथयात्रा
मीडिया प्रभारी मंगल नाहर ने बताया कि महोत्सव के मुख्य व अंतिम दिवस गुरुवार को परमात्मा का जन्म व दीक्षा कल्याणक धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके अंतर्गत सर्वप्रथम सुबह 6:30 बजे विशिष्ट अभिषेक तथा अष्ट प्रकारी पूजन विधान होगा। इसके पश्चात 8:30 बजे भव्यातिभव्य मंगल रथयात्रा तथा वर्षीदान वरघोड़ा नगर में निकाला जाएगा। जो प्रमुख मार्गों से होते हुए जैन उपाश्रय पहुंचकर गुणानुवाद सभा के रूप में संपन्न होगा। इसके उपरांत शाम 6:45 बजे कुमारपाल महाराजा द्वारा महाआरती तथा रात्रि के समय परमात्मा की रंगारंग भक्ति के साथ महोत्सव का समापन होगा।

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