आपदा से निपटने 18 हजार करोड़ खर्च किए सरकार ने

मीडिया से चर्चा में जलसंसाधन मंत्री कराड़ा ने कहा प्रदेश सरकार ने अबतक 100 से अधिक वादों को पूरा किया

शाजापुर.

प्रदेश सरकार ने आमजन के हित में अबतक किए कार्यों की जानकारी देने के उद्देश्य से प्रदेश के जलसंसाधन मंत्री हुकुमसिंह कराड़ा ने सोमवार को जिला मुख्यालय पर मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए बताया कि प्रदेश सरकार ने अपने वचन-पत्र में से 100 से अधिक वादो को पूरा कर दिया है। राज्य सरकार वचन-पत्र को पूरा करने के लिए संकल्पित है। इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. वीरेंद्रसिंह रावत, पुलिस अधीक्षक पंकज श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे।

कैबिनेट मंत्री कराड़ा ने अवगत कराया कि राज्य सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर फ्लेक्स-बैनर आदि लगाने पर प्रतिबंध लगाकर ऐतिहासिक काम किया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा अतिवृष्टि के कारण आई आपदा से निपटने के लिए करीब 18 हजार करोड़ रुपए व्यय किए हैं। इसके कारण राज्य सरकार के पूर्व से निर्धारित कार्यों एवं कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में थोड़ा विलंब हुआ है। राज्य सरकार को प्राकृतिक आपदा के लिए राहत राशि के रूप में केंद्र सरकार से राशि प्राप्त नहीं हुई है। राज्य सरकार ने अपने मदों में कटौती कर प्राकृतिक आपदा के दौरान पीडि़तो को राहत पहुंचाने का कार्य किया है। उन्होंने राहत पहुंचाने में मददगार बने शासकीय सेवको और अशासकीय संगठनों को भी धन्यवाद दिया है। इस दौरान मुख्य रूप से जिला कांग्रेस अध्यक्ष योंगेंद्रसिंह बंटी बना, सहकारिता नेता माणकचंद बोथरा, मार्केटिंग सोसायटी अध्यक्ष ठा. वीरेंद्रसिंह गोहिल, अमरसिंह बकानी, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि कालूराम कुंडला, शहर कांग्रेस अध्यक्ष बाबूखान खरखरे, कांग्रेस नेता आशुतोष शर्मा, सचिन पाटीदार, अनुविभागीय अधिकारी यूएस मरावी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी नेता, जल संसाधन विभाग सहित अन्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी व बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी उपस्थित रहे।

45 लाख हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता निर्माण का रखा लक्ष्य
कैबिनेट मंत्री कराड़ा ने विभागीय कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में जलसंसाधन विभाग द्वारा करीब 33 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित की जा चुकी है तथा अगामी 5 वर्षों में प्रदेश में 45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। हर खेत को पानी उपलब्ध कराने तथा गिरते जल स्तर और पानी के अपव्यय की रोकथाम के लिए इजराईल की तकनीक के आधार पर सूक्ष्म प्रणाली विकसित की जाएगी। यह धन राशि राज्य सरकार अपने स्रोतों से एकत्रित करेगी। वर्ष 2018-19 में रबी फसल के लिए 27.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की तुलना में इस वर्ष 2019-20 में 4 लाख हेक्टेयर की वृद्धि करते हुए कुल 31 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि नहरों में पानी के अपव्यय को रोकने के लिए लाईनिंग का काम करेंगे। सिंचाई विभाग विभागीय कार्यों के क्रियान्वयन में अन्य लोगों की भागीदारी भी बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं।

सिंचाई पंचायतों के होंगे चुनाव
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा सिंचाई के क्षेत्र में विकेंद्रीयकरण का काम भी किया जाएगा। इससे किसी एक अधिकारी के पास सभी योजनाओं की जिम्मेदारी नहीं रहेगी। बेहतर जल प्रबंधन, पानी के बंटवारे आदि के लिए सिंचाई पंचायतों का गठन करने का भी विभाग द्वारा निर्णय लिया गया है। जल समितियों में पहले आपसी विवाद होते थे, इसके लिए सरकार ने निर्णय लिया है कि जिस तरह ग्राम पंचायतों के चुनाव होते हैं, उसी तरह सिंचाई पंचायतों के भी चुनाव होंगे और इसका कार्यकाल 5 वर्ष रहेगा। इन सिंचाई पंचायतों को निर्णय लेने के अधिकार भी दिए जाएंगे।

पुराने जलाशयों का किया जाएगा गहरीकरण
कराड़ा ने बताया कि प्रदेश में वृहद सिंचाई योजनाओं के तहत निर्मित जलाशयों के रखरखाव के लिए सरकार ने गहरीकरण कराने का भी निर्णय लिया है। इस कार्य के लिए भी टेंडर निकाले जाएंगे। गहरीकरण के दौरान निकलने वाली रेत की नीलामी की जाएगी। वहीं उपजाऊ मिट्टी को किसानों को खेत में डालने के लिए दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि विश्व में छाई मंदी का असर भारत पर भी पड़ा है। कृषि एवं सिंचाई के माध्यम से प्रदेश में मंदी से निपटने का काम करेंगे। प्रदेश में 500 से अधिक परियाजनाएं चल रही है। साथ ही 118 नई परियोजनाएं भी स्वीकृत की गई है। इस प्रकार जल क्षमता बढ़ाकर सूक्ष्म योजना से 4 लाख हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई संभव हो सकेगी। आय बढ़ाने के लिए प्रदेश में निवेश बढ़ाने का काम किया जा रहा है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रदेश की सरकार आम लोगो के हित में सदैव कार्यरत् रहेगी।

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