भ्रष्टाचारी सीईओ को कोर्ट ने तीसरी बार सुनाई सजा

भ्रष्टाचारी सीईओ को कोर्ट ने तीसरी बार सुनाई सजा

Gopal Swaroop Bajpai | Publish: Mar, 13 2019 09:54:16 PM (IST) Shajapur, Shajapur, Madhya Pradesh, India

राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत सडक़ निर्माण में किया था घोटाला, शासन को हानि पहुंचाकर स्वयं अर्जित किया था लाभ

शाजापुर.

राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में भ्रष्टाचार करने वाले तत्कालीन जनपद पंचायत सीइओ सहित 7 आरोपियों को न्यायालय विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने 2-2 वर्ष के सश्रम कारावास और कुल 2 लाख 60 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है।

सहायक जिला अभियोजन अधिकारी शाजापुर एवं मीडिया प्रभारी अजय शंकर ने बताया कि आरोपीगण पर आरोप था कि उन्होंने 2 अगस्त 2008 से 20 फरवरी 2009 तक राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत बाईहेड़ा में ग्राम बाईहेड़ा से सतगांव तक 1.5 किमी लंबाई की मिट्टीकृत सडक़ निर्माण कार्य के लिए ग्राम पंचायत बाईहेड़ा को क्रियान्वयन एजेंसी नियुक्त किया गया था। इसमें तत्कालीन जपं सीइओ सुनील खत्री, जपं शाजापुर के अंतर्गत ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के एसडीओ अशोककुमार मेहरे, जपं शाजापुर के अंतर्गत ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के उपयंत्री यशवंतसिंह कराड़ा, पंचायत समन्वयक मकसुद एहमद कुरैशी, ग्राम पंचायत बाईहेड़ा सरपंच भंवरलाल, ग्राम पंचायत बाईहेड़ा सचिव सुरेंद्रसिंह परिहार और ग्राम पंचायत सतगांव सचिव इंदरसिंह चौधरी को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई थी। उक्त सभी ने अपने दिए गए कर्तव्यों का पालन नहीं किया। साथ ही सभी ने निर्माण कार्य की अनदेखी की और आपस में परस्पर मिलजुलकर आपराधिक षडय़ंत्र रचकर अवैध तरीके से घटिया निर्माण कार्य कराया। साथ ही शासन को 2 लाख 75 हजार 893 रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचाई और स्वयं सभी आरोपियों ने अवैध रूप से लाभ प्राप्त किया था।

लोकायुक्त उज्जैन ने किया था प्रकरण दर्ज
सूत्र सूचना के माध्यम से विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त उज्जैन में आरोपीगण के विरुद्ध प्राथमिक जांच पंजीबद्ध की गई। प्राथमिक जांच के बाद जांच सिद्ध पाए जाने पर आरोपीगण के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया गया था। विवेचना के बाद अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। प्रकरण में उक्त कार्य तकनीकी प्राक्कलन अनुसार किया जाना चाहिए था जिसमें उक्त मार्ग की लागत प्राक्कलन अनुसार 8 लाख 3 हजार 599 रुपए थी। माप पुस्तिका अनुसार कार्य की लागत 4 लाख 80 हजार 702 रुपए थी तथा भौतिक सत्यापन के आधार पर कार्य की अनुमानित लागत 2 लाख 4 हजार 809 रुपए पाई। इस प्रकार 2 लाख 75 हजार 893 रुपए की राशि आरोपियों ने आपराधिक षडय़ंत्र कर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाते हुए स्वयं अवैध रूप से लाभ प्राप्त किया था।

8 किसानों के खाते में रुपए डालकर निकाल लिए थे
आरोपियों ने अपने परिचित मजदूरो के जॉबकार्ड बनवाएं, उन्हे कार्य दिया और इन मजदूरो को कम मजदूरी की राशि का भुगतान करके मस्टर रोल में इनके नाम के आगे अधिक राशि का भुगतान करना दर्शाकर एक ही व्यक्ति के निशानी अंगूठा लगवाए व शेष राशि अपने पास रख ली। अपने हितेशी 8 मजदूरो के बैंक में खाते खुलवाए। इसमें दूलेसिंह के खाते में 38 हजार रुपए, प्रभुलाल के खाते में 38 हजार रुपए, हरिनारायण के खाते में 35 हजार रुपए, शरीफ के खाते में 32 हजार 957 रुपए, इंदरसिंह के खाते में 35 हजार रुपए, सुरेशसिंह के खाते में 38 हजार रुपए, भंवरलाल के खाते में 30 हजार रुपए और तेजसिंह के खाते में 36 हजार रुपए जमा हुए थे। शेष किसी भी मजदूर के खाते नहीं खुलवाए गए जो शासन के आदेशों व निर्देशो का स्पष्ट रूप से उल्लंघन कर उक्त 8 मजदूरों के खाते से 2 लाख 82 हजार 957 रुपए निकाले गए थे। साथ ही सामाग्री परिवहन में भाड़े की राशि भी आहिरत करने के लिए गलत बिल व व्हाउचर बनाकर राशि निकाली ली, लेकिन उनका केशबुक में कोई इंद्राज नहीं किया।

इन धाराओं में सुनाई सजा
मप्र शासन के स्पष्ट निर्देश प्राप्त होने पर भी उक्त आरोपियों ने निर्देशों का पालन नहीं करते हुए मजदूरी का भुगतान सीधे संबंधित मजदूरों के बैंक खातों में नहीं किया। अंगुलि चिन्ह विशेषज्ञ से जांच कराने पर भी मस्टररोल पर अलग-अलग नाम से लगे अंगूठे एक ही व्यक्ति के पाए गए। अभियोजन की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी एवं विशेष लोक अभियोजक सचिन रायकवार के किए गए उक्त तर्कों से सहमत होते हुए विचारण के दौरान न्यायालय ने आरोपीगण को दोषी पाते हुए अलग-अलग धाराओं में दंडित किया है। न्यायालय विशेष न्यायाधीश ने आरोपी सुनील खत्री, अशोककुमार मेहरे, यशवंतसिंह कराड़ा, मकसुद एहमद कुरैशी, भंवरलाल एवं सुरेंद्रसिंह परिहार को धारा 13(1)डी, सहपठित 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 में दोषी पाते हुए प्रत्येक को 2-2 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 20-20 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया। धारा 120 बी भादवि में दोषी पाते हुए प्रत्येक को 2-2 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 20-20 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। इंदरसिंह चौधरी को धारा 120(बी) भादवि में दोषी पाते हुए 2 वर्ष सश्रम कारावास एवं 20 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया।

तीसरी बार भ्रष्टाचार में दोषी सिद्ध हुए जपं सीइओ खत्री
अभियोजन की ओर से पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक रायकवार ने बताया गया कि 5 जून 2008 से 20 फरवरी 2009 तक ग्राम मेंहदी से छायन तक के मिट्टीकृत सडक़ निर्माण कार्य में इस प्रकरण के आरोपी तत्कालीन जपं सीइओ सुनील खत्री सहित अशोककुमार मेहरे आदि ने भ्रष्टाचार किया था। इस मामले में भी अरोपियों को 30 नवंबर 2018 को भी उनके किए गए 1 लाख 79 हजार 675 रुपए के भ्रष्टाचार एवं आपराधिक षडय़ंत्र में भी दंडित किया गया था। इसके बाद दूसरा मामल 9 सितंबर 2008 से 20 फरवरी 2009 तक ग्राम मऊ से सामगी तक के मिट्टीकृत सडक़ निर्माण में इस प्रकरण के आरोपी तत्कालीन जपं सीइओ सुनील खत्री सहित अशोककुमार मेहरे आदि ने भ्रष्टाचार किया था। इस मामले में भी आरोपियों को 27 दिसंबर 2018 को भी उनके किए गए 2 लाख 9 हजार 607 रुपए के भ्रष्टाचार एवं आपराधिक षडय़ंत्र में भी दंडित किया गया था। यह आरोपियों का तीसरा मामला है जिसमें उन्हे भ्रष्टाचार एवं आपराधिक षडय़ंत्र के लिए दंडित किया गया है।

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